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अगर आप बगावत नहीं करोगे, तो मां-बाप की महत्वाकांक्षाएं आप पर थोप दी जाएंगी- अनुराग कश्यप

अनुराग कश्यप ने कहा, "कई बार खुद को पाने के लिए कई लोगों को निराश करना पड़ता है, मैंने भी यही किया."

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14 अक्तूबर 2025 (पब्लिश्ड: 09:36 PM IST)
Anurag Kashyap theatre days, Anurag Kashyap
जब अनुराग कश्यप ने अपने घरवालों को बताया कि वो फिल्में बनाना चाहते हैं, तो उन्हें माता-पिता की काफ़ी नाराज़गी झेलनी पड़ी.
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Anurag Kashyap का कहना है कि जो चाहते हो, वो बनने के लिए बग़ावत करनी पड़ती है. फिर चाहे सामने अपने ही क्यों न हों. माता-पिता ही क्यों न हों. उन्होंने भी यही किया था. उनके पिता कभी नहीं चाहते थे कि अनुराग फिल्मों में जाएं. इसीलिए आर्थिक स्थिति मज़बूत न होते हुए भी उन्हें पढ़ाया. मगर अनुराग फिल्में बनाना चाहते थे. ज़ाहिर है घर से घर्षण मिला. मगर अनुराग ने ज़िद नहीं छोड़ी. बीते दिनों जब वो The Lallantop के ख़ास कार्यक्रम सिनेमा अड्डा में आए, तो माता-पिता की महत्वाकांक्षाओं और अपनी ज़िद की लड़ाई की पूरी कहानी सुनाई. 

अनुराग कश्यप ने कहा,

“अभी कुछ दिन पहले गाड़ी में हम कहीं जा रहे थे. हमारे जो प्रोड्यूसर हैं, उन्होंने बड़ी अच्छी बात कही. वो कह रहे थे कि आपको अपने मां-बाप की महत्वकांक्षाओं को नहीं जीना है. अगर आप रिबेल नहीं करोगे, तो मां-बाप की महत्वाकांक्षाएं आप पर थोप दी जाएंगी. फिर आप वो नहीं बन पाओगे जो आप हो. और आप क्या हो, वो ढूंढने में समय लगता है. आपको पूरी ज़िंदगी पता ही नहीं चलेगा आखिर आप हो क्या?”

अनुराग ने बताया कि उनके घर में पढ़-लिखकर नौकरी करने वाला माहौल था. मगर अनुराग बने-बनाए कायदों में नहीं बंधे. उन्होंने अपना अलग रास्ता बनाया. अपनी बात में वो आगे जोड़ते हैं,  

“मेरे दादाजी गांव के स्कूल में प्रिंसिपल थे. जिस तरह उनके पिता ने उन्हें औक़ात से बाहर जाकर पढ़ाया, मेरे पिताजी ने भी मुझे वैसे ही धकेला. मां संस्कृत और फिलॉसफी में डबल MA हैं. घर में बहुत किताबें थीं. पढ़ता था मैं. मगर मुझे स्पष्ट था कि मुझे क्या करना है. बहुत थपेड़े खाए मैंने. मगर मेरी किस्मत अच्छी थी. वरना मेरे कई भाई, जो दिमागी तौर पर मुझसे काफी आगे थे, वो वहीं गांव में रह गए.”

अनुराग ने बताया कि जब उन्होंने घर में ये ऐलान किया कि उन्हें सिनेमा बनाना है, तो वही हुआ जिसकी उन्हें उम्मीद थी. इस बारे में अनुराग ने कहा,

“मैंने जब तय किया कि मैं फिल्मों में जाऊंगा, इतना पढ़ने-लिखने के बाद... (एक लंबा पॉज़ लेकर बोले) बहुत नाराज़गी झेली है मैंने. पिताजी को तो लगा था सारी पढ़ाई बेकार कर दी इसने. मगर वो कुछ समय की नाराज़गी थी. झेली...कई बार खुद को पाने के लिए कई लोगों को निराश करना पड़ता है. मैंने भी यही किया.”

अनुराग कश्यप से हुई ये पूरी बातचीत आप दी लल्लनटॉप के यूट्यूब चैनल और हमारी वेबसाइट पर देख सकते हैं. 

वीडियो: अनुराग कश्यप ने शाहरुख खान के साथ अभी तक फिल्म क्यों नहीं बनाई? अनुराग कश्यप ने इंटरव्यू में बताया

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