The Lallantop
Advertisement

फिल्म रिव्यू: मिलन टॉकीज़

'मिर्ज़ापुर' वाले गुड्डू भैया की पिच्चर.

Advertisement
pic
15 मार्च 2019 (अपडेटेड: 15 मार्च 2019, 01:42 PM IST)
Img The Lallantop
'मिलन टॉकीज़' तिग्मांशु धुलिया का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है.
Quick AI Highlights
Click here to view more
पिछले कुछ सालों से हिंदी सिनेमा की कहानी का सेंटर दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों से निकलकर उत्तर प्रदेश जा बसा है. हर चौथी फिल्म में यूपी है. चाहे प्रेम कहानी हो, अंडरवर्ल्ड हो या डकैतों वाली फिल्म. तिग्मांशु धुलिया की 'मिलन टॉकीज़' भी इसी परंपरा की फिल्म है. तिग्मांशु धुलिया खुद इलाहाबाद से हैं. इस शहर से उनका प्यार उनकी पहली फिल्म 'हासिल' से ही नज़र आने लगा था. हासिल, यानी वो फिल्म जो उत्तर प्रदेश के नौजवानों के लिए कल्ट स्टेटस रखती है. 'मिलन टॉकीज़' काफी हद तक 'हासिल' वाला जादू फिर से क्रिएट करने का प्रयास है. यहां तक कि हीरो का नाम भी 'हासिल' की तरह अनिरुद्ध ही है. क्या ये प्रयास कामयाब हो पाया? आइए जानते हैं.

गंगा किनारे वाला फ़िल्मी छोरा

दशकों पहले एक गंगा किनारे वाला छोरा इलाहाबाद की गलियों से निकलकर मुंबई पर छा गया था. आज उसको दुनिया जानती है. उसी शहर में एक और छोरा है जो वही इतिहास दोहराना चाहता है. नाम है अनिरुद्ध शर्मा उर्फ़ अन्नू कुमार. बड़ा डायरेक्टर बनने के सपने देखता है. वहां तक पहुंचने के लिए लोकल फ़िल्में बनाता है और उसमें लगने वाला पैसा हासिल करने के लिए स्टूडेंट्स को एग्ज़ाम में चीटिंग करवाता है. इसी चक्कर में एक दिन मैथिलि से मुलाक़ात होती है, जो शादी करने के लिए पास होना चाहती है. असल में वो नहीं, उसके पिता चाहते हैं.
इसे हासिल पार्ट टू नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उतनी एंगेजिंग नहीं है.
इसे हासिल पार्ट टू नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उतनी एंगेजिंग नहीं है.

तो भैया अन्नू को होता है मैथिलि से प्यार. वो भी पूरा फ़िल्मी स्टाइल. मिलने का अड्डा है मिलन टॉकीज़ थिएटर. अब जब प्यार है तो ज़ालिम समाज भी है, मिलन-जुदाई भी है और हैप्पी एंडिंग भी. देखने वाली बात ये थी कि इतनी ज़्यादा घिसी हुई लकीर को क्या दिलचस्प तरीके से पेश कर पाते हैं तिग्मांशु? तो इसका जवाब है एक हद तक ही बस.
इंटरवल तक फिल्म बहुत मज़ेदार है. उसके बाद भटक जाती है. वही हाल, जो शाहरुख की ज़ीरो का था. पहला हाफ कब ख़त्म होता है पता ही नहीं चलता. तमाम दिलचस्प संवाद और गाने इसी हिस्से में आए हैं. 'अपने कल्चर में प्लीज़ कहने पे बैन है' जैसे लिरिक्स बढ़िया ढंग से टोन सेट करते हैं. 'खेत में नाला और घर में साला' जैसे डायलॉग यूपी वाला सेटअप कामयाबी से एस्टेब्लिश करते हैं. सेकंड हाफ में फिल्म लाइट मूड त्याग कर सीरियस हो जाती है और थोड़ी बोझिल होने लगती है. ये हाफ लंबा खिंच गया है और कई जगह अतार्किक भी है. अंत में फिल्म थोड़ी ट्रैक पर लौटती भी है, तो भी वो उतना संतोषजनक नहीं लगता.

मिर्ज़ापुर वाले गुड्डू भैया की पिच्चर

फिल्म का लीड कपल है अली फज़ल और श्रद्धा श्रीनाथ. 'मिर्ज़ापुर' वेब सीरीज के बाद अली फज़ल की फैन फॉलोइंग बढ़ी है. जो देसी तेवर उन्होंने वहां अपनाए थे वो उसे 'मिलन टॉकीज़' तक भी लाए हैं. बोनस के साथ. यहां उनको एक्शन भी करना है, रोमांस भी करना है, ड्रामा भी करना है और कॉमेडी भी करनी है. उन्होंने सब किया. कामयाबी से किया. श्रद्धा श्रीनाथ साउथ में मशहूर नाम है. हिंदी में ये उनकी पहली फिल्म है. वो बेहद मासूम लगती हैं. इतनी की उन्हें हासिल करने के लिए अन्नू की जद्दोजहद से आप सहमत होते हैं.
आशुतोष राणा हमेशा की तरह शानदार हैं.
आशुतोष राणा हमेशा की तरह शानदार हैं.

आशुतोष राणा और संजय मिश्रा जैसे मंझे हुए कलाकारों की एक्टिंग पर बात करना हमें बंद कर देना चाहिए. ये लोग अपना दिया हुआ काम हर बार इतने परफेक्शन से करते हैं कि इनकी तारीफ़ में नए-नए शब्द हर बार लाना मुमकिन नहीं हो पाता. सिकंदर खेर काफी अरसे बाद किसी फिल्म में नज़र आए और उन्होंने बढ़िया काम किया है. अन्नू के तीन और मैथिलि की एक दोस्त कहानी को और दिलचस्प बनाते हैं. ये रोल निभाने वाले सभी एक्टर शानदार हैं.

तिग्मांशु, दी एक्टर

सबसे ज़्यादा तालियां बटोर ले जाते हैं तिग्मांशु धुलिया खुद. उन्होंने अन्नू के पिता का रोल किया है जो कि बेहद फ़िल्मी आदमी है. बाप-बेटे की बॉन्डिंग ग़ज़ब की है. इतनी कि कई लड़कों के दिल में हसरत उठेगी. कि काश उनके पिता भी ऐसे ही होते. तिग्मांशु जब-जब भी स्क्रीन पर आते हैं दिल खुश कर देते हैं.
तिग्मांशु की एक्टिंग का लोहा रामाधीर सिंह मनवा ही चुके हैं, और क्या कहें!
तिग्मांशु की एक्टिंग का लोहा रामाधीर सिंह मनवा ही चुके हैं, और क्या कहें!

मिलन टॉकीज़ नाम में ही नॉस्टैल्जिया है. सिंगल स्क्रीन थिएटर्स का. फिल्म में एक और दिलचस्प चीज़ भी है. अन्नू अपनी प्रेमिका तक संदेस पहुंचाने के लिए बड़े अनोखे तरीके इस्तेमाल करता है. क्या, ये फिल्म में ही देख लीजिएगा. कुल मिलाकर मज़ेदार फर्स्ट हाफ, अली फज़ल एंड टीम की बढ़िया एक्टिंग और प्रयागराज बने इलाहाबाद की फुल फ़िल्मी प्रेम कहानी के लिए देखी जा सकती है 'मिलन टॉकीज़'.


वीडियो:

 

Advertisement

Advertisement

()