'छावा' बांटने वाली फिल्म है, इसने विभाजन को भुनाया है- एआर रहमान
विकी कौशल स्टारर 'छावा' का म्यूजिक ए आर रहमान ने ही कंपोज किया है.
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AR Rahman देश के सबसे चर्चित म्यूजिक कम्पोजर्स में से एक हैं. उनके खाते में कई ब्लॉकबस्टर गानों के अलावा दो ऑस्कर्स भी हैं. पिछले साल उन्होंने Vicky Kaushal स्टारर Chhaava का म्यूज़िक कंपोज किया था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही थी. मगर विषय को बरतने के अंदाज़ की आलोचना हुई. आरोप ये लगे कि फिल्म लोगों को धर्म के आधार पर बांटना चाहती है. अब रहमान ने भी इस मामले पर रिएक्ट किया है. उन्होंने स्वीकारा कि ये फिल्म बांटती ज़रूर है. मगर उसके पीछे का मकसद बहादुरी दिखाना है.
बीबीसी एशियन से हुई बातचीत में रहमान ने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री दिन-ब-दिन बंटती जा रही है. इसलिए वो ऐसी फिल्में करने से बचते हैं, जो समाज को बांटने का काम करे. इस पर उनसे 'छावा' को लेकर सवाल किया गया. इस पर रहमान ने कहा,
"छावा बांटने वाली फिल्म है. मेरा मानना है कि इसने विभाजन को भुनाया है. लेकिन मुझे लगता है कि इसका मक़सद बहादुरी दिखाना है. मैंने डायरेक्टर से पूछा भी था कि आपको इस मूवी के लिए मेरी ज़रूरत क्यों है? तो उन्होंने कहा कि हमें इसके लिए केवल आप ही चाहिए."
अपनी बात में वो आगे जोड़ते हैं,
"मुझे लगता है कि छावा में बहुत कुछ है. इसका अंत भी देखने लायक है. लेकिन मुझे लगता है कि लोग इससे कहीं ज्यादा समझदार हैं. क्या आपको लगता है कि लोग मूवीज़ से प्रभावित हो जाएंगे? लोगों के भीतर एक ज़मीर होता है, जो जानता है कि सच्चाई क्या है और चालबाज़ी क्या है."
हालांकि रहमान ने स्पष्ट किया कि उन्हें 'छावा' का म्यूजिक देने पर गर्व है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है. वो कहते हैं,
"छावा सबसे चर्चित किरदार हैं. हर मराठा उन्हें अपने खून में महसूस करता है. फिल्म खत्म होने के बाद एक लड़की खूबसूरत कविता पढ़ती है, तो वो पल बहुत भावुक कर देता है. मुझे इस पूरी फिल्म का म्यूज़िक देने पर बहुत गर्व है, जिसमें हर मराठा की आत्मा और धड़कन बसती है."
इसी इंटरव्यू के दौरान रहमान से पूछा गया कि क्या उनके साथ फिल्म इंडस्ट्री में कभी कोई भेदभाव हुआ है. इस पर रहमान ने कहा कि उन्हें कभी इस बात का एहसास नहीं हुआ. उन्होंने तर्क दिया कि शायद ऊपरवाले ने उनसे ये बातें छिपा ली हों. इसलिए उन्हें किसी भी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा है. मगर अगले ही पल रहमान ने कहा कि पिछले 8 सालों में ऐसा होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि अब ताकत उन लोगों के पास चली गई, जो क्रिएटिव नहीं हैं. रहमान ने हिंट दिया कि उन्हें अब पहले की तुलना में थोड़ा कम काम मिलता है. इसके लिए उन्होंने सांप्रदायिक कारणों को ज़िम्मेदार ठहराया.
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