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फिल्म रिव्यू - स्टार ट्रेक बियॉन्ड: ये सुपरहीरो कितने नॉर्मल हैं!

स्टार ट्रेक सीरीज़ की तीसरी फिल्म. स्टार ट्रेक बियॉन्ड. पढ़ें फिल्म रिव्यू.

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22 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 23 जुलाई 2016, 07:11 AM IST)
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स्टार ट्रेक सीरीज़ की तीसरी फिल्म. स्टार ट्रेक बियॉन्ड. पिछली फिल्मों से कम्पेयर करें तो सीरीज़ की सबसे शांत फिल्म.
फ़िल्म की खासियत ये है कि इसकी कहानी एपिसोड की तरह होती है. वरना सीक्वेल में ऐसा होता है कि कहानी पीछे से खींची गयी होती है. अक्सर. कैरेक्टर्स वही हैं मगर उनकी तबीयत बदली हुई सी मालूम देती है.
फिल्म में एन्टरप्राइज़ का जहाज एक दूसरे प्लैनेट पर आ गिरता है. उसपर 'बीज़' ने हमला बोला और वो शिप दो हिस्सों में कट गया. 'बीज़' उन छोटे-छोटे जहाजों का नाम है जिनकी कमान क्राल के हाथ में रहती है. क्राल यानी वो दैत्य जिसका मुंह एक छिपकली की तरह का है, आवाज़ मुंह में लड्डू भरे राजकुमार जैसी है. कोई मिल गया में जादू को धूप से शक्ति मिलती थी. उसी तरह से इस फिल्म में क्राल को 'लोगों की एनर्जी चूस कर' ताकत मिलती है. क्राल की जिंदगी का एक्कै मकसद बन जाता है. एन्टरप्राइज़ के पास एक ऐसा 'आर्ट पीस' होता है जो काफी ताकतवर होता है. क्राल को उसकी भयानक चाहत होती है. उधर टूटे हुए एन्टरप्राइज़ के शिप पर चढ़े सभी लोग एक दूसरे प्लैनेट पर एक दूसरे से मिलने की कोशिश में लगे होते हैं. इधर क्राल उस आर्ट पीस को पाने के लिए हर संभव कोशिश में लगा रहता है. और बस इसी जमघट की कहानी है स्टार ट्रेक बियॉन्ड में.
फ़िल्म के पहले दो चैप्टर स्टार ट्रेक और स्टार ट्रेक इनटू डार्कनेस डायरेक्टर जे जे अब्राम्स की देन थे. जबकि स्टार ट्रेक बियॉन्ड को डायरेक्ट किया है जस्टिन लिन ने. जस्टिन लिन के नाम फ़ास्ट एंड फ्यूरियस सीरीज़ की चार फ़िल्मों का डायरेक्शन है. और उनकी फ़ास्ट एंड फ्यूरियस की फितरत इस फिल्म में भी दिखाई देती है. अगर हम फ़ास्ट एंड फ्यूरियस को देखें तो पाएंगे कि वो एक ऐसे ग्रुप की कहानी है जिसमें अलग अलग मिज़ाज़ और तबीयत के ऐसे लोग हैं जो एक साथ एक ही समय पर एक दूसरे की मदद करते हुए ऐसे काम करते हैं कि नईय्या पार लग ही जाती है. स्टार ट्रेक की इस फिल्म में भी ऐसा ही देखने को मिला है. एक समय ऐसा होता है जब एन्टरप्राइज़ शिप के कैप्टन जेम्स टी कर्क और सभी साथी प्लैनेट पर एक दूसरे से अलग भटक रहे होते हैं. फिर वो सभी किसी भी तरह मिलते हैं, एक दूसरे का साथ देते हैं, और मुश्किल से पार पाते हैं.
डायरेक्टर के साथ स्टार ट्रेक बियॉन्ड की कास्ट
डायरेक्टर के साथ स्टार ट्रेक बियॉन्ड की कास्ट

हम सभी सुपरहीरो फ़िल्में देखने के आदी हो चुके हैं. और ये फिल्में भी कमोबेश एक ढर्रे पर ही चल रही हैं. इसमें एक ज़रूरी पेंच ये बन चुका है कि फिल्म का अंत भयावह होना चाहिए. एकदम 'हम साथ साथ हैं' की फैमिली पिक्चर जैसे ग्रांड! उसमें मार-धाड़, तोड़-फोड़ से लेकर सब कुछ होना चाहिए. जब तक बिल्डिंगें गिर गिर कर हाथ-पैर न जोड़ने लगें तब तक तो थू है. और इन्हीं पेंचों को काटती है ये 'सुपरहीरो' फिल्म. डायरेक्टर जस्टिन ली ने इस बात को बड़े ही अच्छे ढंग से बता दिया है कि सिर्फ ताकत ही नहीं इन 'सुपरहीरोज़' के पास दिमाग भी होता है, जिसे वो इस्तेमाल भी करते हैं. इसके साथ ही आम चलन के उलट विलेन भी काफ़ी 'शालीन' है. कोई बड़ा भौकाल नहीं. कोई बदला लेने की 'परम' भावना नहीं. बस एक अजीब सी शक्ल और आवाज़ वाला आदमी जिसे एक 'आर्ट पीस' भर चाहिए.
क्राल

फ़िल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जो आपको सीट के किनारे बिठा के रख दे या आपके माथे पे बल पड़ने लगें या आप मुट्ठियां भींच लें. फिल्म का फ्लो बहुत ही नॉर्मल चलता रहता है. बीच बीच में मज़ाकिया डायलॉग्स पर आप अपने नथुनों से थोड़ी ज़्यादा हवा बाहर निकालेंगे. लेकिन असली मज़ा उन्हें ही आएगा जो स्टार ट्रेक को एवेंजर्स जैसा या एक्स-मेन जैसा फॉलो करते आये हैं. क्यूंकि इसका असली मज़ा इसके कैरेक्टर्स और चीज़ों को लेकर उनके रिएक्शन में है. फ़िल्म थ्री-डी में है लेकिन अंत में चलने वाले क्रेडिट्स रोल के सिवा थ्री-डी की ज़रुरत कोई ख़ास महसूस नहीं होती. 
https://youtu.be/Guh9lsnzxSE

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