'धुरंधर' के नेटफ्लिक्स पर आते ही फैन्स आदित्य धर को खरी-खोटी क्यों सुनाने लगे?
दर्शक कह रहे हैं कि अगर ओटीटी वाले भी ऐसा करेंगे तो पैसा खर्च कर के फिल्म देखने का क्या फायदा हुआ.

Dhurandhar की ओटीटी रिलीज़ को लेकर फैन्स काफ़ी एक्साइटेड थे. 29-30 जनवरी की बीच रात फिल्म ठीक 12 बजे नेटफ्लिक्स पर आ भी गई. मगर उसे देखने के बाद लोग Aditya Dhar और ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म से नाराज़ हो गए हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि फिल्म को डिजिटल रिलीज़ के दौरान ट्रिम कर दिया गया है. साथ ही इसके कई डायलॉग्स अब तक सेंसर्ड हैं. जनता ने Kabir Singh और Animal का हवाला देकर नेटफ्लिक्स को ट्रोल करना शुरू कर दिया.
सबसे पहले दी लल्लनटॉप ने ही ये खबर छापी थी कि 'धुरंधर' ओटीटी पर अपने थिएट्रिकल वर्जन से छोटी रहने वाली है. सिनेमाघरों में फिल्म का ओरिजिनल रनटाइम 3 घंटे 34 मिनट 01 सेकेंड का था. मगर नेटफ्लिक्स पर ये केवल 3 घंटे 25 मिनट लंबी नज़र आ रही है. यानी इससे एक-दो नहीं, सीधे 9 मिनट कम कर दिए गए हैं.

बता दें कि 3 घंटे 34 मिनट वाला वर्जन भी केवल उन्हीं लोगों ने देखा है, जिन्होंने 31 दिसंबर तक सिनेमाघरों में ये फिल्म देख ली थी. इसके बाद बलोच समाज की आपत्ति पर मेकर्स को फिल्म में कुछ अन्य बदलाव करने पड़ गए थे. फिल्म में जो गालियां पहले से म्यूट थीं, उनके अलावा बलोच संबंधी दो शब्दों और एक डायलॉग को भी म्यूट कर दिया गया था. इससे फिल्म का नया रनटाइम 208.56 मिनट यानी 3 घंटे 28 मिनट 56 सेकेंड का रह गया. इसी छंटे हुए वर्जन को 01 जनवरी से सिनेमाघरों में चलाया जा रहा था. मगर ओटीटी पर फिल्म इससे भी छोटी है.

नेटफ्लिक्स पर ‘धुरंधर’ के कई छोटे-छोटे हिस्से कटे हुए हैं. यदि आपने पहले इस फिल्म को देखा है तो आप उसे नोटिस कर लेंगे. इसके अलावा दर्शक कई अन्य बातों को लेकर भी नाराज़ हो गए हैं. पहला तो ये कि ओटीटी पर फिल्म के कई डायलॉग्स और गालियां म्यूट करवा दी गई हैं. सिनेमाघरों में जब ऐसा हुआ था, उस वक्त लोगों ने ज्यादा शिकायतें नहीं की थीं. मगर उन्हें उम्मीद थी कि कम-से-कम नेटफ्लिक्स पर वो फ़िल्म का पूरा वर्जन देख पाएंगे. मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. उल्टा कुछ और डायलॉग्स म्यूट कर दिए गए. उदाहरण के तौर पर संजय दत्त के बलोच वाले डायलॉग को देख सकते हैं. ओरिजिनल फिल्म में संजय एक सीन में कहते हैं,
"पुलिस के दिनों में मेरा एक बलोच पार्टनर था. हमेशा बोलता हूं बड़े साहब को कि मगरमच्छ पर भरोसा कर सकते हैं मगर बलोच पर नहीं."
इस डायलॉग से बलोच शब्द को हटाकर उसे म्यूट ही कर दिया गया.
कहने की ज़रूरत नहीं कि इससे फिल्म का फ़्लो काफ़ी अटपटा नज़र आने लगा है. लोग सबसे ज्यादा इस बात पर नाराज़गी जता रहे हैं कि मेकर्स ने गालियों को अनम्यूट क्यों नहीं किया है. वो भी तब, जब ये एक एडल्ट रेटिड मूवी है और ओटीटी पर आई है. जनता तर्क दे रही है कि ओटीटी पर 'कबीर सिंह' और 'एनिमल' जैसी फिल्में बगैर कट के रिलीज़ हो जाती हैं. मगर 'धुरंधर' के साथ पक्षपात किया जा रहा है.
नेटफ्लिक्स पर फिल्म का कलर भी फ़ीका नज़र आ रहा है. सिनेमाघर में इस मूवी को देखते हुए आप रंगों का निखार आसानी से देख सकते थे. रंग वैसे भी इस फिल्म में काफ़ी अहम किरदार निभाते हैं. मगर नेटफ्लिक्स पर उनकी क्वालिटी थोड़ी खराब नज़र आती है. हालांकि ये फ़र्क इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने नेटफ्लिक्स का कौनसा सब्सक्रिप्शन लिया है. 4k वर्जन वाले सब्सक्रिप्शन में फिल्म के कलर बेहतर नज़र आते हैं. मगर HD में एक बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी.
लोगों ने नेटफ्लिक्स पर रात 12 बजे से ही ‘धुरंधर’ को देखना शुरू कर दिया था. मगर अब वो इसकी शिकायत कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा,
“नेटफ्लिक्स पर धुरंधर को इतना ज़्यादा सेंसर क्यों किया गया है? इस फिल्म को A सर्टिफिकेट मिला है. फिर भी इसके स्ट्रीमिंग वर्ज़न में कई डायलॉग म्यूट कर दिए गए हैं. गाली-गलौज समेत कुछ जगहों पर तो ज़रूरी डायलॉग भी काट दिए गए हैं. इतना ही नहीं, थिएटर वर्ज़न की तुलना में करीब 10 मिनट के सीन हटा दिए गए हैं. आख़िर आप किसे खुश करने की कोशिश कर रहे हैं नेटफ्लिक्स इंडिया? हम ये फिल्म दूरदर्शन पर मुफ़्त में नहीं देख रहे हैं.धुरंधर को बिना किसी सेंसर के दोबारा रिलीज़ करो और जल्दी करो."

दूसरे ने लिखा,
“नेटफ्लिक्स पर धुरंधर म्यूट किए गए डायलॉग्स और सेंसर की गई गालियों के साथ स्ट्रीम हो रही है. अगर ओटीटी प्लेटफॉर्म ही अनकट वर्ज़न नहीं दिखा रहे, तो फिर कौन दिखाएगा? अनरेटिड वर्ज़न का दावा बेकार है. दर्शकों को तो बिना सेंसर वाला वर्ज़न ही चाहिए था.”

तीसरे ने फिल्म के यूट्यूब और नेटफ्लिक्स ‘धुरंधर’ का फ़र्क दिखाते हुए कहा,
“ये कैसी कलर ग्रेडिंग है नेटफ्लिक्स इंडिया? फिल्म में कोई कॉनट्रास्ट ही नहीं है. यूट्यूब वीडियो में बेहतर साउंड और वीडियो क्वालिटी है. इसे चेक करिए और सुलझाइए.”

फिल्म में गालियों को क्यों म्यूट रखा गया है, इसका खास तुक समझ नहीं आ रहा है. कहने को तो ये कहा जा सकता है कि मेकर्स फिल्म को फैमिली ऑडियंस तक पहुंचाना चाह रहे हैं. संभव है कि वो इस प्रयास में हों कि लोग इस मूवी को घर-परिवार के साथ देखें. इसलिए उन्होंने गालियों को म्यूट ही रखा है. मगर ये केवल हमारा अनुमान है. इस पर ठोस रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता. दूसरी तरफ़ फिल्म की लेंथ घटने के पीछे भी एक लॉजिक हो सकता है.
इसमें दो राय नहीं कि फिल्म के कुछ सीन्स छांटे गए हैं. इसके अलावा नेटफ्लिक्स पर मूवी थोड़ी फास्ट भी नज़र आती है. दरअसल, फिल्ममेकर्स अपनी मूवीज़ को 24 फ्रेम्स प्रति सेकेंड पर शूट करते हैं. ये फिल्मों का स्टैंडर्ड फ्रेम रेट होता है. इसमें प्रति सेकेंड 24 तस्वीरें नज़र आती हैं. 'धुरंधर' सिनेमाघरों में इसी फ्रेम रेट के साथ आई थी. मगर नेटफ्लिक्स पर ये हल्की तेज़ है. संभावना है कि नेटफ्लिक्स पर ये मूवी 25fps के साथ रिलीज़ हुई हो. ये प्लेटफॉर्म अक्सर अपनी यूरोपियन फिल्मों को इस फ्रेम रेट पर रिलीज़ करता है. हालांकि 'धुरंधर' के केस में ऐसा हुआ है या नहीं, ये केवल आदित्य धर ही बता सकते हैं.
वीडियो: 'धुरंधर 2' के टीजर को मिली हरी झंडी, 'बोर्डर 2' के साथ सिनेमाघरों में होगा रिलीज

.webp?width=60)

