डिफेंस सेक्टर के वो घोटाले, जिसमें नेहरू से लेकर अटल तक का आया नाम..
अगस्टा-वेस्टलैंड के अलावा और भी घोटाले हुए हैं इंडिया में. जानिए ऐसे ही घोटालों के बारे में:
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मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने बिल्डिंग का इतना घटिया पाया है कि उसे गिराने के कहा गया है.
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डिफेंस सेक्टर करप्ट पॉलिटिशियंस के लिए मुनाफे का सौदा माना जाता है. रक्षा सौदे एक दो रुपये के तो होते नहीं हैं. पइसा चाप के लगता है. करोड़ों , अरबों में. अब इस सौदेबाजी के दौरान कुछ लोगों का ईमान भी डोल जाता है. तब जन्म होता है घोटाले का. अइसा ही एक घोटाला आजकल खबरों में बना हुआ है. अगस्टावेस्टलैंड घोटाला. डिफेंस सेक्टर में इससे पहले भी कई घोटाले हुए हैं. जिनमें से कई घोटालों के केस को आधी-अधूरी जांच के बाद बंद किया जा चुका है. आज लल्लन आपको बता रहा है डिफेंस सेक्टर से जुड़े कुछ ऐसे ही फेमस घोटालों के बारे में:
1. जीप घोटाला, 1948
वीके कृष्ण मेनन
घोटाला कितने का?: 80 लाख रुपये
मामला: नियमों के खिलाफ इंग्लैंड की एक कंपनी के साथ 200 जीपों की डिलीवरी के लिए सौदा किया गया था. पर 155 की ही डिलीवरी हुई. लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री नेहरू ने 155 जीपें लेने पर डील कर ली. आरोप लगा कि इस सौदे के पीछे जरूर कुछ लफड़ा हुआ है.
क्या हुआ: अनंतशयनम कमेटी की सिफरिशों के खिलाफ 1955 में सरकार ने केस बंद कर दिया. वी के कृष्ण मेनन, जो सौदे के वक्त इंग्लैंड में भारत के हाई कमिश्नर थे, उनका नाम सामने आया. मेनन बाद में रक्षा मंत्री भी बने.
2. एचडीडब्लू पनडुब्बी घोटाला, 1981
घोटाला कितने का?: 32.55 करोड़ रुपये
मामला: 4 एचडीडब्लू पनडुब्बी मंगाई जानी थीं. पूरी डील 350 करोड़ रुपये की थी. जर्मन पनडुब्बी निर्माताओं ने दलालों पर 7 फीसदी घूस मांगने का आरोप लगाया. रिश्वत लेने के आरोप में 1990 में सीबीआई ने 6 लोगों के खिलाफ केस दायर किया.
क्या हुआ: एडमिरल एस. एम. नंदा का नाम सामने आया. सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों के अभाव के चलते 2005 में केस बंद कर दिया. सभी आरोपी बरी हो गए.
3. बोफोर्स घोटाला, 1987
अतावियो क्वात्रोची
घोटाला कितने का?: 64 करोड़ रुपये
मामला: स्वीडिश हथियार कंपनी थी, एबी बोफोर्स. तोपें भी बनाती थी. इंडिया ने इस कंपनी से तोप खरीदने का फैसला किया. होवित्जर तोपों का ऑर्डर पाने के लिए करीब 64 करोड़ रुपये की घूस देने की बात कही. प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी इसमें आरोपी थे. अतावियो क्वात्रोची इस घोटाले का सबसे चर्चित नाम रहा.
क्या हुआ: इस घोटाले की सबसे मजेदार बात ये रही कि 64 करोड़ के घोटाले की जांच के लिए सरकारों ने 200 करोड़ रुपये खर्च कर दिए. 2011 में कोर्ट ने सीबीआई को क्वात्रोची के खिलाफ केस वापस लेने की इजाजत दे दी.
4. चेक 9 एम एम पिस्टल घोटाला, 1988
अरुण नेहरू
घोटाला कितने का?: 25 लाख रुपये
मामला: इस घोटाले में खराब पिस्टल्स मंगा ली गईं थीं. तत्कालीन गृह राज्य मंत्री (आंतरिक सुरक्षा), अरुण नेहरू और बहुत से ऑफिसर्स को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टेंडर की घोषणा न करने का आरोपी माना गया. आरोप ये भी लगा कि ठीक से पहले जांच नहीं कराई गई. डील से जुड़े लोगों ने अपने पदों का दुरुपयोग किया.
क्या हुआ: अरुण नेहरू 2013 में मर गए. केस अब भी लटका हुआ है.
5. कारगिल ताबूत घोटाला, 1999
जॉर्ज फर्नांडिज़
घोटाला कितने का?: 24 हजार करोड़ रुपये
मामला: करगिल युद्ध के वक्त सरकार ने 2,500 डॉलर लगाकर 500 ताबूत खरीदे थे. हर ताबूत पर 13 गुणा ज्यादा पैसे खर्च किए गए थे. उस वक्त प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी, रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिज़ और 3 बड़े आर्मी अफसर पर घोटाले का आरोप लगा.
क्या हुआ: अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने वाजपेयी और फर्नांडिज़ को बरी कर दिया. दिसम्बर 2015 में सबूत न होने पर केस ख़ारिज कर दिया गया.
6. बराक मिसाइल घोटाला, 1999
बंगारु लक्ष्मण
क्या हुआ: सात साल जांच के बाद सबूत न होने पर केस बंद किया. सीबीआई का कहना था कि आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला.
1. जीप घोटाला, 1948
वीके कृष्ण मेननघोटाला कितने का?: 80 लाख रुपये
मामला: नियमों के खिलाफ इंग्लैंड की एक कंपनी के साथ 200 जीपों की डिलीवरी के लिए सौदा किया गया था. पर 155 की ही डिलीवरी हुई. लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री नेहरू ने 155 जीपें लेने पर डील कर ली. आरोप लगा कि इस सौदे के पीछे जरूर कुछ लफड़ा हुआ है.
क्या हुआ: अनंतशयनम कमेटी की सिफरिशों के खिलाफ 1955 में सरकार ने केस बंद कर दिया. वी के कृष्ण मेनन, जो सौदे के वक्त इंग्लैंड में भारत के हाई कमिश्नर थे, उनका नाम सामने आया. मेनन बाद में रक्षा मंत्री भी बने.
2. एचडीडब्लू पनडुब्बी घोटाला, 1981

घोटाला कितने का?: 32.55 करोड़ रुपये
मामला: 4 एचडीडब्लू पनडुब्बी मंगाई जानी थीं. पूरी डील 350 करोड़ रुपये की थी. जर्मन पनडुब्बी निर्माताओं ने दलालों पर 7 फीसदी घूस मांगने का आरोप लगाया. रिश्वत लेने के आरोप में 1990 में सीबीआई ने 6 लोगों के खिलाफ केस दायर किया.
क्या हुआ: एडमिरल एस. एम. नंदा का नाम सामने आया. सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों के अभाव के चलते 2005 में केस बंद कर दिया. सभी आरोपी बरी हो गए.
3. बोफोर्स घोटाला, 1987
अतावियो क्वात्रोचीघोटाला कितने का?: 64 करोड़ रुपये
मामला: स्वीडिश हथियार कंपनी थी, एबी बोफोर्स. तोपें भी बनाती थी. इंडिया ने इस कंपनी से तोप खरीदने का फैसला किया. होवित्जर तोपों का ऑर्डर पाने के लिए करीब 64 करोड़ रुपये की घूस देने की बात कही. प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी इसमें आरोपी थे. अतावियो क्वात्रोची इस घोटाले का सबसे चर्चित नाम रहा.
क्या हुआ: इस घोटाले की सबसे मजेदार बात ये रही कि 64 करोड़ के घोटाले की जांच के लिए सरकारों ने 200 करोड़ रुपये खर्च कर दिए. 2011 में कोर्ट ने सीबीआई को क्वात्रोची के खिलाफ केस वापस लेने की इजाजत दे दी.
4. चेक 9 एम एम पिस्टल घोटाला, 1988
अरुण नेहरूघोटाला कितने का?: 25 लाख रुपये
मामला: इस घोटाले में खराब पिस्टल्स मंगा ली गईं थीं. तत्कालीन गृह राज्य मंत्री (आंतरिक सुरक्षा), अरुण नेहरू और बहुत से ऑफिसर्स को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टेंडर की घोषणा न करने का आरोपी माना गया. आरोप ये भी लगा कि ठीक से पहले जांच नहीं कराई गई. डील से जुड़े लोगों ने अपने पदों का दुरुपयोग किया.
क्या हुआ: अरुण नेहरू 2013 में मर गए. केस अब भी लटका हुआ है.
5. कारगिल ताबूत घोटाला, 1999
जॉर्ज फर्नांडिज़घोटाला कितने का?: 24 हजार करोड़ रुपये
मामला: करगिल युद्ध के वक्त सरकार ने 2,500 डॉलर लगाकर 500 ताबूत खरीदे थे. हर ताबूत पर 13 गुणा ज्यादा पैसे खर्च किए गए थे. उस वक्त प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी, रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिज़ और 3 बड़े आर्मी अफसर पर घोटाले का आरोप लगा.
क्या हुआ: अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने वाजपेयी और फर्नांडिज़ को बरी कर दिया. दिसम्बर 2015 में सबूत न होने पर केस ख़ारिज कर दिया गया.
6. बराक मिसाइल घोटाला, 1999
बंगारु लक्ष्मणघोटाला कितने का?: 1,150 करोड़ रुपये
मामला: तहलका ने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए खुलासा किया कि बराक मिसाइल खरीदने में घोटाला हुआ. आरोप लगा कि नेताओं ने डील फिक्स करने के लिए पैसे खाए. 2007 में केस फाइल किया गया. जॉर्ज फर्नांडिज़, बंगारू लक्ष्मण और जाया जेटली जैसे बड़े-बड़े नेता फंसे.क्या हुआ: सात साल जांच के बाद सबूत न होने पर केस बंद किया. सीबीआई का कहना था कि आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला.

