सच्चे देशभक्त बनो, पहले भारत के सारे नाम तो जान लो
भारत का नाम नाभिवर्षा और टियांजू कैसे पड़ा?
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फोटो - thelallantop
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अपना देश जितना पुराना है, उतनी ही पुरानी है इसके नामों की हिस्ट्री. हर नाम के पीछे एक कहानी है. और भाईसाब जहां रहते हो, उस देश की, देश के नामों की कहानी जाननी जरूरी है कि नहीं? तो पढ़ो फिर.

अभी से शुरू करते हैं. आजादी के बाद भारत गणराज्य है अपने देश का नाम. माने 'रिपब्लिक ऑफ इंडिया.' भारत नाम के पीछे तीन लोगों के नाम का रेफरेंस है. पहले प्राचीन भारत के चक्रवर्ती राजा मनु के वंशज भरत. जो अपने फादर ऋषभदेव के बाद बने राजा. दूसरे राम के भाई भरत. भाई की खड़ाऊं रख कर 14 साल राज-काज संभाला. फिर पुरु खानदान के राजा दुष्यंत और रानी शकुंतला के बेटे भरत. भरत के बारे में कहानी मशहूर है कि बड़े बहादुर थे. डरते नहीं थे किसी से. शेर के दांत गिनने के लिए उसके मुंह में हाथ डाल दिया था. अभी ऊपर से नीचे तक जो भारत का मैप दिखता है उस पूरे हिस्से के राजा थे भरत. उनके साम्राज्य को भारतवर्ष, भरतखंड और भारत कहा जाता है.
आर्यावर्त की सीमारेखा तकरीबन इतनी फैली थी
इस नाम के पीछे भी है कंट्रोवर्सी. दरअसल यहां की सिविलाइजेशन में आर्यों का गेस्ट अपियरेंस है. आर्यों के नाम पर ही पड़ा नाम आर्यावर्त. आर्य थे कौन, ये है एक रहस्य. यूरोपियन कहते हैं हमने खोजा इंडिया, हम सबसे पहले पहुंचे. हम हैं पुराने जमाने के आर्य. सेंट्रल एशिया वाले कहते हैं हम आए. ईरान वाले कहते हैं, नाम से ही जाहिर है कि आर्यन हम हैं. लेकिन भारत के पुरनिया कहते हैं, हम पहले से ही बैठे हैं यहां, शुद्ध आर्य रक्त वाले.
हिंदुस्तान नाम रखा यूनानियों ने. जहां से उन्होंने एंट्री ली उस जगह का नाम था सिंध और सिंधु नदी से उनकी जिंदगी चलती थी. वे स को ह और ध को द बोलते थे इस तरह सिंध हो गया हिंद. बाद में देखा कि हिंद की सभ्यता बड़ी दूर तक फैली हुई थी. जहां तक यह सिविलाइजेशन मिली, उस पूरे एरिया का नाम हो गया हिंदुस्तान.
फारस का राजा डारियस
ईसा के 486 साल पहले. फारस का राजा डॉरियस. उसने बनवाए थे अपने और अपनी फैमिली के लिए मकबरे. नक्श-ए-रुस्तम के नाम से. ये मकबरे अब ईरान में हैं, जहां पहले थी फारस की विकसित सभ्यता. उस मकबरे में बादशाह डॉरियस चार जगहों के नाम लिखवाए हैं, जहां के लोग उसे बड़े अच्छे लगे. उनमें से एक नाम था हिदुश. यह हिदुश उस वक्त का इंडिया ही था.
1. भारत

अभी से शुरू करते हैं. आजादी के बाद भारत गणराज्य है अपने देश का नाम. माने 'रिपब्लिक ऑफ इंडिया.' भारत नाम के पीछे तीन लोगों के नाम का रेफरेंस है. पहले प्राचीन भारत के चक्रवर्ती राजा मनु के वंशज भरत. जो अपने फादर ऋषभदेव के बाद बने राजा. दूसरे राम के भाई भरत. भाई की खड़ाऊं रख कर 14 साल राज-काज संभाला. फिर पुरु खानदान के राजा दुष्यंत और रानी शकुंतला के बेटे भरत. भरत के बारे में कहानी मशहूर है कि बड़े बहादुर थे. डरते नहीं थे किसी से. शेर के दांत गिनने के लिए उसके मुंह में हाथ डाल दिया था. अभी ऊपर से नीचे तक जो भारत का मैप दिखता है उस पूरे हिस्से के राजा थे भरत. उनके साम्राज्य को भारतवर्ष, भरतखंड और भारत कहा जाता है.
2. आर्यावर्त

आर्यावर्त की सीमारेखा तकरीबन इतनी फैली थी
इस नाम के पीछे भी है कंट्रोवर्सी. दरअसल यहां की सिविलाइजेशन में आर्यों का गेस्ट अपियरेंस है. आर्यों के नाम पर ही पड़ा नाम आर्यावर्त. आर्य थे कौन, ये है एक रहस्य. यूरोपियन कहते हैं हमने खोजा इंडिया, हम सबसे पहले पहुंचे. हम हैं पुराने जमाने के आर्य. सेंट्रल एशिया वाले कहते हैं हम आए. ईरान वाले कहते हैं, नाम से ही जाहिर है कि आर्यन हम हैं. लेकिन भारत के पुरनिया कहते हैं, हम पहले से ही बैठे हैं यहां, शुद्ध आर्य रक्त वाले.
3. हिंदुस्तान

हिंदुस्तान नाम रखा यूनानियों ने. जहां से उन्होंने एंट्री ली उस जगह का नाम था सिंध और सिंधु नदी से उनकी जिंदगी चलती थी. वे स को ह और ध को द बोलते थे इस तरह सिंध हो गया हिंद. बाद में देखा कि हिंद की सभ्यता बड़ी दूर तक फैली हुई थी. जहां तक यह सिविलाइजेशन मिली, उस पूरे एरिया का नाम हो गया हिंदुस्तान.
4. नाभिवर्षा
सवाल ये है कि बहुत-बहुत पहले जब भरत नहीं हुए थे, आर्य भी नहीं थे और अंग्रेज भी नहीं आए थे, तब भारत को क्या कहा जाता था? भागवत पुराण में है इस क्वेस्चन का खरा जवाब. उस वक्त भारत का नाम था नाभिवर्षा.5. इंडिया
इस नाम के पीछे हैं दो व्यू. पहला यह कि अंग्रेज सिंधु घाटी को कहते थे इंडस वैली. इंडस वैली की सभ्यता, जहां तक फैली थी उसे कहा इंडिया. दूसरी स्टोरी इससे अलग है. कहते हैं कि अंग्रेजी में कुछ शब्दों में H साइलेंट रहता है. जैसे honest, hour. इस तरह जो यूनानियों ने सिंध को हिंद कह कर टांग तोड़ी थी, अंग्रेज इससे आगे बढ़ गए. H साइलेंट करके वो कहने लगे इंड. आगे जाकर इंड का इंडिया हो गया. अब दुनिया भर में इंडिया के नाम से ही जाना जाता है.6. टियांजू
जब भारत को भारत या इंडिया नाम नहीं मिला था, तब भी चीन इसका पड़ोसी देश तो था ही. तब चीन और जापान के लोग अपने पड़ोसी देश को टियांजू या टिंजेकू बुलाते थे. यह सिंधु (उनके हिसाब से शेंडू) का चायनीज ट्रांसलेशन है. चौथी सदी में घूमने आए चीनी यात्री फाह्यान ने यही नाम इस्तेमाल किया है. बुजुर्ग साधु शुआनजैंग ने भारत के पांच हिस्सों पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और सेंट्रल को टियांजू कहा था. फिलहाल चाइनीज लोग भारत को इंडिया और यिंडू कहते हैं.7. होडू
हिब्रू भाषा में लिखी किताब बुक ऑफ ईस्टर में इंडिया के लिए यह नाम इस्तेमाल किया गया है. मतलब ईसा मसीह के दुनिया में आने से 400 साल पहले भी सात समंदर पार कुछ लोग इंडिया को जानते थे और इसका तगड़ा भौकाल भी था.8. हिदुश:

फारस का राजा डारियस
ईसा के 486 साल पहले. फारस का राजा डॉरियस. उसने बनवाए थे अपने और अपनी फैमिली के लिए मकबरे. नक्श-ए-रुस्तम के नाम से. ये मकबरे अब ईरान में हैं, जहां पहले थी फारस की विकसित सभ्यता. उस मकबरे में बादशाह डॉरियस चार जगहों के नाम लिखवाए हैं, जहां के लोग उसे बड़े अच्छे लगे. उनमें से एक नाम था हिदुश. यह हिदुश उस वक्त का इंडिया ही था.

