"बैक स्टेज काम, सामान ढोना, चाय बनाना भी मंज़ूर था, मगर हर हाल में बस सिनेमा बनाना था"
अनुराग कश्यप ने दिन के 50 रुपए में बैकस्टेज काम भी किया, कहा- "मैं सिनेमा के प्यार में पागल था, दीवाना था."

Anurag Kashyap जब करियर बनाने मुंबई पहुंचे, तब वो फिल्ममेकिंग की बारहखड़ी भी नहीं जानते थे. बस एक जुनून सवार था उनके सिर पर. एक सनक थी. कि करना तो बस यही है. न तो उनके पास कोई बैकअप प्लान था. न ही उन्होंने ये सोचा था कि मुंबई में कुछ न हो सका, तो क्या करेंगे. पिछले दिनों जब अनुराग The Lallantop के ख़ास कार्यक्रम सिनेमा अड्डा में आए, तब उन्होंने फिल्ममेकिंग के लिए उनके इस जुनून के बारे में तसल्ली से बात की.
इस गुफ्तगू में उनकी आवाज़ कहीं लरज़ गई, तो कहीं अति उत्साह में आंखों की पुतलियां फैल गईं. एक अनजान शहर में फांके करने की कहानी जो अक्सर लोग रोते हुए सुनाते हैं, अनुराग किसी प्रेम कहानी की तरह सुना रहे थे. विजयगाथा की तरह बता रहे थे. इस गुफ्तगू में उन्होंने बताया कि चाहे बैक स्टेज काम करना पड़े या सेट पर सामान ढोना पड़े... उन्हें हर हाल में सिनेमा का हिस्सा बनना ही था. अनुराग ने कहा,
अनुराग ने बताया कि सिनेमा की दुनिया में आने की उनकी इच्छा कितनी तीव्र थी कि वो 50 रुपये में बैकस्टेज काम करने को भी तैयार थे. इस बारे में उन्होंने कहा,
अनुराग कश्यप के वर्कफ्रंट की बात करें, तो उन्होंने हिंदी सिनेमा को 'ब्लैक फ्रायडे', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर', 'देव डी' और 'गुलाल' जैसी जबरदस्त फिल्में दी हैं. उनकी फिल्में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में भी सराही गई हैं. उनकी बनाई ‘केनेडी’ ने कई फिल्म फेस्टिवल्स में तारीफें बटोरीं. उनकी बनाई ‘निशांची’ पिछले दिनों थिएटर्स में रिलीज़ हुई थी. उनकी अगली फिल्म ‘बंदर’ टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई. इसकी इंडिया रिलीज़ डेट अभी अनाउंस नहीं की गई है. अनुराग से हुई ये पूरी बातचीत आप दी लल्लनटॉप के यूट्यूब चैनल और हमारी वेबसाइट पर देख सकते हैं.
वीडियो: अनुराग कश्यप ने शाहरुख खान के साथ अभी तक फिल्म क्यों नहीं बनाई? अनुराग कश्यप ने इंटरव्यू में बताया

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