दिवाली वीकएंड है. फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए सबसे किफ़ायती हफ़्ता माना जाता है ये वीक.बरसों से बड़े-बड़े स्टार्स की फिल्में रिलीज़ होती आई हैं दिवाली वीकएंड पर. इसवीकएंड भी ओटीटी से लेकर थिएटर तक कई बड़ी फ़िल्में आई हैं. इन कई में से एक हॉलीवुडफ़िल्म 'इटर्नल्स' हम आपके लिए देख कर आए हैं. कैसी है फ़िल्म देखने के बाद हमारीइंटर्नल फीलिंग यही बताएंगे आज के रिव्यू में. # कहानी बहुत टिपिकल कहानी है ध्यानसे सुनना. मार्वल की दुनिया के एलियन गॉड हैं सिलेस्टिअल्स. ये अपनी जादुई शक्तियोंसे दस सुपरहीरोज़ को बनाते हैं. ताकि ये हीरोज़ धरती की रक्षा दुष्ट डेवीएंट्स से करसकें. 'इटर्नल्स' 7000 सालों से धरती पर बाकी दुनिया से छिपकर इंसानों के रूप मेंरह रहे हैं. चुपचाप बिना किसी को भनक लगे मानव प्रजाति की मदद करते आ रहे हैं.गुप्ता पीरियड से लेकर हिरोशिमा कांड तक आम मानव की आम रूप में हेल्प करते आए हैं.फ़िल्म शुरू होती है 'अवेंजर्स एंडगेम' के बाद की टाइमलाइन से. आयरनमैन, कैप्टनअमेरिका अब नहीं हैं. ऐसे में धरती को दुष्ट डेवीएंट्स से बचाने के लिए 'इटर्नल्स'फिर इक्कठा होते हैं. क्या इटर्नल्स दुनिया को बचाने में कामयाब होते हैंया डेवीएंट्स के आगे इनकी शक्तियां कम पड़ जाती हैं, ये आपको मालूम पड़ेगा फिल्मदेखने के बाद. #एक्टर्स कौन-कौन हैं ? मार्वल ने 'इटर्नल्स' की कास्टिंग फिल्म कोनज़र में रखकर कम और ग्लोबल मार्केट को नज़र में रखकर ज्यादा की है. इसलिए हर मूल केएक्टर को टीम का हिस्सा बना लिया है. जैसे फ़िल्म में आंखों से कॉस्मिक ऊर्जानिकालने वाले इकारिस का रोल किया है GOT वाले रॉब स्टार्क रिचर्ड मैडेन ने. अगलीहैं सरसी, दुश्मनों से लड़ने के साथ-साथ इनकी और इकारिस की लव स्टोरी भी फिल्म मेंचलती रहती है. इस चक्कर में फ़िल्म थोड़ी भटक भी जाती है. सरसी का रोल किया हैजेम्मा चैन ने. जेम्मा इससे पहले 'कैप्टन मार्वल' में भी नज़र आ चुकी हैं मिनर्वा केरोल में. अगले हैं किंगो. हाथों से कॉस्मिक एनर्जी निकालते हैं. आम लाइफ़ में किंगोबॉलीवुड एक्टर बन गए हैं. इस रोल को निभाया है कुमैल नानजियानी ने. कुमैल का कामअच्छा है लेकिन उन्होंने एज़ अ बॉलीवुड एक्टर, जो इंडियन एक्सेंट पकड़ने की कोशिश कीहै वो बहुत ही लेम लगती है. नेक्स्ट हैं स्पिरिट. ये दिखने में तो छोटी बच्ची लगतीहै लेकिन असल में सबसे उम्रदराज है. इस किरदार को निभाया है लिया ने.लिया सिर्फ 14 साल की हैं.कहना पड़ेगा लिया का काम फ़िल्म में सबसे उम्दा है. और हां लिया सिर्फ 14 साल की हैं.अगली हैं मक्कारी. इनकी सुपर पावर है रफ़्तार. मक्कारी को कान से सुनाई नहीं पड़ता हैलेकिन रफ़्तार में बिजली से भी तेज़ है. ये भूमिका निभाई है लॉरेन रिडलॉफ ने. लॉरेनने किरदार के लिए मेहनत की है, ये उनकी परफॉरमेंस में दिखता है. एक धावक की जिसहिसाब से मसल्स होनी चाहिए, लॉरेन ने वैसी मसल्स बना रखी हैं. अब बात सबसे ताकतवरइटर्नल गिल्गामेश की. इस रोल को किया है डॉन ली ने. अपने जॉन स्नो यानी किटहैरिंगटन ने म्यूजियम में काम करने वाले डेन व्हिटमैन का रोल किया है. इटर्नल्सलीडर अजक के रोल में हैं सलमा हायेक. सलमा का अभिनय बहुत कमाल रहा. एंड लास्ट बटनॉट द लीस्ट इंडियन एक्टर हरीश पटेल फ़िल्म में किंगो के मैनेजर करुण के रोल मेंहैं. हरीश के सीन कम ही हैं लेकिन जितने भी सीन में वो आए, खूब हंसाया. वी होप इसफ़िल्म के बाद उनके करियर को अच्छा बूस्ट मिलेगा. # जिसकी फिल्म उसी को साजे'इटर्नल्स' के साथ वही हुआ, जो आज से दस साल पहले 'रा वन'के साथ हुआ था. वही, जोकिसी चाइनीज़ से डोसा बनवाने और मद्रासी से नूडल बनवाने पर होगा. वही, जो कॉमन मैनद्वारा पॉलिटिक्स बदलने की कोशिश में होता है. रायता फ़ैल गया. मार्वल वालो, आपकोक्या लगा 'अवेंजर्स' की तरह एक और टीम खड़ी कर दोगे! जनता खुश होगी! शाबाशी देगी!इतने सारे सुपर हीरोज़ के बारे में समझने में ही 50% ब्रेन उलझ गया. किस की क्यापावर है, क्या पंगा है, बहुत देर में समझ आया. फ़िल्म में आगे कभी कैरेक्टर्स कीह्यूमन साइड को दिखाया जाता, फिर कट टू एक्शन होने लगता. ये पावर ऑन एंड ऑफ फ़िल्मको लगातार बोरिंग बनाते रहे. और हां एज़ अ इंडियन, अमेरिकन फ़िल्म मेकर्स को एक बातकहना बहुत ज़रूरी है. कि भाईसाब इंडिया में आपको सिर्फ़ गरीबी और स्लम ही नज़र आते हैंऔर इंडियन फ़िल्मों में सिर्फ़ रंग बिरंगे कपड़े और टिपिकल भरतनाट्यम डांस नज़र आता हैक्या! फ़िल्म में कुमैल इंडियन एक्टर बने हैं. और उन्हें इतना टिपिकल इंडियन एक्टरबनाया गया है कि पूछो नहीं. जैसे अपने यहां सेवंटीज़ में होते थे उनसे भी चिरांद.हॉलीवुड वालो हमारी नई फ़िल्में देख लो यार और ये स्टीरियोटाइपिंग बंद कर दो एकदम.खैर यहां फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और विज़ुयल इफेक्ट्स की तारीफ़ बनती है. पूरी फिल्मके दौरान काफी मनमोहक सीन्स आते हैं. फिल्म का एक यही पहलू है, जो दिल खुश करता है.इंडियन एक्टर्स सिर्फ़ रंग-बिरंगे कपड़े पहन नाचते नहीं हैं विलायती बाबू.# डायरेक्शन और राइटिंग में दम लगा? 'इटर्नल्स' को लिखा है मैथ्यू और रायन फिप्रोने. सैडली राइटिंग के मामले में 'इटर्नल्स' दूर-दूर तक 'अवेंजर' के बराबर नहीं आपाती. फिल्म का ह्यूमर बहुत ही बचकाना और पुरानी डिज्नी फिल्मों जैसा है. एक तोइतने सारे करैक्टर एक साथ फिल्म में आ जाते हैं, ऊपर से ऑडियंस से उनका सीन्स केद्वारा परिचय करवाने के बजाय ज्यादातर किरदारों का तो यूं ही बोलकर इंट्रो कर दियाजाता है.'एटर्नल्स' को डायरेक्ट किया है ऑस्कर विनिंग डायरेक्टर क्लोई झाओ ने. इस सालदुनिया भर के सारे प्रतिष्ठित अवार्ड समारोह में क्लोई झाओ की फ़िल्म 'नोमैडलैंड' नेऔर क्लोई ने अपने बेहतरीन निर्देशन के लिए ढेरों इनाम जीते हैं. झाओ ने पहली बारसुपरहीरो फ़िल्म डायरेक्ट की है. और बस यहीं सबसे बड़ी गड़बड़ हो गई है. संवेदनशीलफिल्में बनाने के लिए विख्यात क्लोई ने मार्वल फ़िल्मों की रीत को बरकरार रखने कीकोशिश करते हुए अपना एलिमेंट डाला लेकिन फ़ॉर्मूला बुरी तरह फेल हो गया. कोशिश एकदमविफ़ल गई है. फिल्म देख ऐसा लगा, मानो किसी साइकल राइडर को स्पोर्ट्स बाइक का हैंडलपकड़ा दिया हो. फिल्म में ऐसा लगता है, जैसे पंद्रह-बीस कहानियां एक साथ चल रही हैं.बॉटमलाइन, इस फिल्म के डूबने की मुख्य वजह ढीला डायरेक्शन है. डायरेक्शन के मामलेमें क्लोई ने मार्वल फैन्स को बहुत निराश किया है.एंजेलिना जोली.# देख ली जाए ? हमारी जनरेशन मार्वल फ़िल्मों पर बड़ी हुई है. 'आयरनमैन' से लेकर'एंडगेम' के बीच जितनी भी मार्वल फ़िल्में आईं, किसी में कम तो किसी में ज़्यादालेकिन मज़ा सब में आया. लेकिन 'इटर्नल' पहली मार्वल फ़िल्म है, जिसमें मज़ा तो दूर कीबात उल्टा दिवाली का मज़ा भी खराब हो गया. इससे ज़्यादा मज़ा तो रात की जली मोमबत्तीका बचा हुआ मोम जमा करने में आ जाता. ख़ैर हम मजबूर हैं लेकिन आप नहीं. बाकी निराशना हों, चाहे तो कोई पुलिस वालों की पिच्चर देख लो. क्या समझे?