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अजय देवगन की 'चौहान' का चौतरफ़ा विरोध, क्षत्रिय संगठन ने लगाया राजपूती इतिहास का राजनीतिक फ़ायदा उठाने का आरोप

स्वरा भास्कर ने इसे बॉलीवुड का 'विवेक अग्निहोत्रीफिकेशन' बताया. और कश्मीरी सांसद ने इसे कश्मीर के दर्द का व्यावसायीकरण कहा.

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30 जून 2026 (अपडेटेड: 30 जून 2026, 11:35 AM IST)
Ajay Devgn in Chauhaan, Chauhaan Teaser Controversy
'चौहान' के टीज़र में कहा गया है कि पेलेट गन्स लिमिटेड डैमेज ही कर पाई हैं. इस बात को कई हस्तियां और जनता असंवेदनशील बता रही है.
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Ajay Devgn की अपकमिंग फिल्म Chauhaan अपने Teaser के जिस डायलॉग से चर्चा में आई, अब उसी के चलते विवादों में है. इसका चौतरफ़ा विरोध हो रहा है. पहले श्रीनगर के सांसद Aga Syed Ruhullah Mehdi ने इसके टीज़र पर नाराज़गी ज़ाहिर की. और अब Kshatriya Parishad ने चौहान में राजपूती इतिहास और पहचान के दुरुपयोग पर आपत्ति जताई है. दर्शकों का भी एक बड़ा वर्ग इसे प्रोपगैंडा बता रहा है. डायरेक्टर Neeraj Yadav की ये फिल्म Kashmir की पृष्ठभूमि पर बनी है. और अजय देवगन इसमें आर्मी ऑफिसर के रोल में हैं. टीज़र में दिखाया गया है कि कैसे कश्मीर में कुछ लोग लगातार पत्थरबाज़ी करते रहे हैं. और अब आर्मी उन्हें टैकल करने के लिए नया तरीका अपना रही है. टीज़र की शुरुआत पुलवामा के सीन से होती है. इसमें पत्थरबाज़ों के एक नौजवान लीडर को अवाम को उकसाते हुए दिखाया गया है. वो लोगों से हर जुम्मे इकट्ठा होने की बात कह रहा है. और इतने में अजय देवगन यानी मेजर चौहान एक बड़ा सा स्पीकर लिए भीड़ के बीच पहुंचते हैं. स्पीकर पर गाना बज रहा है, ‘जुम्मा चुम्मा दे दे...’ और अजय देवगन कहते हैं,

“75 साल बाद जवाब आ रहा है. पठानों से कहना, चौहान आ रहा है.”

ये बात कुछ लोगों और संगठनों को अखर गई. और इसीलिए फिल्म का जमकर विरोध हो रहा है. लोगों को टीज़र की वो लाइन भी असंवेदनशील लगी जिसमें कहा गया है कि पेलेट गन ने लिमिटेड डैमेज ही किया है.

# कश्मीर के दर्द को बेचना छोड़ दें

श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने टीज़र में कश्मीरियों के उस दर्द को दिखाए जाने पर नाराज़गी जताई, जिसकी भरपाई उनके मुताबिक कभी नहीं हो सकती. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना विरोध व्यक्त किया. X पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट में उन्होंने लिखा,

"चौहान का टीज़र बेहद विचलित करने वाला है. ये हर उस कश्मीरी के लिए डिस्टर्बिंग है, जिसके ज़हन में उन सालों की यादें हैं जब पेलेट गन दर्द और अपूरणीय क्षति का प्रतीक बन गई थीं. आंसू गैस, पानी की बौछारों और पेलेट गन को ‘बेअसर उपाय’ बताया गया है. लेकिन जिसे वो "बेअसर" कह रहे हैं, उसने हजारों ज़िदगियां तबाह कर दीं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अकेले 2016-17 के दंगों के दौरान पेलेट गन से 6,200 से अधिक लोग घायल हुए थे. सैकड़ों लोगों की आंखों में गंभीर चोटें आईं. जिन लोगों ने अपनी आंखों की रोशनी खो दी, जिनके शरीर में आज भी पेलेट फंसे हुए हैं, जिनके परिवार उन घावों को आज भी झेल रहे हैं, उनके लिए ये कोई फिल्मी एक्शन सीक्वेंस नहीं है. ये जीता-जागता दर्द है. दु:ख की बात है कि मेनस्ट्रीम फिल्मों ने बार-बार कश्मीर को अपने उस नैरेटिव का केंद्र बनाया है, जो पूरे समुदाय को संघर्ष, संदेह और हिंसा तक सीमित कर देती हैं. ये सवाल पूछना भी जायज़ है कि इसी तरह की कहानी पर आधारित एक और फिल्म को जियो स्टूडियोज़ का समर्थन क्यों मिल रहा है? कश्मीर सहानुभूति, ईमानदारी और सम्मान का हक़दार है. उसके दर्द का व्यवसायीकरण ग़लत है."

# राजपूती इतिहास का दुरुपयोग किया 

क्षत्रिय परिषद ने भी ‘चौहान’ के टीज़र के खिलाफ़ लंबा चौड़ा नोट लिखा है. सोशल मीडिया पर इसे शेयर करते हुए परिषद ने लिखा,

“हम नीरज यादव और अजय देवगन की फिल्म चौहान'के ज़रिए चौहान वंश के नाम का आज की सांप्रदायिक राजनीति के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की कड़ी निंदा करते हैं. राजपूत इतिहास कोई राजनीतिक हथियार नहीं है. चौहान वंश की विरासत पूरे राजपूत समाज की धरोहर है, न कि चुनावी राजनीति या जानबूझकर खड़े किए गए विवादों का हिस्सा. हम राजपूत पहचान का राजनीतिक या वैचारिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने की हर कोशिश का विरोध करते हैं.”

अपने नोट में क्षत्रिय परिषद ने उन लड़ाइयों की मिसाल भी दी जब राजपूती राजा और अफ़ग़ानी शासक साथ मिलकर लड़े. संगठन ने खानवा में राणा सांगा के नेतृत्व में महमूद लोदी वाली जंग का ज़िक्र किया. हल्दी घाटी में महाराणा प्रताप की सेना में एक टुकड़ी का नेतृत्व करने वाले हकीम खान सूरी की याद दिलाई. और लिखा,

“क्षत्रिय परिषद, राजपूती इतिहास का राजनीतिक या वैचारिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने की हर कोशिश का विरोध करती है. इतिहास को समाज में नफ़रत या सांप्रदायिक माहौल बनाने का ज़रिया नहीं बनाया जाना चाहिए. हम राजनीतिक नेताओं, फिल्म निर्माताओं और मीडिया से अपील करते हैं कि वो भारत के इतिहास और राजपूत विरासत का सम्मान करें. इतिहास को तोड़-मरोड़कर या उसे राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाकर पेश न करें. लोगों को भड़काने, जातीय भावनाएं उकसाने या राजनीतिक माहौल बनाने के लिए राजपूत वंश के नाम का इस्तेमाल गैर-ज़िम्मेदाराना और अपमानजनक है.”

# बॉलीवुड का विवेक अग्निहोत्रीफिकेशन

स्वरा भास्कर ने भी ‘चौहान’ के टीज़र का विरोध किया. ख़ास तौर पर पेलेट गन वाली लाइन का, जिसे टीज़र में लिमिटेड डैमेजिंग बताया गया है. अल जज़ीरा की ए‍क रिपोर्ट का स्निपेट शेयर करते हुए स्वरा ने लिखा,

“क्या बॉलीवुड अब यही दिखाना और महिमामंडित करना चाहता है? पेलेट गन कोई 'कम नुकसान' पहुंचाने वाला हथियार नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है. और कश्मीर के मूल निवासी पठान नहीं हैं. कुछ तो रिसर्च कर लिया करो यार.”

पोस्ट के कैप्शन में स्वरा ने लिखा, “बॉलीवुड का विवेक अग्निहोत्री-फिकेशन.”

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स्वरा भास्कर ने X पर ये पोस्ट शेयर की. 

एक बड़ा दर्शक वर्ग भी ‘चौहान’ के टीज़र की आलोचना कर रहा है. और अजय देवगन व मेकर्स की जमकर आलोचना हो रही है. अजय देवगन की ही ‘सिंघम अगेन’ का एक क्लिप वायरल है. इसमें एक कश्मीरी युवक अजय देवगन से कह रहा है,

"पत्थर मारना ओल्ड फैशन्ड है सर. ये नए भारत का नया कश्मीर है. हम सब आपके साथ हैं."

पब्लिक का कहना है कि अजय अपनी सुविधानुसार नैरेटिव चुनते हैं. एक तरफ उनकी फिल्म 'सिंघम अगेन' में पत्थरबाज़ी को ओल्ड फैशन्ड बताया जाता है. और दूसरी तरफ़ 'चौहान' में वो पत्थरबाजी को ऐसा मसला बता रहे हैं, जिसे सरकार से अटेंशन की ज़रूरत है. इंटरनेट वाली जनता कह रही है कि अजय के विचार बॉक्स ऑफिस के हिसाब से बदलते हैं. जब से ‘धुरंधर’ आई है, हर कोई उसी तरह की फिल्में बनाना चाहता है. जो टिकट खिड़की पर ढेर सारी कमाई करे. फिल्म का पॉलिटिक्स चाहे जो हो.  अब तक इस पर ‘चौहान’ के मेकर्स या अजय देवगन की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. मेकर्स ने इस फिल्म की रिलीज़ डेट भी अनाउंस कर दी है. उनकी घोषणा के मुताबिक ये 01 अक्टूबर 2027 को सिनेमाघरों में लगेगी. 

वीडियो: अक्षय खन्ना के फीस की वजह से अजय देवगन की 'दृश्यम 3'में क्या पेंच फंस गया?

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