चार-पांच लड़के हैं. एक गूंगा है. बहुत बेकार ऐक्टर है. सफ़ेद जूते पहनने वाले बाप काबेटा है. सीरियल! सीरियल! सीरियल! बनाने वाली बहन का भाई है. सब आपस में दोस्त हैं.मगर इस फ़िल्म में नहीं हैं. इस बार कुछ लोचा है जो समझ में नहीं आया. कोई तो कहानीबताई थी. कुछ अनाथालय वगैरह से जुड़ी हुई बातें थीं. अपने पल्ले कुछ नहीं पड़ा. फिरये सभी एक बंगले में पहुंच गए. क्यूं गए, मालूम नहीं अपने को. कुछ तो हुआ था. फिरवहां भूत-वूत आ जाता है. कुछ-कुछ होता रहता है. क्या होता है ये अपने पल्ले नहींपड़ा. फिर मर्डर-वर्डर की कहानी आ जाती है. फिर कुछ न कुछ होता है. और फिर पिक्चरखतम हो जाती है. सब लोग खड़े होते हैं और चले जाते हैं. यही है फ़िल्म गोलमाल अगेन.अगेन. यानी फिर से. क्यूं फिर से? एक ही बार क्यूं नहीं? ट्रेन थोड़ी है कि आती रहे.सूरज थोड़ी है कि उगता रहे. एक बार हो गया बहुत हुआ. पहली गोलमाल बढ़िया फ़िल्म थी. अबरगडा चालू है. कुछ भी बना दिया जा रहा है. जनता भी इसी चक्कर में बन रही है. इसीचक्कर में तुषार कपूर को ये ग़लतफहमी हुई जा रही है कि वो बढ़िया कॉमेडी ऐक्टर हैं.गूंगे बने रहने की ऐक्टिंग करते हुए पांडू को आन्डू बोलते हैं और बगल में खड़ा आदमीकह देता है, "गाली मत दे." बस, जनता गिल हो जाती है. वो मन ही मन सोच लेती है किकिस शब्द की ओर संकेत हुआ था. हालांकि वो शब्द भी कोई गाली नहीं ही होता है.(ज़्यादा जिज्ञासा हो तो आशीष का लिखा ये पढ़ो. समझ जाओगे.) हंस लेता है. हर हंसनेवाला उस वक़्त खुद को ऑक्सफ़ोर्ड का स्कॉलर समझ रहा होता है क्यूंकि उसने जोक समझलिया था. और ठीक इसी समय सभी 'अच्छी कॉमेडी फ़िल्में' एक गोता लगा लेती हैं. माथापीट लेती हैं. कुल मिलाके इस वक़्त सब कुछ कपिल शर्मा की ही राह पर चल पड़ा है. फ़िल्ममें कॉमेडी लाने के लिए एक गूंगे और एक ऐसे कैरेक्टर की मदद ली है जो ठीक से बोलनहीं सकता. वो 'स' को 'फ़' बोलता है. उसकी जीभ बोलते वक़्त कुछ ज़्यादा ही आगे आ जातीहै. एक है जो अंग्रेजी का शब्द बोलने के बाद उसकी स्पेलिंग बोलता है और ग़लतस्पेलिंग बोलता है. Ghost को GST स्पेल करता है. ये फिर भी एक बेहतर और मुद्दे वालाजोक था. हंसी असल में आती है तो जॉनी लीवर के लिए. उनके 1-2 ऐसे हिस्से हैं जहां वोपुराना स्टैंड-अप आर्टिस्ट नज़र आता है जो याद दिलाता है कि जॉनी लीवर असल में चीजक्या है. रोहित शेट्टी चाहें तो पुण्य कमा सकते हैं. गोलमाल न बनाकर और उसकी जगहफ़िल्म बनाने में आये खर्चे को दान देकर. मेंटल टॉर्चर से तो जनता बचेगी ही साथ हीकई लोगों का भला भी होगा. फ़िल्म शुरू होते ही गाना शुरू होता है. उस गाने में जितनाखर्चा आया होअग उतने में दो मंगलयान तैयार हो जाते. या विजय माल्या का आधा कर्ज माफ़हो जाता. मेरा तो कहना ये है कि नगर पालिका को बुलाओ. गोलमाल अगेन सुरक्षित करवाओ.देश बाद में सुरक्षित होगा.वीडियो रिव्यू यहां देखिये:-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ें:सिद्धू ने डीवीडी के चक्कर में सीनियर क्रिकेटर को जड़ा थप्पड़किरन बेदी ने पीएम मोदी की मां का फ़ेक वीडियो ट्वीट कियासहवाग ने लिखकर लिया था गांगुली से कि टीम से ड्रॉप नहीं करोगे