मिडल ईस्ट में लगे बैन ने 'धुरंधर 2' को नुकसान से कहीं ज़्यादा फायदा करवा दिया!
जिस डर से यश ने 'टॉक्सिक' पोस्टपोन की, उससे 'धुरंधर 2' का नुकसान छोड़िए तगड़ा बेनेफिट हो गया.
.webp?width=210)
Dhurandhar 2 और Toxic के बीच भयंकर बॉक्स ऑफिस क्लैश होते-होते रह गया. 04 मार्च को Yash ने अचानक घोषणा की कि वो अपनी फिल्म Postpone कर रहे हैं. इससे Ranveer Singh की मूवी को खुला मैदान मिल गया है. 'टॉक्सिक' वालों का कहना है कि उन्होंने Iran-Israel War के कारण अपनी रिलीज़ डेट बदली है. मगर उस लड़ाई का Aditya Dhar की फिल्म पर कुछ खास असर नहीं पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि पहले पार्ट की तरह इस सीक्वल के भी मिडल ईस्ट के बैन होने के आसार नज़र आ रहे हैं. लेकिन इस बार ये बैन मेकर्स को नुकसान से कहीं ज़्यादा, फायदा पहुंचाने वाला है.
'धुरंधर' को पाकिस्तान समेत मिडल ईस्ट के कई देशों में बैन कर दिया था. इसके पीछे फिल्म के तथाकथित एंटी-पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा को जिम्मेदार ठहराया गया. सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने ओवरसीज़ मार्केट से 299 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. अगर गल्फ़ नेशंस इस पर बैन नहीं लगाते, तो इस आंकड़े में 100 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी तय थी. मेकर्स ने पहले पार्ट को केवल हिंदी में रिलीज़ किया था. ऐसे में उसका मेजर ऑडियंस बेस नॉर्थ इंडियन मार्केट में था. बावजूद इसके, ये भारत में सबसे अधिक कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई. पहले पार्ट ने दुनिया भर में 1300 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन किया था. इसमें से 108 करोड़ रुपये तमिलनाडु, 70 करोड़ कर्नाटक, 10.65 करोड़ केरल और 10 करोड़ रुपये तेलुगु राज्यों से आए थे. केवल हिंदी में रिलीज़ होकर साउथ में इतना तगड़ा बिजनेस कर जाना बड़ी बात है.
19 मार्च को 'धुरंधर 2' और 'टॉक्सिक' सिनेमाघरों में साथ रिलीज़ होने वाली थीं. यश अपनी फिल्म को इंग्लिश में भी रिलीज़ कर रहे थे. इससे वो ग्लोबल ऑडियंस को टार्गेट कर रहे थे. दूसरी तरफ़, आदित्य ये मानकर चल रहे हैं कि उनकी फिल्म इस बार भी मिडल ईस्ट में बैन हो जाएगी. इसलिए उन्होंने अपना अधिकतर फोकस डोमेस्टिक ऑडियंस पर ही रखा. गल्फ में बैन के बाद उन्होंने साउथ के राज्यों पर अधिक फोकस किया. इस दौरान उन्होंने अपनी सबसे बड़ी गलती सुधारी. वो ये कि उन्होंने अपनी फिल्म को हिंदी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में भी लाने का फैसला किया. यही कारण है कि ‘धुरंधर 2’ को हिंदी के अलावा तेलुगु, तमिल, कन्नड़ा और मलयालम में भी रिलीज़ किया जा रहा है. उनकी ये स्ट्रैटजी साउथ इंडियन मार्केट को भेदने में कारगर साबित हो सकती है.
ठीक यहीं 'धुरंधर' पर लगा बैन उनके लिए मददगार साबित हुआ. इसमें दो राय नहीं कि मिडल ईस्ट के देश भारत के बाहर हिंदी फिल्मों का सबसे बड़ा बाज़ार हैं. पहले पार्ट में आदित्य 100 करोड़ का नुकसान झेल चुके हैं. इसलिए उन्होंने शुरू से ही मन बना लिया था कि वो सेकेंड पार्ट में साउथ इंडिया से इसकी भरपाई करेंगे. वैरायटी इंडिया से हुई बातचीत में फिल्म एग्जीबिटर अक्षय राठी बताते हैं कि इस बार 'धुरंधर' वालों ने शुरू से ही मिडल ईस्ट से दूरी बना ली थी. उन्हें ईरान-इज़रायल युद्ध से भी कुछ फ़र्क नहीं पड़ा. उनका ध्यान इस बात पर था कि भारत में अधिक से अधिक दर्शक बटोरे जाएं. नॉर्थ में तो अपर हैंड उसके पास ही था. लेकिन साउथ में यश को बड़ा फायदा मिलता दिख रहा था. वहां 'धुरंधर 2' को अधिक शोज़ के लिए समझौता करना पड़ता और एक हद तक नॉर्थ में भी.
मगर फिर अचानक यश ने घोषणा कर दी कि वो युद्ध के कारण अपनी फिल्म 04 जून को रिलीज़ करेंगे. मिडल ईस्ट 'धुरंधर 2' के लिए भले बंजर बन गया हो, मगर वो 'टॉक्सिक' के लिए बड़ा बाज़ार है. ‘टॉक्सिक’ के पोस्टपोन होते ही नॉर्थ से लेकर साउथ तक रणवीर सिंह की फिल्म को खुला मैदान मिल गया. मिडल ईस्ट पर लगे बैन के बाद आदित्य ने फिल्म को चार साउथ इंडियन भाषाओं में रिलीज़ करने की स्ट्रैटजी बनाई थी. वो प्लानिंग अब बड़ा फ़ायदा देने जा रही है. वहां ये फिल्म पहले पार्ट से दोगुनी कमाई कर सकती है. बाकी, नॉर्थ में तो इसका दबदबा रहेगा ही. कुल जमा, मिडल ईस्ट पर लगे बैन से फिल्म को भले 100-150 करोड़ रुपये का नुकसान हो, मगर 'टॉक्सिक' के हटते ही फिल्म नॉर्थ और साउथ में पहले से कहीं ज्यादा कलेक्शन कर सकती है. ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि फिल्म पर बैन नहीं लगाया जाता, तो शायद आदित्य भी यश की तरह मिडल ईस्ट में अपनी रिलीज़ स्ट्रैटजी बदलने पर सोच-विचार कर रहे होते. मगर साउथ इंडियन मार्केट खुलने से इसके पास अब वाकई दो हजार करोड़ का बिजनेस कर लेने का स्कोप है.
वीडियो: यूएस अडवांस बुकिंग में रणवीर की 'धुरंधर 2' से पीछ रह गई 'टॉक्सिक'?

.webp?width=60)

