इंडिया के इस सीरियल के दीवाने हो रखे हैं घाना के लोग
दुकानदार सामान नहीं देते, बीमार खटिया छोड़ देते हैं और गिफ्ट में टीवी वालों को मिलते हैं गाय, बकरी और सुअर .
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फोटो - thelallantop
कोफी अन्नान संयुक्त राष्ट्र के महासचिव थे, 2001 में उन्हें नोबेल मिला था. घाना के किसी आदमी के बारे में मुझे तो बस इतना ही पता है. लेकिन सोचो वहां के लोग हमारे इंडिया के किसी सीरियल के लिए पगलाए पड़े हों तो? पागलपन किस दर्जे का? बताते हैं. एक औरत थी. पति मर गया था. बीमार रहती थी. बिस्तर पर पड़ी थी. कुमकुम भाग्य देखने लगी. चंगी हो गई. जो टीवी चैनल ये शो दिखाया करता था, उनके यहां जब पहुंची तो दो गाएं लेकर. थैंक्यू बोला और गाएं गिफ्ट में दे दीं.
दरअसल घाना का एडोम टीवी पिछले अक्टूबर से अपने यहां कुमकुम भाग्य दिखाने लगा है. उनकी ट्वी भाषा में. लोग उससे जुड़ से गए हैं, क्योंकि सीरियल हिंदी या अंग्रेजी की बजाय उनकी खुद की भाषा में आता है. ऊपर से गजब का सेंटी है. साथ ही जिस चीज ने उन्हें अट्रैक्ट किया, वो था इसमें ब्याह-परिवार-बलिदान वाला कांसेप्ट. एक अलग से मुल्क के लिए ये चीज बड़ी अचंभे वाली हुई न कि कैसे एक लड़की अरेंज मैरिज से दूसरे घर आई और ऐसे अपना सबकुछ परिवार के पीछे झोंक दिया.
औरतें कहती हैं इस सीरियल में उनको अपनी जिंदगी दिखती है, अपनी रिलेशनशिप की मुश्किलों के हल दिखते हैं. प्रेरणा मिलती है. प्रेरणा पता नहीं कहां से मिलती है. लल्लन को तो बस किडनैपिंग मिलती है.
बिहार तो बस नाम से बदनाम है, सबसे ज्यादा किडनैपिंग तो 'कुमकुम भाग्य' में होती है.
Posted by The Lallantop
on Thursday, 17 March 2016
on Thursday, 17 March 2016
तरह-तरह के फैन
अब दूसरा किस्सा सुनो. एक औरत 76 साल की अपने 8 बच्चों के साथ टीवी वालों के दफ्तर पहुंची और उन्हें टीवी पर ये सीरियल ले आने के बदले एक बकरी गिफ्ट की. कर्ट्सी में. कहीं धन्यवाद तुम्हारा जो इत्ता अच्छा सीरियल लाए. एक और पहुंची उसने सुअर गिफ्ट किया, माने जिसको जो पुजता है वही दे रहा है अपनी खुशी में.https://www.youtube.com/watch?v=Mf5VbsWapPs
लोगों की दीवानगी यहीं नहीं थमती. नए-नए बच्चे जो हाल-फिलहाल में पैदा हो रहे हैं, उनमें किसी का नाम आपको 'पूरब' तो किसी का 'अभी' किसी का 'बुलबुल' किसी का 'प्रज्ञा' सुनने को मिल जाएगा. माने लोग अपने बच्चों के हिंदी नाम रखने लगे हैं.

अभी पिछले महीने फरवरी की 20 तारीख की बात है. एडोम टीवी वालों ने सीरियल के चल निकलने पर पार्टी दी थी, खुले में बारबेक्यू पार्टी थी. वहां लोग इंडियन ड्रेस पहन के आए थे. लोग 'पिक एंड एक्ट' खेल रहे थे. माने पर्ची उठाओ और किरदार बन जाओ जिसका नाम पर्ची में निकले. मने लोग भरे बैठे हैं, रटे बैठे हैं. कुछ फोटोज दिखाते हैं.



ये अद्वोआ साह हैं, घाना में कुमकुम भाग्य शो होस्ट करती हैं.
साह की इसी मार्च की 19 तारीख को शादी हुई है. देखिए वो शो कैसे होस्ट करती हैं.
https://youtu.be/zvYosH57DsQ
लोग सीरियल को इतना पसंद करते हैं कि दुकानदार टीवी पर कुमकुम भाग्य देख रहा है और ग्राहक सामान मांग दे तो भड़क जाते हैं.
लेकिन विरोध भी हो रहा है
ये एलेक्स हैं, एलेक्स कैरमेह. डिप्टी एजुकेशनल मिनिस्टर हैं, घाना के. इनने कहा हमारे यहां के टीवी वाले ये जो कुमकुम भाग्य दिखा रहे हैं, उसके कारण बच्चे पढ़ नहीं पा रहे. समाज पर गलत असर जा रहा है. जवान काम नहीं कर रहे ये सीरियल देखने के चक्कर में. ये भी कहा कि महीने के अंत में न ये सीरियल तुमको सैलरी दे देगा, न सर्टिफिकेट दे देगा. न जॉब दे देगा.
कुछ लोग कहते हैं, ऐसे सीरियल दिखाने का क्या मतलब? ऐसे सीरियल देखकर क्या हम विकसित देश हो जाएंगे? कुछ ने कहा स्क्रिप्ट ऐसी होनी चाहिए कि घाना का भी विकास हो. असिन असामन हुआ करता है कुछ वहां. कोई कुनबा या राजपरिवार टाइप्स होगा. उसके चीफ ने भी गाय गिफ्ट की है, एडोम वालों को.

लोग कहते हैं, ऐसा ही यहां वाली फिल्मों को भी प्रोत्साहित कर दिया करो कभी. 'इंडिया चले जाओ' कहने वाले वहां भी हैं, कहते हैं इंडिया से इतना ही प्यार है तो चले जाओ इंडिया और उनसे पूछना वो यहां के किसी एक्टर को जानते हैं या नहीं.
अब लगे हाथ ये भी देख लीजिए कि वहां कुमकुम भाग्य साउंड कैसे करता है.
https://www.youtube.com/watch?v=SI6KjGHp4K0
(फोटोज डेविड एंदोह और घाना वेब के सौजन्य से )

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