और भिया, क्या चल रिया है? सुनो एक बात कहते हैं. आप ना, आदमी सही हो, बस लोग समझतेनहीं. आपने कहा मेरे गले पर चाकू रख दो मैं भारत माता की जय नहीं कहूंगा. भाई गलेपर चाकू रखा हो तो भलाई इसी में है कि कुछ न कहा जाए, कहने के फेर में जरा सी हरकतहुई और गला लला जाएगा. वैसे आपको क्यों लगता है कि कोई गले पर चाकू रखकर भारत माताकी जय बुलवाएगा. और अगर ऐसा सच में कोई करे तो मेरी नजर में न वो भारत मां का लालहै. न अपनी मम्मा का. क्योंकि कोई मां अपने बच्चे को ये तो नहीं ही सिखाएगी कि उसकेही दूसरे बेटे के गले पर चाकू रखकर उसकी ही जय बुलवाए. कुछ बोलना न बोलना पर्सनलचीज है. आपका मन नहीं है, न बोलिए. हम साथ हैं आपके. दूसरा थोड़े आपके मुंह में शब्दडाल देगा. जबर्दस्ती थोड़े है, आजाद मुल्क है. पर बॉस एक पेच है. आप गलत जगह फंस गएयार. ये क्या भारतमाता और जय-पराजय लगा रखी है. आप तो नेता हो. मुसलमानों के नेता.मुसलमानों के नेता कहना आपके साथ नाइंसाफी होगी, लेकिन आपको शायद पसंद वही आता है.नो इशूज! सबकी अपनी पॉलिटिक्स है, आपको भी तो पांच साल किसी न किसी कंफर्ट जोन मेंटिकना होता है. लेकिन मैं जो कह रहा था, आप तो 'संसद रत्न अवॉर्ड' भी पा चुके हो. समझदार आदमी हो, मुसलमानों की बात करते हो फिर मुसलमानों के लिए कुछ करते क्योंनहीं? किसी दिन सरकार को धर लीजिए. कहिए मुसलमानों को गरीबी से निकालने के लिए कुछकरती काहे नहीं? अब बॉस ये ना कहना कि मुसलमान गरीब नहीं हैं. आदमी 'कुछ होते हैं/कुछ नहीं होते' में खर्च हो लेता है. सीरियसली सोचने की जरूरत है. उनके रोजगार केलिए कुछ कीजिए. और कुछ नहीं तो सरकार पर यही दबाव बनाइए कि जैसे एक वर्ग के लिएप्रतियोगी परीक्षाओं की खास तैयारी होती है कुछ जगह, वैसे ही मुसलमानों के लिए भीहो. यहां आप चाहे तो 'सिर्फ मुसलमानों' के लिए भी जोड़ सकते हैं. आपकी पॉलिटिक्स भीहो लेगी, भाई लोग का भला भी होगा, बॉस! ट्रिकी होना होगा, कुर्ता पहनकर गले मिलनेसे काम नहीं चलेगा. सोचिए सरकारी नौकरियों में मुसलमानों का कितना हिस्सा है? बहुतसीक्रेट बात कह रहा हूं. वर्सेज-वर्सेज ही खेलना है न, सामने वाले को जीभ दिखानी हैन? अपने पट्ठों को खूब ट्रेंड करके हर जगह घुसा दीजिए, हर नौकरी में जहां भी वो जासकते हों, पहुंच जाएं पढ़-लिखकर. कंपटीशन में न बहुत मजा आता है. अब ये जबरन नहीं कहरहे हैं, सोचो न, मुसलमानों के इत्ते नेता हुए, कोई सामने से आकर ठंडे तरीके सेक्यों नहीं कहता कि साथ में आओ. प्रेम से बतियाएं, आज के लड़कों से पूछें, उनको क्याचाहिए. इतना खदबदाते काहे हो भाई लोग? इत्ती बेचैनी काहे की? कौन सी जोंक चिपका रखीहै. ठंडा पानी पिया करो. नेता हो न? तो पटती क्यों नहीं हिंदुओं से? इधर वाले खराबहों तो आप ही शुरू कर दो. मने एक सड़ी सी बात बता दो, कोई एक नेता ये कहता क्योंनहीं नजर आता कि आओ हम लोग हाथ पकड़ कर रोजगार के लिए कुछ करें. 2011 में बता दियागया था, 33% मुसलमानों के पास बस रोजगार है. बाकी 67% की कौन सोचेगा मोहन भागवत?नहीं आप तो मुसलमानों के नेता हैं. फिर साध्वी प्राची तो नहीं सोचेंगी उनके बारेमें. वक़्त है कि मुसलमानों के एम्पॉवरमेंट के लिए कुछ करें. जो करते भी हैं मीठा-मीठा बोलते हैं, एकता की बात करते हैं. फर्जी-फर्जी सा लगता है. आप खुलकर आते हैं,चेहरा बनकर! लो देखो ये आदमी है मुसलमानों का मसीहा टाइप्स! क्या है न कि जब तकहिंदू-मुस्लिम को एक करने की बात होगी, इस मुल्क में माथाफोड़ी होगी. जब तक स्कूटरपर कृष्ण बने लड़के को ले जाती बुरके वाली औरत की फोटो पर Wow वाले कमेंट आएंगे.कैसेट उलझी रहेगी. उसका इलाज़ है, हमसे सुन लो, हिंदू-मुसलमान कभी एक नहीं हो सकते.न उनको होना चाहिए. हिंदू-हिंदू रहें, मुसलमान-मुसलमान रहें, वैसे ही अच्छे लगतेहैं. बस खुश रहें, अपनी- अपनी पहचान में. आपके पापा 6 बार सांसद रहे, भाई विधायकहैं. आप भी सांसद हैं. फैमिली बिलकुल वैसी ही है, जैसी मुलायम सिंह यादव या बालठाकरे की हुआ करती है. सारे लोग एक ही व्यवसाय में नाम कमा रहे हैं. आप तो संविधानकी बात करते हैं, उसकी शपथ भी लेते होंगे चुनाव जीतने के बाद. उसी संविधान से आपकोहक मिला है कि आप क्या बोलने या नहीं बोलने के लिए आज़ाद हैं. आप अंग्रेजी भी बोलतेहैं खटाखट. पर आपके ही कुछ भाई और भी हैं. जो नहीं बोल पाते. फिर कहते काहे नहीं किमदरसों में अंग्रेजी पढ़ाई जाए, तमाम वो मदरसे जहां अंग्रेजी न पढ़ाई जाए, नए तरीकेकी शिक्षा न दी जाए जो बालकों को बाहर की दुनिया में टिकने के काबिल बनाए, उसे नग्रांट मिले न मान्यता. कहते काहे नहीं हो? एक भी बार नहीं सुना हमने! दिक्कत आपकेसाथ है, आप बोलते तब हैं जब हज की सब्सिडी की बात आए. मदरसों की ग्रांट की बात आए.कुछ करना हो तो टोपी पहन के खजूर खिलाने का काम अच्छा कर लेते हो आप. किसी नेमुसलमानों के खिलाफ कुछ कहा हो और आपको काउंटर करना हो. सामने से आया पलटाना ही हैतो ये काम कैरम बोर्ड की किनारी ही अच्छी कर लेती है. आप क्या कर रहे हो? 'भाईइग्नोर मार' नहीं कहता कोई? औंगे-पौंगे हर बयान पर कोई बाइट लेने को मरा जा रहारिपोर्टर आपके मुंह में माइक दे देता है, और आप भक्क से वही बोल देते हो जो वोकहलवाना चाहता है. इससे ज्यादा सब्र तो हाईस्कूल में प्रपोज करने के पहले लड़के करलेते हैं. टेपरिकॉर्डर नहीं हैं आप. 'लिविंग रियलिटी ऑफ मुस्लिम इन वेस्ट बंगाल'वाली रिपोर्ट में पता क्या कहा गया था. पश्चिम बंगाल के मुसलमान सबसे गरीब हैं. यूट्यूब, वेबसाइट है अच्छी सी. लगभग सारे वीडियो मिल जाते हैं वहां, आपका वो वाला कोईवीडियो नहीं मिला जिसमें आप वेस्ट बंगाल के मुसलमानों की बेहतरी के धांसू-धांसूआईडिया बता रहे थे. वहां 80% परिवार 5000 और लगभग 35% मुसलमान 2500 रुपए से कमकमाते हैं महीने का. उन पर मुंह क्यों नहीं खोलते भाई? वो मुसलमान नहीं हैं या उनकीआपको फ़िक्र नहीं? यहां 22% से ज्यादा मुसलमान कभी स्कूल नहीं गए. और आप बतिया रहेहैं कि भारत माता की जय नहीं बोलेंगे. हू केयर्स ब्रो? नीति आयोग वाले कहते हैं,गरीबी रेखा से नीचे 25% मुसलमान हैं. माने हर चौथा मुसलमान गरीब है, और आपमुसलमानों के नेता. आप कहते हैं भारत माता की जय नहीं बोलेंगे लोल. करनी ही है तोबुनकरों की बात कीजिए, जुलाहों की कीजिए. महिलाओं की कीजिए. आपको पता है हजारमुसलमानों में 951 औरतें हुआ करती हैं, जबकि हिन्दुओं में ये आंकड़ा कम है उनमेंहजार के पीछे 939 औरते ही हैं. पहली जंग आप जीत गए. महिला सशक्तिकरण की. औरतेंज्यादा हैं तो सुधार भी जल्दी होगा. अब आगे बढ़िए. अच्छी हेल्थ फैसिलिटीज के लिएआवाज उठाइए. मुस्लिम बहुल इलाकों में पोलियो को लेकर अंधविश्वासी लोग रहते हैं.पोलियो तक नहीं पिलाते थे. बच्चों को ये सोचकर कि गलत असर हो जाएगा. कम से कम इसीपर बोल दीजिए. और पांच बच्चे- दस बच्चे वाले टंटों में मत पड़िए. पोतड़े आपको बदलनेनहीं होते, न वो भगवा वालों को. टंटों में पड़ना ही है तो परिवार नियोजन को लेकरबातें करिए. मैं तो चाहूंगा, किसी दिन न्यूज पर 'ओवैसी का विवादित बयान' की बजायकॉपर-टी, कंडोम और नसबंदी की बात करते ओवैसी फ्लैश हों. अहो! क्या नजारा होगा.आत्मा जुड़ा जाएगी. उन तमाम मुसलमानों का सपना सच करने की तरफ ये ओवैसी का कदम होगा,जो चाहते हैं उनके भी दो बच्चे धारी वाली टाई पहनकर 'बाय-बाय अब्बा, बाय-बाय अम्मी'करते स्कूल वाली पीली बस में बैठें. फिर खाक किसी को फर्क पड़ता है, आप किसी की जयकहें कि न कहें.आपका, 'ओवैसी का विवादित बयान' वाली हेडिंग से चट चुका आशीष प्रदीप