नहीं रहे फिल्ममेकर शिव कुमार खुराना, जिन्होंने विनोद खन्ना पर बतौर हीरो सबसे पहले दांव लगाया था
शिव कुमार खुराना ऐसे डायरेक्टर थे, जिन्होंने कई सेकंड लाइन ऐक्टर्स को बतौर लीड मौक़ा दिया था,

बुधवार रात को खबर आई, गोविंदा को लॉन्च करने वाले फ़िल्ममेकर इस्माइल श्रॉफ नहीं रहे. उसके अगले दिन एक और खबर आ गई. डायरेक्टर शिव कुमार खुराना का निधन हो गया. वो 83 बरस के थे. खुराना साहब कई दिनों से बीमार थे. उन्हें मुंबई के ब्रह्मकुमारी ग्लोबल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. वहीं उनकी गुरुवार रात मौत हो गई. ईटाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक शिव कुमार खुराना को कोई खास बीमारी नहीं थी. बढ़ती उम्र के कारण उनका शरीर शिथिल हो गया था और वो बीमार रहने लगे थे. 'करन' फ़िल्म में मौक़ा देने वाले शिव कुमार खुराना के लिए विंदू दारा सिंह ने दुख जताते हुए लिखा:
एक अच्छे इंसान की आत्मा को शांति मिले. इस नुकसान को सहन करने की ताक़त ईश्वर उनके परिवार को दे.
शिव कुमार 70 और 80 के दशक में काफ़ी सक्रिय रहे. इस बीच उन्होंने 'बदनाम', 'बदनसीब', 'बे आबरू', 'सोने की ज़ंजीर' और 'इंतकाम की आग' सरीखी फ़िल्में बनाईं. उनके बारे में कहा जाता है कि वो ऐसे पहले डायरेक्टर थे, जिन्होंने विनोद खन्ना पर बतौर हीरो दांव लगाया. विनोद को 'हम तुम और वो' से पहले निगेटिव रोल्स में ज़्यादा प्रसिद्धि मिली थी. हालांकि विनोद ने इससे पहले और भी काम किया, पर 'मेरा गांव मेरा देश' में उनके विलेन के रोल को काफ़ी पसंद किया गया था. इसके बाद 'हम तुम और वो' रिलीज़ हुई. फिर इंडस्ट्री में उन्हें बतौर हीरो भी देखा जाने लगा. शिव कुमार ने उस दौर के सेकंड लाइन ऐक्टर समझे जाने वाले कई कलाकारों को लीड रोल में लेकर फिल्में बनाई. चाहे वो लक्ष्मीकांत बेर्डे की 'सोने की ज़ंजीर' हो या फिर सदाशिव अमरापुरकर की 'बदनाम' हो. 1965 में 'टार्जन एंड द सर्कस' से शुरू हुआ उनका करियर 1999 तक अबाध रूप से ज़ारी रहा. इस दौरान उन्होंने संजीव कुमार, विनोद मेहरा, जॉय मुखर्जी, फिरोज खान और अशोक कुमार के साथ फिल्में की. 28 अक्टूबर शाम चार से पांच बजे के बीच गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा (अंधेरी वेस्ट) में उनके लिए प्रार्थना सभा का आयोजन होगा.
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