ज़ी5 पर एक नई सीरीज़ रिलीज़ हुई है, ‘ब्लडी ब्रदर्स’. जो स्कॉटिश सीरीज़ ‘गिल्ट’ काऑफिशियल इंडियन अडैप्टेशन है. शो को डायरेक्ट किया है ‘साथिया’ वाले शाद अली ने.लीड में हैं जयदीप अहलावत और मोहम्मद ज़ीशान आयूब, जो यहां जगजीत और दलजीत नाम केभाई बने हैं. दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अपोज़िट. जगजीत एक वकील है, अपनी लॉ फर्मचलाता है. लेकिन इसकी आड़ में बहुत कुछ कर रहा है. वहीं दलजीत एक बुक स्टोर चलाताहै, जो उसे उसके भाई ने खरीद कर दिया है क्योंकि दलजीत इतना चंट नहीं कि खुद से सबकुछ कर पाए.हर बात को लिटरली लेता है. शेरों-शायरी वाली भाषा में बात करता है. खुद सीधा है औरदूसरों को भी ऐसा ही समझता है. एक रात दोनों भाई अपनी गाड़ी में एक रिसेप्शन से लौटरहे होते हैं. तभी अचानक अंधेरे में इनकी गाड़ी से एक आदमी को टक्कर लग जाती है, औरवो मौके पर ही मर जाता है. दोनों वहां से निकल लेते हैं, और समझते हैं कि रात गई,बात गई. लेकिन ऐसा होता नहीं है. क्योंकि फिर कहानी में एंट्री होती है नए किरदारोंकी, जिनका मरे हुए शख्स से कुछ-न-कुछ कनेक्शन था. ये कहानी को और जगजीत-दलजीत कीदुनिया को कैसे घुमाते हैं, यही छह एपिसोड्स में देखने को मिलता है.स्कॉटिश ड्रामा 'गिल्ट' का पोस्टर.शो के सभी एपिसोड्स का नाम एक-एक किरदार पर रखा गया है. जैसे पहले एपिसोड का नाम हैजगजीत है, जहां कहानी उससे शुरू होती है. ‘ब्लडी ब्रदर्स’ इस बात को लेकर सस्पेंसनहीं बनाता कि दोनों भाई जेल जाएंगे या नहीं. उसका इरादा कुछ और है. ये मेजर छहकिरदारों की दुनिया कुरेदने में लगा है. ताकि दिखा सके कि सब एक जैसे ही हैं, कोईब्लैक या व्हाइट नहीं. कोई अपनी खुशी सिर्फ दूसरों में ढूंढ रहा है, तो कोई पैसोंके लिए खुद को धोखा दे रहा है. फिर ऐसे किरदार भी हैं, जो कहते हैं कि वो लालचीकिस्म के नहीं, लालची ही हैं.शो के शुरुआती एपिसोड्स में ऐसे कई सीन हैं, जिनका उस वक्त कोई तुक नहीं बनता.नेरेटिव में अटपटे लगते हैं. लेकिन आगे चलकर उनके तार जुडते दिखते हैं. शो ने ऐसाकई मोमेंट्स पर किया, और कामयाब भी रहे. हर एपिसोड एक क्लिफहैंगर पर खत्म होता है.लेकिन शो की राइटिंग से एक बड़ी शिकायत है. यहां हर मेजर किरदार की लाइफ को स्पेसदेने की कोशिश करना चाहा गया, पर ऐसा करने में डेप्थ में उतरना भूल गए. जैसे हमेंपता चलता है कि इस किरदार की लाइफ में फलां-फलां दिक्कत है, इसलिए ये ऐसा कर रहाहै. ऐसा पता चलता है सिर्फ डायलॉग्स के ज़रिए, एक्शन से नहीं. मतलब किरदार जितने ऑनस्क्रीन दिख रहे हैं, वैसे ही छोड़ दिए गए. वो इससे पहले कैसे रहे होंगे, उनकी लाइफक्या थी, ये जानने की जिज्ञासा कभी नहीं जाग पाती.जयदीप अहलावत और जीशान आयूब ने दोनों भाइयों का रोल किया है.अगर एक्टिंग की बात करें तो तीन एक्टर्स के हिस्से अच्छे सीन आए. पहला तो जगजीत कीपत्नी प्रिया बनी श्रुति सेठ के हिस्से. प्रिया को पहली नज़र में देखकर ही आप समझजाते हैं कि वो नीडी किस्म की है, दूसरों पर निर्भर रहती है. अपने पति कीप्रायॉरिटी लिस्ट में टॉप पर नहीं आती. इस वजह से खुद को हमेशा वल्नरेबल पाती है.प्रिया के बारे में ये तमाम बातें आपको सिर्फ श्रुति को देखकर समझ आ जाती हैं. अगलीहैं शीला डेविड बनी माया अलघ. शीला मैनिप्युलेटिव किस्म की इंसान है. जो सीधे तौरपर ये कुबूल भी करती है, और आदर्शवादी बनने की कोशिश नहीं करती. तीसरे नंबर पर आतेहैं प्राइवेट इंवेस्टिगेटर दुष्यंत बने जितेंद्र जोशी. जिनके किरदार की ज़ुबान परयूपी एक्सेंट का असर फ़ीका नहीं पड़ता. नशे में धुत रहता है और कुछ बड़ा काम करनाचाहता है ताकि पत्नी को उस पर गर्व हो. जितेंद्र ने खुद को ऐसे कैरी किया है किशुरुआत में वो पहचान में नहीं आते.शो की कास्ट में काबिल एक्टर्स के नाम होने के बावजूद ये शो राइटिंग के टर्म्स मेंपिछड़ जाता है. ऐसे में लास्ट एपिसोड को जल्दी-जल्दी रैप अप करने की कोशिश भी कोईफायदा नहीं पहुंचाती. बस आपके दिमाग में सवाल छोड़ जाती है. जैसे कहानी ऊटी में सेटथी, फिर भी हर किरदार नॉर्थ इंडियन. ऊटी को शायद सिर्फ उसकी एस्थेटिक वैल्यू के लिएयूज़ किया हो. बाकी जिस नोट पर ये सीज़न खत्म हुआ है, सेकंड सीज़न की गुंजाइश छोड़करजाता है. आप उसके लिए एक्साइटेड होंगे या नहीं, ये शो देखकर डिसाइड कर लीजिए. फिरबता दें कि ‘ब्लडी ब्रदर्स’ को आप ज़ी5 पर स्ट्रीम कर सकते हैं.