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बेंच क्या बदली, गुजरात सरकार की क्लास लगाने वाला हाईकोर्ट तारीफों के पुल बांधने लगा

'अगर सरकार काम नहीं करती तो हम सब मर गए होते.'

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1 जून 2020 (अपडेटेड: 1 जून 2020, 08:35 AM IST)
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बाएं से दाएं: कोरोना टेस्टिंग के लिए लोगों के सैंपल लेने के लिए निकले हेल्थ वर्कर्स (तस्वीर गुरुग्राम की है, प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल की गई है. क्रेडिट- PTI). गुजरात के सीएम विजय रूपाणी (फोटो- विजय रूपाणी का फेसबुक अकाउंट).
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गुजरात हाई कोर्ट. इसकी एक बेंच ने राज्य में कोरोना के हालात पर सरकार से कड़े सवाल किए थे. अहमदाबाद सिविल अस्पताल की तुलना 'कालकोठरी' से की थी. ये भी कहा था कि ज़रूरत पड़ने पर कोर्ट को अस्पताल के निरीक्षण पर जाना पड़ेगा. इन सब टिप्पणियों के बाद हाई कोर्ट की ये बेंच ही बदल गई. पहले जस्टिस परदीवाला इसकी अगुवाई कर रहे थे, बाद में चीफ जस्टिस विक्रम नाथ ने ये जगह ले ली. जस्टिस परदीवाला इस बेंच के जूनियर जज हो गए. नई बेंच ने फिर कोरोना मामले में दायर की गई जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की और इस बार गुजरात सरकार की तारीफ कर डाली.

'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा,

'हमारा संदेश लाउड और स्पष्ट है. जो भी मुसीबत के वक्त में मदद नहीं कर सकते, उनके पास सरकार के कामकाज की आलोचना करने का अधिकार नहीं है. अगर राज्य सरकार कुछ नहीं कर रही होती, जैसा कि आरोप लगाया गया है, तो संभावना है कि अब तक हम सब मर चुके होते. इस मुकदमेबाजी में हम केवल राज्य सरकार को जागरूक रखने और उसके संवैधानिक-वैधानिक दायित्व को याद दिलाने का काम कर रहे हैं.'

कोर्ट ने कहा कि सरकार की केवल कमियां गिनाने से लोगों के मन में डर पैदा होगा. कोर्ट ने कहा,

'हमारा विचार है कि PIL अकेले और परेशान लोगों के फायदे के लिए है, राजनीतिक फायदा उठाने के लिए नहीं. इस मुसीबत के वक्त में हमें एक रहना है, आपस में झगड़ना नहीं है. कोविड-19 संकट मानवीय संकट है, राजनीतिक नहीं. इसलिए ये ज़रूरी है कि कोई भी इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करे. कोविड-19 के बारे में अनिश्चितता और इकॉनमी में उसके प्रभाव से ये और भी ज़रूरी हो जाता है कि सरकार नीतियों के नज़रिये से सही काम करे.'


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गुजरात हाई कोर्ट, अहमदाबाद में है. (तस्वीर- फेसबुक)

विपक्ष के रोल पर क्या कहा?

हाई कोर्ट ने विपक्ष के रोल पर भी फोकस किया. कहा कि इस असाधारण परिस्थितियों में विपक्ष का रोल भी बहुत ज़रूरी है. कहा,

'इससे कोई मना नहीं कर रहा कि विपक्ष का रोल सरकार की कमियां बताना है, लेकिन इस वक्त आलोचना वाली ज़ुबान की जगह मदद वाले हाथों की ज्यादा ज़रूरत है. केवल सरकार की आलोचना करने से जादुई तौर पर कोविड-19 नहीं जाएगा, इससे मृत लोग भी वापस नहीं आएंगे. प्रतिकूल आलोचना कोई मदद नहीं करेगी, रचनात्मक आलोचना कर सकती है.'

बेंच ने आगे कहा कि कोर्ट सरकार के कामकाज में दखलअंदाज़ी नहीं करेगा, लेकिन अगर सरकार अपना काम करने में नाकाम होगी, तो कोर्ट अपना कदम रखेगा. कोर्ट ने कहा,

'सरकार जो भी अच्छा काम करेगी, उसकी प्रशंसा ज़रूर होगी. अगर हमें कोई लापरवाही मिलती है, तो हम (कोर्ट) आगे आएंगे.'

इसके अलावा कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अलग-अलग कैटेगिरी के मरीज़ों के लिए प्रोटोकॉल को उल्लेखित करें, ताकि किसी तरह की लापरवाही के कारण किसी की जान न जाए.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने क्या कहा था और कब बदली गई बेंच, ये जानने के लिए इसे पढ़ें-

गुजरात हाई कोर्ट की जिस बेंच ने कोरोना पर राज्य सरकार से तीखे सवाल पूछे थे, वो बदल गई है

देखिये भारत में कोरोना कहां-कहां और कितना फैल गया है.



वीडियो देखें: क्या गुजरात में कोरोना वायरस से हो रही इतनी ज्यादा मौतों की वजह 'फर्जी वेंटिलेटर्स' हैं?

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