The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Entertainment
  • Government made it clear that Covid 19 Vaccine makers will be responsible for any adverse effect

अगर कोरोना वैक्सीन ने शरीर में कुछ रायता फैलाया तो ज़िम्मेदारी किसकी होगी?

सरकार ने इस बारे में स्थिति स्पष्ट कर दी है.

Advertisement
pic
14 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 14 जनवरी 2021, 01:10 PM IST)
Img The Lallantop
तस्वीर बीकानेर की है. तारीख़- 13 जनवरी. ड्राई रन के दौरान कोविड 19 का टीका लगवाता एक व्यक्ति. 16 जनवरी से वैक्सीनेशन शुरू हो रहा है. (फोटो- PTI)
Quick AI Highlights
Click here to view more
भारत में कोविड-19 की दो वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल मिल चुका है. 16 जनवरी से टीका लगना भी शुरू हो जाएगा. ये दो वैक्सीन हैं -
पहली– ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनका की डेवलप की हुई वैक्सीन ‘कोविशील्ड’. इस वैक्सीन का प्रोडक्शन भारत में ही हुआ है. पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में. दूसरी – हमारी स्वदेशी वैक्सीन. भारत बायोटेक की डेवलप की हुई ‘कोवैक्सीन’.
लेकिन चूंकि वैक्सीन को काफी तेजी से बनाकर तैयार किया गया है. ऐसे में अगर इसके कोई साइडइफेक्ट्स देखने को मिलते हैं, तो ज़िम्मेदारी किसकी होगी? सरकार ने इस पर बात साफ कर दी है. सरकार और वैक्सीन मेकर्स के बीच वैक्सीन खरीदने के लिए जो डील हुई है, उसमें ये साफ कर दिया गया है कि ऐसी किसी भी स्थिति में जवाबदेही वैक्सीन मेकर्स की होगी. वो गेंद दूसरे पाले में नहीं फेंक सकते. इसके लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट का रेफरेंस लिया गया है. मेकर्स से कहा गया है कि वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद भी वे लगातार इस पर नज़र रखें कि बड़े पैमाने पर इसका कैसा असर हो रहा है. अगर कोई बात ऊपर-नीचे होती है तो इसे फौरन संज्ञान में लाया जाए. क्या फाइज़र की वैक्सीन भी आएगी? कोविशील्ड और कोवैक्सीन के अलावा एक और वैक्सीन है, जो अभी हमारे देश में तो नहीं है लेकिन लोग उसकी ख़ोज-ख़बर लिए रहते हैं.  फाइज़र की वैक्सीन. इससे भी बड़ी उम्मीदें हैं यहां. यूके में इसे इमरजेंसी अप्रूवल मिल चुका है. वहां वैक्सीनेशन शुरू भी हो चुका है इसका. लेकिन फिलहाल इस वैक्सीन को भारत आने में, यहां अप्रूवल लेने में अभी और समय लगेगा. कारण– भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी विदेशी वैक्सीन को भारत में अप्रूवल चाहिए तो यहां लोकल लेवल पर एक ट्रायल करना होगा. कोविशील्ड ने भी किया था. बाकियों को भी करना होगा. वैक्सीन स्ट्रैटजी के लिए बने सरकारी पैनल को हेड कर रहे विनोद पॉल भी लोकल ट्रायल की इस ज़रूरत पर मुहर लगा चुके है. भारत सरकार अभी भी इस स्टैंड पर कायम है. फाइज़र अभी फाइनल नहीं बता दें कि दिसंबर 2020 के अंत में जब भारत में कोरोना की वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल दिए जाने की बात आई थी तो कोविशील्ड और कोवैक्सीन से भी पहले फाइज़र ने दावा ठोका था. लेकिन उसकी दावेदारी इसी एक पॉइंट पर आकर कमज़ोर हो गई थी. लोकल ट्रायल. लोकल ट्रायल की ये अनिवार्यता ही है कि रूस में डेवलप हुई वैक्सीन स्पूतनिक-वी भी वहां अप्रूवल पा चुकी है. लेकिन भारत में अभी ये अपना ट्रायल ही पूरा कर रही है. इसके सफल होने पर ही हमारे यहां स्पूतनिक-वी को लगाने की मंजूरी मिलेगी. सबसे बड़ा वैक्सीनेशन प्रोग्राम कोरोना का वैक्सीनेशन प्रोग्राम भारत का पहला और सबसे व्यापक वैक्सीनेशन प्रोग्राम है, जिसमें वयस्कों को वैक्सीन लगाई जाएगी. इसके पहले के टीकाकरण कार्यक्रमों में बच्चों को अलग-अलग वैक्सीन दी जाती रही हैं. भारत में कोरोन की वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू करने के लिए 16 जनवरी की तारीख़ मुकर्रर हुई है. पीएम मोदी इसकी शुरुआत करेंगे. बताया जा रहा है कि पहले दिन 3 लाख लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी. तीन हजार जगहों पर वैक्सीनेशन शुरू होगा, जिसे बढ़ाकर 5 हजार किया जाएगा. प्रायॉरिटी सेट है. पहले फ्रंटलाइन वर्कर्स और बुज़र्गों को. फिर जब वैक्सीन की अगली खेप आएगी, तो बाकियों को लगेगी. तब तक जिनको वैक्सीन नहीं मिल रही है, उनके लिए मास्क, दो गज़ दूरी और हैंड हाईजीन ही सबसे बड़ा सहारा है.

Advertisement

Advertisement

()