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कॉमेडियन सुदेश लहरी की कहानी, जिनको पड़े दो थप्पड़ो ने उनकी ज़िंदगी बदल दी

सुदेश स्टेज पर थे. एक शराबी झूमता हुआ आया और उन्हें थप्पड़ जड़ दिया. उस वाकये ने उनकी लाइफ बदल दी.

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4 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 4 अगस्त 2022, 06:37 PM IST)
Sudesh Lahri
सुदेश लहरी कॉमेडी शोज़ और फिल्में करने से पहले ऑर्केस्ट्रा में गाना गाया करते थे.
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सुदेश लहरी. जाने-माने कॉमेडियन. 'कॉमेडी सर्कस', 'कॉमेडी नाइट्स बचाओ', 'द ड्रामा कंपनी' और 'कॉमेडी सर्कस के सुपरस्टार्स' जैसे तमाम शोज़ में दिख चुके हैं. अपनी कॉमिक टाइमिंग से लोगों को हंसाने वाले सुदेश पढ़-लिख नहीं सकते. सुदेश हाल ही में मनीष पॉल के शो पर पहुंचे थे. जहां उन्होंने अपनी जर्नी पर बात की. बताया कि फेमस होने से पहले वो सड़कों पर सब्जियां बेचा करते थे. पंजाब से ताल्लुक रखने वाले सुदेश के परिवार की माली-हालत बिल्कुल खस्ता थी. वो कुल्फियां भी बेचा करते थे. इसके अलावा भी सुदेश ने अपनी ज़िंदगी के कई अनसुने किस्से सुनाए.

सुदेश बताते हैं,

''मैं गरीब परिवार से आता हूं. मुझे पढ़ने का मौका नहीं मिला. बचपन से ही मैंने पैसों के लिए छोटी-छोटी नौकरियां की. फैक्ट्रियों में काम किया, चाय बेची है. मैं दूसरों के लिए चाय बनाता था. मगर मेरे घर पर चाय नहीं बनती थी. तो जब मैं एक साथ 5-6 कप चाय लेकर फैक्ट्रियों में देने जा रहा होता था, तो एक कप चाय पहले खुद पी लेता था. क्योंकि मुझे पता था मुझे तो चाय पीने को मिलेगी नहीं. बाद में उस कप को धोता था और फिर चाय पहुंचाने जाता था. ये हमारी परिस्थिती थी. मैंने मिठाई की दुकान पर काम किया है, जूते की फैक्ट्री में काम किया है. कुल्फी, सब्जियां बेची हैं. और यही सब मेरे लिए एक्टिंग की प्रैक्टिकल वर्कशॉप भी रही है. मैं कभी स्कूल नहीं गया. जिसका मुझे बहुत अफसोस है.''

लोगों से चिल्लर मांग-मांग कर देखी फिल्में

सुदेश को बचपन से ही फिल्में देखने का शौक था. मगर परिवार की परिस्थितियां ऐसी थीं कि फिल्म देखने पर पैसे नहीं उड़ाए जा सकते थे. लेकिन सुदेश ने यहां भी जुगाड़ लगा ही लिया था. वो चिल्लर इकट्ठे करके फिल्में देखा करते थे. 

पंजाबी फिल्म ‘लहरी साब 'में सुदेश लहरी.

सुदेश कहते हैं,

''उस वक्त एक फिल्म आई थी, नाम था 'शंकर शंभू'. एक रुपए दस पैसे की टिकट थी. पैसे होते नहीं थे. तो मैं थिएटर के बाहर खड़े लोगों से कहता था कि यार मेरे पास एक रुपया है, बस 10 पैसे कम पड़ रहे हैं, तो लोग 10 पैसे दे दिया करते थे. ऐसे ही पैसे जुटा-जुटाकर मैंने कई फिल्में देखी हैं. ऐसे ही 'सुहाग', 'धर्मवीर' जैसी फिल्में जुगाड़ से ही देखी हैं.''

'चला मुरारी हीरो बनने' का पड़ा गहरा असर

साल 1977 में एक फिल्म आई थी. नाम था, ‘चला मुरारी हीरो बनने’. इसमें असरानी, बिंदिया गोस्वामी, अशोक कुमार, ऋषि कपूर जैसे दिग्गज कलाकार थे. इस फिल्म का सुदेश की ज़िंदगी पर गहरा असर पड़ा. उस फिल्म को देखकर सुदेश को लगा कि वो भी हीरो बन सकते हैं. उनके अंदर भी एक्टिंग का कीड़ा कुलबुलाने लगा. लेकिन चाहते हुए भी वो मुंबई नहीं जा सके. पैसों के लिए उन्होंने पंजाब में ही ऑर्केस्ट्रा में काम करना शुरू कर दिया.

चलते इवेंट में सुदेश को शराबी ने मारा थप्पड़

कभी-कभी ज़िंदगी में घटी कुछ घटनाएं आपको आगे बढ़ने के लिए हौसला देती हैं. ऐसा ही कुछ सुदेश के साथ भी हुआ. अपने सर्वाइवल के लिए सुदेश ऑर्केस्ट्रा में काम करने लगे थे. एक शो का उन्हें करीब एक हज़ार रुपए मिला करता था. वो खुश थे. ज़िंदगी कट रही थी. 

ऑर्केस्ट्रा में परफॉर्म करते सुदेश लहरी.

लेकिन तभी एक इवेंट में एक ऐसी घटना घटी, जिसने उन्हें कॉमेडियन बना दिया. सुदेश ने बताया,

''एक बार स्टेज पर मैं गाना गा रहा था. एक बंदा आया जो नशे में चूर था. स्टेज के नीचे से ही चिल्लाने लगा. फिर अचानक ऊपर आया और थप्पड़ मारकर चिल्लाने लगा. थोड़ी देर के लिए तो पूरी टीम सकते में थी कि क्या हुआ. मैं अपने केबिन में लौट आया. उस दिन मैं बहुत रोया था.''

सुदेश के दिमाग में उस वक्त बहुतेरे विचार घुमड़ने लगे थे. उन्हें अपने होने पर शक होने लगा. पूरी घटना के बाद जब वो घर पहुंचे, तो अपनी वाइफ से कह दिया कि वो उनका आखिरी ऑर्केस्ट्रा था. उसके बाद वो कभी भी ऑर्केस्ट्रा नहीं करेंगे. सुदेश ने ठान ली थी कि अब कुछ बनकर ही वो पब्लिक के बीच जाएंगे.

यही वो घटना थी जिसके बाद सुदेश ने अपनी पहली पंजाबी कैसेट बनवाई. किसी तरह 15-20 हज़ार का इंतज़ाम करवाकर उन्होंने एक अलबम बनवाया. जिसका नाम था 'सड्डे वारी आटा मुक्क गया'. ये अलबम सक्सेसफुल रही. लोगों को खूब पसंद आई. इसी कैसेट की बदौलत उन्हें उनका पहला शो 'अल्फागड्डी' मिल गया. ये पंजाबी भाषा का कॉमेडी शो था. उस वक्त एक एपिसोड के लिए उन्हें 1500 रुपए मिलते थे. और एक दिन में वो चार एपिसोड्स शूट किया करते थे.

सुदेश लहरी ने कई पंजाबी फिल्मों में काम किया.

उनका ये शो भी चल निकला. 'अल्फागड्डी' के बाद उन्हें बहुत से शो मिलने लगे. मुंबई आने से पहले वो कई पंजाबी फिल्मों में काम कर चुके थे. धीरे-धीरे सुदेश को लोग जानने लगे. सुदेश पंजाब के स्टार बन गए. मगर मुंबई का सफर अभी बाकी था.

'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' के फाइनल में कपिल शर्मा से हुई टक्कर

पंजाब से निकलकर जब सुदेश मुंबई पहुंचे, तो वहां भी अपनी कॉमेडी का परचम लहरा दिया. 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' शो में हिस्सा लिया और टॉप थ्री में पहुंच गए. वहां उनका मुकाबला हुआ कपिल शर्मा और चंदन प्रभाकर से. फर्स्ट आने वाले को 10 लाख रुपए दिए जाने थे. वहीं फर्स्ट रनर अप को पांच लाख मिलने थे. सुदेश को पांच लाख मिलने की उम्मीद थी. लेकिन वो वहां सेकंड रनरअप बने. और उन्हें पैसे नहीं, सिर्फ ट्रॉफी मिली. उस मुकाबले में कपिल शर्मा फर्स्ट आए.

शो जीतने के बाद भी बिल्कुल शांत थे कपिल शर्मा

सुदेश कहते हैं,

''जिनको कुछ बनना होता है ना, उनके अंदर एक चीज़ होती है, एक ठहराव होता है. इतना बड़ा 'लाफ्टर चैलेंज' का विनर बन गया, 10 लाख रुपए जीत गया मगर वो बिल्कुल शांति से खड़ा है. वरना और कोई होता तो चिल्लाता, खुशी में उछलता. वो बिल्कुल शांत था. कपिल आज भी वैसा ही है. आज भी वैसे ही मिलता है.''

जब एक थप्पड़ से कृष्णा-सुदेश की जोड़ी बनी

सुदेश और कृष्णा की जोड़ी टीवी की सबसे पॉपुलर कॉमेडियन जोड़ी रही. इन दोनों के बीच का एक किस्सा भी सुदेश ने सुनाया. सुदेश ने बताया कि अक्सर ऐसा होता था कि परफॉर्मेंस के बीच वो अपना डायलॉग्स भूल जाते थे. एक बार जब ऐसा ही हुआ, तब कृष्णा ने उन्हें ऑन स्टेज थप्पड़ मारा था. वो थप्पड़ पड़ते ही ऑडियंस हंसने लगी. इसी के बाद दोनों की जोड़ी हिट हो गई. शुरुआती कई शोज़ में कृष्णा, सुदेश को अक्सर थप्पड़ मारा करते थे.

कृष्णा अभिषेक और सुदेश लहरी.

सुदेश बताते हैं कि कृष्णा से दोस्ती का उनके स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग पर काफी प्रभाव पड़ा है. कृष्णा ने ही उन्हें बहुत हद तक स्टाइलिंग और प्रोफेशनल बिहेवियर के बारे में सिखाया है.

सुदेश, साल 2007 में 'द ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज 3' में दिखे. इसके बाद 'कॉमेडी सर्कस' में कृष्णा के साथ दिखाई दिए. कॉमेडी शोज़ के साथ उन्होंने 'जय हो', 'नॉटी @ 40',  ‘रेडी’, ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’, ‘टोटल धमाल’ जैसी फिल्मों में भी काम किया. 

वीडियो: मामा गोविंदा के साथ अपना झगड़ा खत्म करना चाहते हैं कृष्णा अभिषेक?

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