पूर्व सेंसर बोर्ड अध्यक्ष पहलाज निहलानी का निधन, गोविंदा को लॉन्च किया मगर PM मोदी क्यों हुए नाराज?
सेंसर बोर्ड अध्यक्ष के तौर उन्होंने 'उड़ता पंजाब' में 89 कट्स लगाने की वकालत की थी.

वेटरन फिल्म प्रोड्यूसर और सेंसर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष Pahlaj Nihalani का निधन हो गया. वो पिछले कुछ महीनों से लिवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे. हाल ही में उन्हें मुंबई के Nanavati Hospital में एडमिट करवाया गया था. बावजूद इसके, उनकी हालत में सुधार नहीं आया. आज यानी 04 जून को उनका 76 साल की उम्र में निधन हो गया. अपने लंबे फिल्म करियर में उन्होंने Shola Aur Shabnam व Aankhen (1993) जैसी हिट फिल्में प्रोड्यूस की थीं. मगर दूसरी तरफ, सेंसर बोर्ड अध्यक्ष के रूप में उनका करियर हमेशा विवादों से भरा रहा.
# पहलाज निहलानी का फिल्म प्रोडक्शन करियर
पहलाज निहलानी का जन्म 10 जनवरी 1950 को मुंबई के एक सिंधी परिवार में हुआ था. 'अर्ध सत्य' और 'तमस' जैसी क्लासिक फिल्में बनाने वाले नेशनल अवॉर्ड विनिंग डायरेक्टर गोविंद निहलानी उनके बड़े भाई हैं. गोविंद जहां सीरियस सिनेमा पसंद करते हैं, पहलाज ने अपना करियर मसाला एंटरटेनर के जरिए बनाया. 1982 में उन्होंने संजीव कुमार और शत्रुघ्न सिन्हा के साथ करियर की पहली मूवी 'हथकड़ी' बनाई थी. अगले कुछ दशकों तक उन्होंने कई अन्य मूवीज़ प्रोड्यूस की, जिनमें से कुछ तो बड़ी कमर्शियल हिट बनीं.
1986 में पहलाज ने 'इल्ज़ाम' बनाई. इसे एक तरह से गोविंदा का मेनस्ट्रीम डेब्यू भी माना जाता है. 1987 में उनकी फिल्म 'आग ही आग' से चंकी पांडे को स्टार्ट मिला. 'शोला और शबनम' से उन्होंने दिव्या भारती को हिंदी ऑडियंस के बीच चर्चा दिलवाई. 1993 में उनके प्रोडक्शन तले बनी 'आंखें' ने गोविंदा और चंकी पांडे को बड़ा स्टार बना दिया था. उनकी कुछ अन्य चर्चित फिल्मों में 'गुनाहों का फ़ैसला', 'मिट्टी और सोना' और 'पाप की दुनिया' को गिना जाता है.
# गोविंदा की ‘अवतार’ पहलाज निहलानी बना रहे थे
पहलाज ने अपने करियर में गोविंदा के साथ खूब काम किया है. बतौर प्रोड्यूसर उनकी लास्ट फिल्म ‘रंगीला राजा’ (2019) थी, जिसमें गोविंदा ने डबल रोल किया था. आपको 'आप की अदालत' से गोविंदा का वो बयान याद होगा, जहां उन्होंने 'अवतार' में काम करने का दावा किया था. हालांकि तब उन्होंने ये कह दिया कि उन्हें जेम्स कैमरन वाली मूवी से ऑफर मिला था. मगर ये बात न पूरी तरह गलत थी, न पूरी तरह सच. दरअसल, वो 'अवतार' में वाकई काम कर रहे थे. मगर वो 'अवतार' हॉलीवुड नहीं बल्कि बॉलीवुड वाली थी. 2012 में पहलाज निहलानी इस नाम से एक मूवी डायरेक्ट कर रहे थे. गोविंदा उसमें लीड रोल कर रहे थे. दोनों ने 40 परसेंट हिस्से की शूटिंग भी पूरी कर ली थी मगर फिर वो मूवी शेल्व हो गई. बाद में गोविंदा ने 'अवतार' को लेकर कई दावे किए मगर पहलाज ने हमेशा उन्हें गलत ही बतलाया.
# सेंसर बोर्ड अध्यक्ष के तौर पर विवादों से भरा करियर
पहलाज अपने करियर में लंबे समय तक एडमिनिस्ट्रेटिव रोल्स में रहे थे. वो लगातार 29 सालों तक Association of Motion Pictures and TV Programme Producers के प्रेसिडेंट भी थे. मगर हालिया दिनों में उन्हें सबसे अधिक सुर्खियां सेंसर बोर्ड (CBFC) अध्यक्ष रहते हुए मिली. 2015 में उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ये जिम्मेदारी दी थी. मगर इसके बाद उन्होंने इतने कड़े और विवादित फैसले लिए कि मात्र दो साल बाद यानी 2017 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया.
सेंसर बोर्ड अध्यक्ष रहते हुए पहलाज के सबसे विवादित फैसलों की सूची बताते हैं,
- पहलाज ने कहा कि कुछ गालियां A सर्टिफिकेट वाली फिल्मों में भी नहीं चलेंगी.
- जुलाई 2015 में उन्होंने फैसला लिया कि A सर्टिफिकेट वाली फिल्में टीवी पर नहीं दिखाई जाएंगी. हालांकि बाद में उन्होंने अपना फैसला बदल लिया.
- उन्होंने जेम्स बॉन्ड फ्रैंचाइज़ की 'स्पेक्टर' फिल्म का किसिंग सीन कम कर दिया.
- सबसे बड़ा विवाद जून 2016 में 'उड़ता पंजाब' फिल्म के दौरान हुआ था. तब सेंसर बोर्ड ने इस मूवी में 89 कट्स लगाने की मांग की थी. हालांकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने ऐसा होने नहीं दिया और मूवी को केवल एक कट के साथ रिलीज़ करवा दिया.
- शाहरुख खान स्टारर 'जब हैरी मेट सेजल' के ट्रेलर से उन्होंने 'इंटरकोर्स' शब्द हटवा दिया था.
- जब गजेन्द्र चौहान को FTII अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध हुआ, तो उन्होंने संस्था के स्टूडेंट्स को एंटी-नेशनल कह दिया.
- उनका मानना था कि सनी लियोनी पर सेंसरशिप होनी चाहिए. साथ ही वो ये कहते कि 'ओमकारा' और 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की गालियों को देखते हुए उन्हें कभी रिलीज़ नहीं करना चाहिए था.
# जब प्रधानमंत्री मोदी भी पहलाज निहलानी से नाराज़ हो गए
पहलाज खुद को खुलेआम ‘मोदी भक्त’ बताते थे. लेकिन नवंबर 2015 में ये बात उन पर भारी पड़ गई. तब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डेडिकेट करते हुए 'मेरा देश महान' नाम से एक म्यूजिक वीडियो बनवाया. इस वीडियो का एक छोटा वर्जन सलमान खान स्टारर 'प्रेम रतन धन पायो' के इंटरवल के दौरान थिएटर्स में भी दिखाया गया था. बताया जाता है कि तब खुद पीएम मोदी भी उस वीडियो से काफी असहज हो गए थे. यहां तक कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी इस बात पर काफी नाराजगी जताई थी.
कुलमिलाकर, सेंसर बोर्ड अध्यक्ष के तौर पर पहलाज का करियर विवादों से भरा हुआ था. उनके टेन्योर को सेंसर बोर्ड का सबसे काला दौर बताया जाता है. इस वजह से उन्हें 2017 में इस जिम्मेदारी से हटा दिया गया. उनके बाद लिरिसिस्ट प्रसून जोशी सेंसर बोर्ड अध्यक्ष बने. रोचक बात ये है कि CBFC से बाहर आते ही पहलाज 'जुली 2' फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर बने, जो खुद एक एरॉटिक फिल्म है. हालांकि बाद में उन्होंने फिल्मों से काफी दूरी बना ली. लास्ट एक महीने में लिवर की दिक्कत के कारण उनकी तबीयत काफी खराब हो गई थी. अलग-अलग हॉस्पिटल्स में उनका चेकअप चला. बावजूद इसके उन्हें बचाया नहीं जा सका.
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