कोरोना वायरसः चीन में फैल रही नई बीमारी, जिसका इलाज ढूंढ़ने में पांच देश जुटे हैं
हफ्तेभर में 200 से ज्यादा केस सामने आए है, अब तक चार की मौत.
Advertisement

कोरोना वायरस के मरीजों को अस्पताल लाने वाला स्टाफ, इलाज करने वाले डॉक्टर इस खास किस्म का सूट पहन रहे हैं, ताकि इंफेक्शन ना हो। (फोटो- WHO ट्विटर अकाउंट)
Quick AI Highlights
Click here to view more
खबर चीन से है. हेल्थ सेक्टर से जुड़ी है, इसलिए जरूरी भी है. वहां पूरे देश में खतरनाक वायरस फैल रहा है. नाम है- कोरोना वायरस. डॉक्टरी भाषा में नाम- मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस. इस महीने की शुरुआत में चीन में कोरोना वायरस का पहला केस मिला था. कायदे से तो चीन के हेल्थ सेक्टर को तभी चेत जाना चाहिए था, लेकिन केस को हल्के में लिया गया. नतीजा- इंफेक्शन.
कोरोना इंफेक्शन से फैलने वाला वायरस है. बीते एक हफ्ते में चीन में इसके 200 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं. चार की मौत हुई है, बाकियों के इलाज चल रहे हैं. एक भी ऐसा केस सामने नहीं आया है, जिसमें कोरोना का सफल इलाज कर लिया गया हो. वुहान और शंघाई के बाद चीन की राजधानी बीजिंग और इसके आस-पास के शहरों में भी कोरोना के केस मिलने शुरू हो गए हैं.
कोरोना वायरस क्या है
कोरोना एक ‘सिंगल वायरस’ नहीं, बल्कि ‘फैमिली ऑफ वायरस’ है. कोरोना फैमिली में कुल सात वायरस हैं. कोरोना इंफेक्शन हुआ, तो सबसे पहले तो यही पता लगाना पड़ता है कि सात में से कौन से वायरस का इंफेक्शन है. कोरोना वायरस यूं तो जानवरों में पाया जाता है, लेकिन दिक्कत ये है कि कोरोना ‘जूनोटिक’ किस्म का वायरस है. जूनोटिक मतलब ऐसा वायरस, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है.
आयुष्मान भारत योजना के बावजूद क्यों हेल्थ सेक्टर अगले दशक का सबसे बड़ा चैलेंज है?
कोरोना को इतना खतरनाक क्यों बताया जा रहा है? इसकी दो वजहें हैं. पहली- कोरोना इंफेक्शन के लक्षण, जो किसी सीजनल बुखार जैसे ही होते हैं. इसी वजह से आमतौर पर लोग इसे नजरअंदाज ही कर देते हैं या हल्की-फुल्की दवाइयां लेकर काम चलाते हैं. डॉक्टर भी जल्दी कोरोना इंफेक्शन पकड़ नहीं पाते. जब तक पता चलता है, इंफेक्शन बढ़ चुका होता है. दूसरी वजह- कोरोना का मॉर्टैलिटी रेट यानी इससे होने वाली मौतों की दर. ये 35% से भी ज्यादा है. मतलब कि कोरोना इंफेक्शन के 35% से ज्यादा मामलों में मरीज की मौत हो जाती है. ये हाई मॉर्टैलिटी रेट ही कोरोना को दुनिया का तीसरा सबसे खतरनाक वायरस बनाता है. वैसे मारबर्ग सबसे ज्यादा मॉर्टैलिटी रेट (90%) वाला वायरस है. दूसरे नंबर पर बर्ड फ्लू और इबोला (70%) हैं. इसके बाद है कोरोना. इलाज के क्या इंतज़ाम हैं? इलाज नहीं है. कोरोना का वैक्सीन अभी तक नहीं बना है. काम चल रहा है. अब चीन में जिस तरह से कोरोना फैल रहा है, उससे ये उम्मीद तो की जा सकती है कि वैक्सीन बनाने की कोशिशें भी तेज हो गई होंगी. कोरोना का वैक्सीन तैयार करने के लिए फिलहाल पांच देशों में टेस्ट चल रहे हैं- अमेरिका, चीन, रूस, सऊदी अरब और नीदरलैंड.AFP map of China locating Wuhan and the seafood market identified at the centre of a mysterious pneumonia outbreak that has sickened dozens and killed three pic.twitter.com/n8ZELddkfd
— AFP news agency (@AFP) January 20, 2020
बचने के लिए क्या करें? जैसा कि बताया कि कोरोना इंफेक्शन से फैलने वाली बीमारी है. इसलिए बचाव ही ठीक तरीका है. पहली एहतियात इंटरनेशनल ट्रैवल करने वाले लोगों को बरतनी चाहिए. कोरोना इंफेक्टेड देश में उतरने और वहां से वापस आने से पहले टेस्ट जरूर कराएं. इंफेक्टेड देश और उसके आस-पास के देश खुद भी एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग की व्यवस्था कर रहे हैं. बाकी सावधानियां वही जो किसी भी इंफेक्शन वाली बीमारी के बचने के लिए बरती जाती हैं. जैसे- हाथ मिलाने या संपर्क में आने से बचना, मुंह कवर करके रखना वगैरह-वगैरह. 2003 में भी चीन में वायरस अटैक हुआ था इस बार चीन इसलिए भी ज्यादा खौफ में है, क्योंकि उनकी 2003 की यादें ताजा हो गई हैं. 2003 में भी चीन में वायरस अटैक हुआ था. खास बात- तब भी कोरोना फैमिली के वायरस का ही हमला था. ऊपर हमने बताया था न- कोरोना फैमिली के सात वायरस. 2003 वाला भी इन्हीं सात में से एक था. तब 1500 से ज्यादा लोग इस वायरस के शिकार हुए थे. कोरोना फैमिली के उस वायरस का वैक्सीन तो तब तैयार कर लिया गया था, लेकिन इस बार फैमिली के ही नए वायरस ने हमला कर दिया है.Q: What can I do to protect myself from #coronavirus?
A: https://t.co/PKzKaO2yfK pic.twitter.com/eNhlhR0PEq — World Health Organization (WHO) (@WHO) January 17, 2020
आयुष्मान भारत योजना के बावजूद क्यों हेल्थ सेक्टर अगले दशक का सबसे बड़ा चैलेंज है?

