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'एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते' कहने वाले मोहनीश बहल आज कल कहां हैं?

जिन्होंने सलमान खान का मज़ाक उड़ाते हुए कहा था- तू क्या एक्टर बनेगा!

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4 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 4 जनवरी 2021, 02:05 PM IST)
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मोहनीश बहल के पिता नेवी में और मां हीरोइन थीं.
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1976 में डायरेक्टर राज खोसला इंडिया सबसे शानदार अदाकाराओं में गिनी जाने वाली नूतन के साथ 'मैं तुलसी तेरे आंगन की' नाम की फिल्म बना रहे थे. इसी फिल्म के सेट पर राज पहली बार नूतन के बेटे से मिले. तब बालक मोहनीश की उम्र 15 साल थी. तीन साल बाद राज किसी फिल्म के सिलसिले में नूतन से मिलने उनके घर आए. यहां उन्होंने मोहनीश को देखा. मोहनीश अब बड़े हो गए थे. साथ ही उन्हें बॉडी बिल्डिंग का शौक था. इसलिए पहली झलक में वो राज खोसला को अच्छे लग गए. उन्होंने नूतन से पूछा मोहनीश एक्टिंग करने में इंट्रेस्टेड हैं? ना-नुकर करते इस फिल्म को मोहनीश ने हां कर दी.
मोहनीश की स्कूलिंग कैथेड्रल स्कूल से हुई थी और जब उन्हें फिल्म का ऑफर आया, तब वो सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज से ग्रैजुएशन कर रहे थे. इसलिए उनका लहज़ा बहुत साफ नहीं था. राज खोसला ने उन्हें अपने ऑफिस बुलाया और उर्दू की ट्रेनिंग दिलवाई. सब कुछ सेट था मगर किसी वजह से राज वो फिल्म नहीं बना पाए. हालांकि तब तक मोहनीश को कुछ फिल्मी लोग जानने लगे थे. इसी बदौलत उन्हें 1981 में पहली फिल्म मिली. फिल्म का नाम 'इतिहास'. राज कुमार, शबाना आज़मी, रति अग्निहोत्री और अनिल कपूर के साथ इस फिल्म में मोहनीश भी काम कर रहे थे. ये फिल्म 1981 में बनकर तैयार हो गई. मगर रिलीज़ हुई 1987 में. इतिहास के बनने और रिलीज़ होने के बीच मोहनीश का करियर शुरू होकर तकरीबन खत्म हो चुका था.
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1. मां ने कहा नाक मत कटाना और मोहनीश ने 5 फ्लॉप फिल्म दे दी हिंदी फिल्म एक्ट्रेस नूतन और नेवी में लेफ्टिनेंट कमांडर रहे रजनीश बहल के यहां 14 अगस्त, 1961 को एक बेटे का जन्म हुआ. नाम रखा गया मोहनीश. मोहनीश का सपना था कि वो एयरफोर्स पायलट बनेंगे. पापा ने कहा नहीं देश की सेवा करना अच्छी बात है मगर मोहनीश वहां की लाइफस्टाइल में फिट नहीं हो पाएंगे. जबकि मां चाहती थीं कि वो भी पापा की तरह देश की सेवा करें. जब ये सब चल रहा था, तभी मोहनीश को फिल्म ऑफर्स आने लगे. नूतन ने मोहनीश को कहा-

'मैं तुम्हें एक्टिंग नहीं सिखा सकती. मगर जो भी करना, पूरी ईमानदारी से करना. मेरी नाक बहुत लंबी है, इसलिए अपने कदम फूंक-फूंककर रखना.'


इतिहास देखने के बाद नूतन ने मोहनीश को सिर्फ एक सलाह दी थी.
इतिहास देखने के बाद नूतन ने मोहनीश को सिर्फ एक सलाह दी थी.

इसके बाद मोहनीश ने फिल्म 'इतिहास' में काम किया. नूतन को वो फिल्म दिखाई गई. फिल्म देखने के बाद नूतन ने मोहनीश से कुछ नहीं कहा. जब मोहनीश ने उनसे पूछा कि उनका काम कैसा लगा, तो नूतन ने सिर्फ इतना कहा कि मुंह खोलकर शब्दों का उच्चारण किया करो. अंग्रेज़ी लहज़े में हिंदी बोलना बंद करो. मोहनीश ने इसकी गांठ बांध ली. 1982 से 86 के बीच उन्होंने कुल 6 फिल्मों में काम किया. उनमें से सिर्फ रामसे ब्रदर्स की फिल्म 'पुराना मंदिर' सफल रही. उस समय हॉरर फिल्मों को बी-ग्रेड सिनेमा माना जाता था. इसलिए पुराना मंदिर की बड़ी सफलता को भी नज़रअंदाज़ कर दिया गया. मोहनीश 1986 के बाद से दो साल बेरोज़गार रहे. इंडस्ट्री ने उन्हें फ्लॉप हीरो मान लिया था, इसलिए उन्हें कोई अपनी फिल्म में नहीं लेना चाहता था. करियर की शुरुआती 6 में से 5 फ्लॉप. ये आंकड़ा किसी स्टार का कॉन्फिडेंस तोड़ने के लिए काफी था. फिर मोहनीश तो स्टार किड थे. फिल्म नहीं चलने की टेंशन एक तरफ और नूतन के बेटे होने का प्रेशर दूसरी तरफ से.
नूतन जैसी सुपरस्टार के बेटे की की बैक टु बैक 6 फिल्मों का पिट जाना बहुत बड़ी बात थी. किसी को उम्मीद नहीं थी कि अब मोहनीश वापस कभी खड़े हो पाएंगे.
नूतन जैसी सुपरस्टार के बेटे की बैक टु बैक 6 फिल्मों का पिट जाना बहुत बड़ी बात थी. किसी को उम्मीद नहीं थी कि अब मोहनीश वापस कभी खड़े हो पाएंगे.
2. जब सबकुछ खत्म हो रहा था, तब मोहनीश की लाइफ में सलमान ने एंट्री मारी मोहनीश को दो चीज़ों का शौक था. पहला बॉडी बिल्डिंग का और दूसरा पायलट बनने का. इस बेरोजगारी के दौरान उन्होंने अपने शौक को अपना पेशा बनाने का सोचा. वो बॉम्बे फ्लाइंग क्लब में पायलट बनने की ट्रेनिंग लेने लगे. बॉडी-बिल्डिंग करने का शौक था, इसलिए वो सी-रॉक होटल के जिम में जाते थे. यहां उनकी मुलाकात सलमान खान से हुई. सलमान भी एक्टिंग करना चाहते थे. मगर उनकी बॉडी उस टाइम काफी दुबली-पतली हुआ करती थी और हाइट भी ठीक-ठाक सी थी. इसलिए मोहनीश उन्हें हल्के में लेते थे. जब सलमान ने मोहनीश को ये बताया कि उन्हें एक्टर बनना है, तो मोहनीश ने उनका मज़ाक उड़ाते हुए कहा-

'जब मैं 6 फीट की हाइट और इतनी अच्छी बॉडी के बाद भी नहीं चला, तो तू क्या एक्टर बनेगा.'


जिस सलमान को मोहनीश चिढ़ाते थे, उन्हीं की वजह से उनका करियर वापस पटरी पर आया.
जिस सलमान को मोहनीश चिढ़ाते थे, उन्हीं की वजह से उनका करियर वापस पटरी पर आया.

इसी बीच सलमान खान को सूरज बड़जात्या की फिल्म 'मैंने प्यार किया' में लीड रोल मिल गया. जब सलमान की कास्टिंग फाइनल हो गई, तब उन्होंने सूरज से पूछा कि फिल्म का विलन फाइनल हो गया है क्या? सूरज ने कहा नहीं. सलमान लौटकर मोहनीश से मिले और बताया कि उन्हें फिल्म मिल गई है. साथ ही उन्होंने मोहनीश से कहा कि अगर वो विलन का रोल करने में इंट्रेस्टेड हैं, तो इस फिल्म के लिए ऑडिशन दे सकते हैं.
ऑडिशन की बात सुनते ही मोहनीश बिलकुल हिचके नहीं और मैंने प्यार किया में विलन के रोल के लिए ऑडिशन देने पहुंच गए.
ऑडिशन की बात सुनते ही लुट-पिट चुके मोहनीश बिलकुल हिचके नहीं. वो मैंने प्यार किया में विलन के रोल के लिए फटाक से ऑडिशन देने पहुंच गए.

हीरो से सीधे विलन. बड़ा बदलाव था. मगर मोहनीश हिचकने या इगो के फेर में पड़ने की बजाय फिल्म का ऑडिशन देने चले गए. ऑडिशन ठीक रहा और वो कास्ट कर लिए गए. ठीक इसी समय राजश्री प्रोडक्शन के तत्कालीन कर्ता-धर्ता ताराचंद बड़जात्या को पता चला कि मोहनीश, नूतन के बेटे हैं. अब वो पसोपेश में पड़ गए. 3. मोहनीश के लिए नूतन ने ताराचंद बड़जात्या की हालत टाइट कर दी मोहनीश ताराचंद बड़जात्या के यहां से लौटकर अपने घर आए. उन्होंने नूतन से सारी बात कह दी. नूतन दिग्गज एक्ट्रेस थीं. उन्हें देखकर लोग सम्मान से खड़े हो जाते थे. नूतन ने ताराचंद बड़जात्या को फोन मिलाया और कहा-

'मेरे बेटे को इसलिए पनिश मत करिए, क्योंकि वो मेरा बेटा है.'

उनके कहने का मतलब था कि मोहनीश को विलन का रोल करने दीजिए. ताराचंद जी नूतन की बात को माना और उनसे एक वादा किया. उन्होंने कहा कि वो आगे मोहनीश को ज़रूर अपनी फिल्म में पॉज़िटिव और लीड रोल में कास्ट करेंगे. खैर, 'मैंने प्यार किया' कि शूटिंग शुरू हो गई. फिल्म के बनने के दौरान किसी को नहीं पता होता कि इसका टिकट खिड़की पर क्या हश्र होने वाला है. इसलिए फिल्म की शूटिंग के साथ-साथ मोहनीश अपनी जहाज उड़ाने की ट्रेनिंग जारी रखे हुए थे.
किसी को नहीं पता था कि कुछ न्यूकमर्स को लेकर बनी फिल्म इतनी सफल बन जाएगी.
किसी को नहीं पता था कि कुछ न्यूकमर्स को लेकर बनी फिल्म इतनी सफल बन जाएगी.

29 दिसंबर, 1989 को 'मैंने प्यार किया' रिलीज़ हुई. और बवाल हिट हुई. फिल्म से जुड़े किसी भी व्यक्ति को इस बात का ज़रा भी आइडिया नहीं था कि कुछ न्यूकमर्स को लेकर बनी 'मैंने प्यार किया' हिंदी सिनेमा इतिहास की इतनी सफल फिल्म बन जाएगी. सलमान और भाग्यश्री रातों-रात सुपरस्टार बन गए. मगर भाग्यश्री ने कुछ ही समय बाद फिल्म बिज़नेस छोड़कर शादी करने का फैसला ले लिया. इस स्टारडम का फायदा सलमान खान और मोहनिश बहल को मिला. हालांकि सलमान बताते हैं कि 'मैंने प्यार किया' के अगले एक साल तक उनके पास कोई काम नहीं था. मगर मोहनीश का इमेज मेकओवर हो गया. वो फ्लॉप हीरो से देश के सबसे चर्चित विलन बन गए. हर कोई उन्हें अपनी फिल्म में विलन के रोल में लेना चाहता था. 4. कैंसर ने मां को लील लिया, पिता जलकर मर गए 'मैंने प्यार किया' के बाद मोहनीश का करियर वापस पटरी पर आ गया था. उन्हें ए-ग्रेड फिल्में ऑफर होने लगीं. वो एक बार फिर सलमान के साथ 'बागी', ऋषि कपूर के साथ 'हिना', 'बोल राधा बोल' और शाहरुख खान की पहली फिल्म 'दीवाना' में नेगेटिव रोल्स में नज़र आए. 16 जुलाई, 1989 की सुबह सूरज को उनके पिता ने उठाया और कहा हॉस्पिटल जाना है. मां की तबीयत ठीक नहीं है. अस्पताल से लौटते समय नूतन ने मोहनीश को बताया कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है. इलाज शुरू हुआ. मगर एक साल के भीतर नूतन का कैंसर लीवर तक फैल गया. उनकी हालत बिगड़ने लगी. उन्हें इलाज के लिए यूएस ले जाने की बात चल रही थी. इसी समय मोहनीश को अपनी फिल्म 'शोला और शबनम' की शूटिंग के लिए ऊटी निकलना था. वो ऊटी जाने से पहले अपनी मां से मिलने अस्पताल गए. वो उनसे मिलकर निकले और कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया. पता नहीं उनके जी में क्या आया, वो दोबारा अपनी मां को देखने गए. देखा तो नूतन उनकी ओर देखकर मुस्कुरा रही थीं. ये वो आखिरी मौका था, जब मोहनीश ने अपनी मां को ज़िंदा देखा. 20 फरवरी, 1991 को मोहनीश को ऊटी में फोन गया कि उनकी मां की तबीयत काफी खराब है. वो 21 फरवरी को शाम साढ़े 4 बजे मुंबई पहुंचे, तब तक नूतन गुज़र चुकी थीं.
'शोला और शबनम' की शूटिंग पर जाने से पहले मोहनीश ने अपनी मां को आखिरी बार मुस्कुराते हुए देखा था.
'शोला और शबनम' की शूटिंग पर जाने से पहले मोहनीश ने अपनी मां को आखिरी बार मुस्कुराते हुए देखा था.

इस घटना के 13 साल बाद मोहनीश के पिता की भी डेथ हो गई. मुंबई के कोलाबा इलाके में सागर संगीत नाम का एक 32 माले का अपार्टमेंट है. इस अपार्टमेंट के 32वें फ्लोर के पेंटहाउस में रजनीश बहल रहते थे. 3 अगस्त, 2004 को इस अपार्टमेंट में आग लग गई. फायर डिपार्टमेंट ने पूरा अपार्टमेंट खाली करवाया. उन्हें नहीं पता था कि रजनीश 32वें फ्लोर पर हैं. इसी आग में जलकर मोहनीश के पिता रजनीश बहल की मौत हो गई. जब ये घटना हुई, तब मोहनीश मुंबई में ही शूटिंग कर रहे थे. 5. जब सलमान की फिल्म में मोहनीश को अपनी रेंज साबित करने का मौका मिला इसके बाद आया वो मौका जब मोहनीश को बतौर एक्टर अपनी रेंज साबित करने का एक और मौका मिला. इस फिल्म से प्रोड्यूसर ताराचंद बड़जात्या ने नूतन से मोहनीश को पॉजिटिव रोल में कास्ट करने का अपना वादा भी पूरा किया. लेकिन ये देखने के लिए मोहनीश की मां नूतन ज़िंदा नहीं थीं. ये फिल्म थी 1994 में आई 'हम आपके हैं कौन'. इस फिल्म में मोहनीश ने सलमान के बड़े भाई का रोल किया था. इस फिल्म में मोहनीश के परफॉरमेंस की खूब तारीफ हुई. मगर उनकी ये तारीफ उन्हें अलग-अलग तरह का काम नहीं दिलवा पाई. आगे वो एक बार फिर राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' में सलमान और सूरज बड़जात्या के साथ आए. फिल्म बड़ी सफल साबित हुई. मगर ये किसी बड़े रोल में उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई. आगे वो 'जानवर', 'कहो ना प्यार है', 'LOC कारगिल' और 'विवाह' जैसी फिल्मों में नज़र आए. मगर इन फिल्मों में उनका रोल कुछ खास यादगार नहीं था. मोहनीश खुद ये मानते हैं कि अगर उनकी बॉडी ऑफ वर्क से राजश्री प्रोडक्शन की फिल्मों को निकाल दिया जाए, तो वो खोखली हो जाएंगी. हम उनके इस कहे से पूरी तरह सहमत हैं.
फिल्म 'हम साथ साथ हैं' में मोहनीश ने सलमान खान के बड़े भाई का रोल किया था.
फिल्म 'हम आपके हैं कौन' में मोहनीश ने सलमान खान के बड़े भाई का रोल किया था. आगे दोनों ने 'हम साथ साथ हैं' पर भी साथ काम किया. आखिरी बार सलमान और मोहनीश 'जय हो' नाम की फिल्म में नज़र आए थे. 
6. जब इंडस्ट्री ने मोहनीश को काम देना बंद कर दिया 2006 में आई फिल्म 'विवाह' के बाद मोहनीश अगली बार 2010 में बड़े परदे पर दिखाई दिए. हालांकि इस बीच उन्होंने टीवी करना शुरू कर दिया था. उनके टीवी करियर की शुरुआत हुई 2002 में स्टार प्लस पर आने वाले शो 'संजीवनी' से. इसमें उन्होंने एक डॉक्टर का रोल किया था. इसके बाद वो रामानंद सागर के टीवी शो 'आरज़ू है तू' में नज़र आए. जब भी उनसे पूछा जाता है कि वो फिल्मों में क्यों नहीं दिख रहे, मोहनीश साफ कहते हैं कि उन्हें फिल्में नहीं मिल रहीं. उन्हें कोई फिल्ममेकर काम क्यों नहीं ऑफर कर रहा, इसके जवाब में वो कहते हैं- क्योंकि फिल्ममेकर्स को ये लगने लगा कि मोहनीश अब टीवी करते हैं, इसलिए उन्हें कास्ट करने में डेट्स का इशू होगा.
'रामायण' वाले रामानंद सागर के टीवी शो 'आरज़ू है तू' के फैनमेड पोस्टर पर बाकी एक्टर्स के साथ मोहनीष बहल.
'रामायण' वाले रामानंद सागर के टीवी शो 'आरज़ू है तू' के फैनमेड पोस्टर पर बाकी एक्टर्स के साथ मोहनीष बहल.
7. आज कल मोहनीश बहल कहां हैं और क्या कर रहे हैं? मोहनीश ने 2014 में सलमान खान की फिल्म 'जय हो' से वापसी की थी. आखिरी बार वो 2019 में आशुतोष गोवारीकर की अर्जुन कपूर स्टारर फिल्म 'पानीपत' में दिखाई दिए थे. हालांकि इस दौरान वो लगातार टीवी में एक्टिव रहे. 2019 में उन्होंने अपने पहले टीवी शो संजीवनी के रीबूट वर्ज़न में भी काम किया. वो 2020 की शुरुआत तक उस शो से जुड़े हुए थे, मगर अब उस शो से उनका ट्रैक खत्म हो चुका है. 1992 में उन्होंने एक्ट्रेस एकता सोहिनी से शादी की थी, जिन्हें आरती बहल के नाम से जाना जाता है. आरती और मोहनीश की दो बेटियां हैं प्रनूतन और तृषा. प्रनूतन भी सलमान खान के प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'नोटबुक' से बॉलीवुड में कदम रख चुकी हैं. मोहनीश की छोटी बेटी अभी पढ़ाई कर रही हैं. मोहनीश अपनी फैमिली के साथ मुंबई में ही रहते हैं.

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