"ब्राह्मणों पर पेशाब" वाले बयान पर फिर फंसे अनुराग कश्यप, ग़ैर जमानती वॉरंट जारी
साल भर पहले ब्राह्मण समुदाय ने अनुराग कश्यप के इसी बयान पर उनके चेहरे पर कालिख पोतने वाले के लिए इनाम रखा था.

Anurag Kashyap इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. साल भर पहले उन्होंने ब्राह्मण समुदाय को लेकर एक बेहद विवादित कमेंट किया था. हो-हल्ला मचा, तो उन्होंने माफ़ी मांग ली. मगर मुंह से निकले शब्द और सोशल मीडिया पर किए कमेंट, इतनी आसानी से पीछा नहीं छोड़ते. खबर है कि विश्व हिन्दू परिषद के एक कार्यकर्ता की शिकायत पर उनके खिलाफ FIR हो गई है.
मामला अप्रैल 2025 से जुड़ा है. समाज सुधारक ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले के जीवन पर एक फिल्म बनी- 'फुले'. जब ये मूवी सेंसर बोर्ड के पास पहुंची, तो उन्होंने इसमें कई कट्स सुझाए. फिल्म में कई जातिवादी सीन्स और डायलॉग्स शामिल थे, जिन्हें सेंसर बोर्ड फिल्म से हटाना चाहता था. उसी बीच उन कट्स की लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. उसे देखकर अनुराग कश्यप का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने इंस्टाग्राम पर सरकार और सेंसर बोर्ड की आलोचना करते हुए फिल्म के समर्थन में कई पोस्ट किए. इनमें से कुछ पोस्ट्स में अनुराग ने ब्राह्मणों को लेकर भी बुरा-भला कहा, जिससे लोग काफी ऑफेन्ड हो गए. अनुराग के कमेंट बॉक्स में उनकी आलोचना होने लगी. ऐसे ही एक यूजर ने लिखा,
"ब्राह्मण तुम्हारे बाप हैं. जितना तुम्हारी उनसे सुलगेगी, उतना सुलगाएंगे.”
जवाब में अनुराग ने लिखा,
"ब्राह्मणों पर मैं पेशाब करूंगा...कोई प्रॉब्लम?"

उनके इस बयान पर हंगामा खड़ा हो गया. देशभर के ब्राह्मण समुदाय ने इसकी आलोचना की. उन्होंने अनुराग के चेहरे पर कालिख पोतने वाले के लिए इनाम भी रखा. मामले को तूल पकड़ता देख, अनुराग ने सफाई दे डाली. उन्होंने एक पोस्ट लिखा, जिसमें ये बताया गया था कि उनके परिवारवालों को लगातार रेप और हत्या की धमकियां मिल रही हैं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके कमेंट को गलत संदर्भ में लिया गया था. फिर भी, उन्होंने अपने बयान के लिए माफ़ी मांगी. मगर ये मामला इतनी आसानी से पीछा छोड़ने वाला नहीं था.
पिछले दिनों, यानी उस कमेंट के साल भर बाद, सूरत की एक अदालत में ये मामला फिर खुला. दरअसल, वकील और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता कमलेश रावल ने अनुराग के खिलाफ एक शिकायत दर्ज़ करवाई थी. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट को पहली नज़र में ही उनका बयान आपत्तिजनक लग रहा था. उनका मानना है कि ऐसे बयान किसी खास समुदाय की इमेज खराब कर सकते हैं. साथ ही इनसे समाज में तनाव पैदा होने की संभावना भी है. मामले की गंभीरता देख कोर्ट ने पुलिस से कहा कि वो अनुराग के खिलाफ FIR दर्ज करे. इस शिकायत को सूरत के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है.
पुलिस को अनुराग पर अलग-अलग समुदायों के बीच नफरत फैलाने, शांति भंग करने के लिए इंटेन्शनल इंसल्ट करने और मिसलीडिंग इन्फॉर्मेशन देने का केस फ़ाइल करने को कहा गया है. शिकायत में अनुराग के जनवरी 2020 के एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का भी ज़िक्र हुआ. आरोप है कि उस पोस्ट में उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए हिंदुओं के लिए ऐसे शब्द इस्तेमाल किए थे, जो काफी आपत्तिजनक थे. इस मामले में अनुराग को कई समन भेजे गए. मगर अनुराग ने उन्हें नज़रंदाज़ किया. और इसलिए अब उनके खिलाफ ग़ैर जमानती वॉरंट जारी कर दिया गया है. खबर लिखे जाने तक अनुराग ने इस मामले पर रिएक्ट नहीं किया है.
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