दीपिका ने बताया कि रणवीर सिंह ने उन्हें डिप्रेशन से निकलने में कैसे मदद की?
दीपिका पादुकोण ने बताया कि रणवीर सिंह ने एक बार भी ऐसा नहीं कहा कि, 'ठीक है, इसे भूल जाओ', या 'चलो ड्राइव पर चलते हैं'.

Koffee With Karan के आठवें सीजन का पहला एपिसोड आ गया है. इसमें दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह एक साथ नजर आए. उन्होंने अपने करियर से लेकर निजी जीवन तक पर कई सारी बातें की. इन्हीं में से एक टॉपिक था, दीपिका का डिप्रेशन. वो इससे पहले भी कई बार इस पर बात कर चुकी हैं. यहां भी बात की और बताया कि रणवीर ने इससे बाहर निकलने में कैसे उनका साथ दिया.
रणवीर ने बताया सबसे पहले उन्हें दीपिका के डिप्रेशन का कैसे पता चला? इसके लिए उन्होंने एक घटना का जिक्र किया. उन्होंने बताया:
जब ये पहली बार 2014 में हुआ, मैं शूट कर रहा था. दीपिका ने फोन किया और कहा 'मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया था और मैं गिर गई हूं. क्या तुम घर आ सकते हो?' मैंने कॉल काटा और अपनी बाइक से सीधे दीपिका के घर पहुंचा. जब मैंने उसे देखा, तो कुछ ठीक नहीं था. वो सामने है, आपकी ओर देख रही है, लेकिन वो कहीं और है.
रणवीर ने आगे बात करते हुए बताया कि जब एक दिन दोनों साथ ब्रेकफास्ट कर रहे थे और दीपिका रोए जा रही थी. रणवीर उस समय असहाय महसूस कर रहे थे. उन्होंने बताया:
एक दिन नाश्ते के समय वो मेरे पास बैठी थी और रो रही थी. उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे. मैं उठकर उसके पास गया और पूछा, 'क्या हुआ बेबी? मैं क्या कर सकता हूं तुम्हारे लिए?' मुझे वो क्षण याद है क्योंकि उस समय मैंने असहाय महसूस किया.
इस घटना के बाद रणवीर ने दीपिका की पेरेंट्स और बहन को फोन किया. अपने इस फेज पर रणवीर की तारीफ़ करते हुए दीपिका के बताया:
उस समय उसने मुझे खुलकर बोलने के लिए एक सुरक्षित जगह दी. उसने एक बार भी ऐसा नहीं कहा कि, 'ठीक है, इसे भूल जाओ', या 'चलो ड्राइव पर चलते हैं' या ऐसा कुछ और भी नहीं कहा. उस समय, वो इसे (डिप्रेशन) ज्यादा नहीं समझता था, आज वो बहुत बेहतर ढंग से समझता है. लेकिन वो मेरे साथ था. उस समय रणवीर धैर्यवान बना रहा. इसने मुझे रणवीर को एक व्यक्ति के तौर पर समझने में बहुत मदद की.
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