1 जनवरी 1950 को इंदौर में पैदा हुए राहतउल्ला कुरैशी को दुनिया डॉ राहत इंदौरी केनाम से जानती है. शायर राहत इंदौरी जिसने सियासत और मोहब्बत दोनों पर बराबर हक औररवानगी के साथ शेर कहे. राहत मुशायरों में एक खास अंदाज़ में ग़म-ए-जाना (प्रेमिकाके लिए) के शेर कहने के जाने जाते हैं. मगर उनका उर्दू में किया गया रिसर्च वर्कउर्दू साहित्य की धरोहर है. इसके अलावा राहत इंदौरी ने 'तुमसा कोई प्यारा कोई मासूमनहीं है', 'दिल को हज़ार बार रोका', 'चोरी-चोरी जब नज़रे मिलीं' जैसे कई हिट गानेलिखे हैं. इश्क को एक अलग अंदाज़ में बयां करने वाले राहत इंदौरी के सियासी शेर भीखूब होते हैं. उनका एक शेर तो न जाने कितनी बार दोहराया जा चुका है. "सभी का ख़ून हैशामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है" पेश हैं वो 'रोज़ातो नहीं रखता मगर अफ्तारी समझता है', जैसे शेर कहने वाले राहत के कुछ अशआर...------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी दी लल्लनटॉप के लिए अनिमेष ने लिखी थी.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: वो शायर, जो नेहरू को धोखा देकर पाकिस्तान चला गया उसने ग़ज़ल लिखी तोग़ालिब को, नज़्म लिखी तो फैज़ को और दोहा लिखा तो कबीर को भुलवा दिया ‘मैं तो हर मोड़पर तुझको दूंगा सदा’ कहने वाला गीतकार चला गयावो ‘औरंगज़ेब’ जिसे सब पसंद करते हैंवीडियो: इरशाद कामिल ने सुनाई 'तुम तक' की कहानी