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समय के साथ बॉलीवुड मूवी पोस्टर्स के रंग, रूप और रौनक कैसे बदली?

पहले पोस्टर्स हाथ से पेंट होते थे और फिर कुछ समय के बाद रंग... अरे सब यहीं जान लेंगे क्या? अंदर तो पढ़िए.

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17 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 17 अगस्त 2023, 01:26 PM IST)
Bollywood movie posters
हमारे यहां पोस्टर्स की यात्रा समझाई जाती है
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हम सभी के लिए किसी भी फिल्म का पहला इम्प्रेशन क्या होता है? अरे भई, फिल्म का पोस्टर ना! पोस्टर से हमें तमाम जानकारियां तो मिलती ही हैं, इसके साथ ही कभी-कभी हम फिल्म के पोस्टर से ही तय कर लेते हैं, फिल्म देखनी है या नहीं. ऐसे में कई मौकों पर फिल्म के पोस्टर्स गेम चेंजर साबित होते हैं. बहरहाल, समय के साथ बॉलीवुड बदला. और बदले इसके पोस्टर्स. तो आइए आपको इसी बदलाव की यात्रा पर लिए चलते हैं. इस यात्रा को हमने तीन टाइमलाइन्स में बांटा है. 

1930-1980
शोले और मुगल-ए-आजम के 3D पोस्टर्स

ये चटक रंगों का दौर था. आम तौर इस 50 साल के टाइम फ्रेम में हाथ से पोस्टर्स बनाए जाते थे. यही इसे देता था रेट्रो लुक. चटक रंगों के साथ ये 3D टाइपोग्राफी का भी दौर था. माने ऐसे फॉन्ट इस्तेमाल होते थे, जो उभरकर आएं. 3D पेंटिंग तो सुना ही होगा, वैसा ही कुछ. उदाहरण के लिए 'शोले' और 'मुग़ल-ए-आज़म' के पोस्टर्स. इस समय के पोस्टर्स में कोलाज स्टाइल भी देखने को मिलता है. इसमें मूवी के कुछ रोमांचक सीन्स का कोलाज बनाया जाता था. ये पोस्टर दर्शकों को फिल्म की कहानी की एक झलक देते थे. आप इसे आजकल के टीजर से कम्पेयर कर सकते हैं. माने इसमें फिल्म की कहानी टीज की जाती थी. इससे लोगों में फिल्म देखने की जिज्ञासा बढ़ती थी.

1980-1999
उमराव जान और DDLJ के फोटोग्राफिक  पोस्टर्स

इस दौर में एक शिफ्ट देखने को मिला. हाथ से बनाए पोस्टर्स की जगह फोटोग्राफिक इमेजेस ने ले ली. यहां पोस्टर्स को पोट्रेट लुक देने की कोशिश की गई. कहने का मतलब है कि पोस्टर के लिए हीरो-हीरोइन फोटो खिंचवाते और उन्हें ही पोस्टर पर इस्तेमाल किया जाता. इनके उदाहरण हैं 'उमराव जान' और DDLJ. ये पोस्टर दर्शकों को फिल्म का स्नीक पीक देते थे. उन्हें फिल्म की वाइब समझाने में मदद करते थे.

2000 के बाद के साल
देव डी और कहानी के फोटोशॉप वाले पोस्टर्स

इस दौर में जबरदस्त बदलाव देखा गया. कम्प्यूटर और तमाम डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर्स ने पोस्टर मेकिंग में क्रांति ला दी. इसे आप डिजिटल प्रोग्रेस कह सकते हैं. पॉप आर्ट, ग्राफिक्स, स्पेशल इफेक्ट्स और फोटोशॉप का इस्तेमाल किया जाने लगा.  'देव डी' और 'कहानी' जैसी फिल्मों के पोस्टर में इसका असर देखा जा सकता है. 'बाहुबली 2' के पोस्टर ने दर्शकों को अपनी शानदार ग्राफिक्स और ब्रिलिएंट डिज़ाइन का जादू दिखाया.

ये तो हमारा मानना था. हम सही भी हो सकते हैं और गलत भी. आपका क्या कहना है? कमेंट बॉक्स में स्वागत है.

(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रही चेतना प्रकाश ने की है)

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