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असदुद्दीन ओवैसी को खुला ख़त: भारत माता की जय मत कहो लेकिन..

आपका वो वीडियो नहीं मिल रहा जिसमें मुस्लिमों की एजुकेशन, हेल्थ और रोजगार की बात कर रहे थे.

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आशीष मिश्रा
15 मार्च 2016 (अपडेटेड: 15 मार्च 2016, 02:25 AM IST)
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और भिया, क्या चल रिया है? सुनो एक बात कहते हैं. आप ना, आदमी सही हो, बस लोग समझते नहीं. आपने कहा मेरे गले पर चाकू रख दो मैं भारत माता की जय नहीं कहूंगा. भाई गले पर चाकू रखा हो तो भलाई इसी में है कि कुछ न कहा जाए, कहने के फेर में जरा सी हरकत हुई और गला लला जाएगा. वैसे आपको क्यों लगता है कि कोई गले पर चाकू रखकर भारत माता की जय बुलवाएगा. और अगर ऐसा सच में कोई करे तो मेरी नजर में न वो भारत मां का लाल है. न अपनी मम्मा का. क्योंकि कोई मां अपने बच्चे को ये तो नहीं ही सिखाएगी कि उसके ही दूसरे बेटे के गले पर चाकू रखकर उसकी ही जय बुलवाए. कुछ बोलना न बोलना पर्सनल चीज है. आपका मन नहीं है, न बोलिए. हम साथ हैं आपके. दूसरा थोड़े आपके मुंह में शब्द डाल देगा. जबर्दस्ती थोड़े है, आजाद मुल्क है. पर बॉस एक पेच है. आप गलत जगह फंस गए यार. ये क्या भारतमाता और जय-पराजय लगा रखी है. आप तो नेता हो. मुसलमानों के नेता. मुसलमानों के नेता कहना आपके साथ नाइंसाफी होगी, लेकिन आपको शायद पसंद वही आता है. नो इशूज! सबकी अपनी पॉलिटिक्स है, आपको भी तो पांच साल किसी न किसी कंफर्ट जोन में टिकना होता है. लेकिन मैं जो कह रहा था, आप तो 'संसद रत्न अवॉर्ड' भी पा चुके हो.  समझदार आदमी हो, मुसलमानों की बात करते हो फिर मुसलमानों के लिए कुछ करते क्यों नहीं?
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अब ये जबरन नहीं कह रहे हैं, सोचो न, मुसलमानों के इत्ते नेता हुए, कोई सामने से आकर ठंडे तरीके से क्यों नहीं कहता कि साथ में आओ. प्रेम से बतियाएं, आज के लड़कों से पूछें, उनको क्या चाहिए. इतना खदबदाते काहे हो भाई लोग? इत्ती बेचैनी काहे की? कौन सी जोंक चिपका रखी है. ठंडा पानी पिया करो. नेता हो न? तो पटती क्यों नहीं हिंदुओं से? इधर वाले खराब हों तो आप ही शुरू कर दो. मने एक सड़ी सी बात बता दो, कोई एक नेता ये कहता क्यों नहीं नजर आता कि आओ हम लोग हाथ पकड़ कर रोजगार के लिए कुछ करें. 2011 में बता दिया गया था, 33% मुसलमानों के पास बस रोजगार है. बाकी 67% की कौन सोचेगा मोहन भागवत? नहीं आप तो मुसलमानों के नेता हैं. फिर साध्वी प्राची तो नहीं सोचेंगी उनके बारे में. वक़्त है कि मुसलमानों के एम्पॉवरमेंट के लिए कुछ करें. जो करते भी हैं मीठा- मीठा बोलते हैं, एकता की बात करते हैं. फर्जी-फर्जी सा लगता है. आप खुलकर आते हैं, चेहरा बनकर! लो देखो ये आदमी है मुसलमानों का मसीहा टाइप्स! क्या है न कि  जब तक हिंदू-मुस्लिम को एक करने की बात होगी, इस मुल्क में माथाफोड़ी होगी. जब तक स्कूटर पर कृष्ण बने लड़के को ले जाती बुरके वाली औरत की फोटो पर Wow वाले कमेंट आएंगे. कैसेट उलझी रहेगी. उसका इलाज़ है, हमसे सुन लो, हिंदू-मुसलमान कभी एक नहीं हो सकते. न उनको होना चाहिए. हिंदू-हिंदू रहें, मुसलमान-मुसलमान रहें, वैसे ही अच्छे लगते हैं. बस खुश रहें, अपनी- अपनी पहचान में. आपके पापा 6 बार सांसद रहे, भाई विधायक हैं. आप भी सांसद हैं. फैमिली बिलकुल वैसी ही है, जैसी मुलायम सिंह यादव या बाल ठाकरे की हुआ करती है. सारे लोग एक ही व्यवसाय में नाम कमा रहे हैं. आप तो संविधान की बात करते हैं, उसकी शपथ भी लेते होंगे चुनाव जीतने के बाद. उसी संविधान से आपको हक मिला है कि आप क्या बोलने या नहीं बोलने के लिए आज़ाद हैं. आप अंग्रेजी भी बोलते हैं खटाखट. पर आपके ही कुछ भाई और भी हैं. जो नहीं बोल पाते. फिर कहते काहे नहीं कि मदरसों में अंग्रेजी पढ़ाई जाए, तमाम वो मदरसे जहां अंग्रेजी न पढ़ाई जाए, नए तरीके की शिक्षा न दी जाए जो बालकों को बाहर की दुनिया में टिकने के काबिल बनाए, उसे न ग्रांट मिले न मान्यता. कहते काहे नहीं हो? एक भी बार नहीं सुना हमने!
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'लिविंग रियलिटी ऑफ मुस्लिम इन वेस्ट बंगाल' वाली रिपोर्ट में पता क्या कहा गया था. पश्चिम बंगाल के मुसलमान सबसे गरीब हैं. यू ट्यूब, वेबसाइट है अच्छी सी. लगभग सारे वीडियो मिल जाते हैं वहां, आपका वो वाला कोई वीडियो नहीं मिला जिसमें आप वेस्ट बंगाल के मुसलमानों की बेहतरी के धांसू-धांसू आईडिया बता रहे थे. वहां 80% परिवार 5000 और लगभग 35% मुसलमान 2500 रुपए से कम कमाते हैं महीने का. उन पर मुंह क्यों नहीं खोलते भाई? वो मुसलमान नहीं हैं या उनकी आपको फ़िक्र नहीं?
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अब आगे बढ़िए. अच्छी हेल्थ फैसिलिटीज के लिए आवाज उठाइए. मुस्लिम बहुल इलाकों में पोलियो को लेकर अंधविश्वासी लोग रहते हैं. पोलियो तक नहीं पिलाते थे. बच्चों को ये सोचकर कि गलत असर हो जाएगा. कम से कम इसी पर बोल दीजिए. और पांच बच्चे- दस बच्चे वाले टंटों में मत पड़िए. पोतड़े आपको बदलने नहीं होते, न वो भगवा वालों को. टंटों में पड़ना ही है तो परिवार नियोजन को लेकर बातें करिए. मैं तो चाहूंगा, किसी दिन न्यूज पर 'ओवैसी का विवादित बयान' की बजाय कॉपर-टी, कंडोम और नसबंदी की बात करते ओवैसी फ्लैश हों. अहो! क्या नजारा होगा. आत्मा जुड़ा जाएगी. उन तमाम मुसलमानों का सपना सच करने की तरफ ये ओवैसी का कदम होगा, जो चाहते हैं उनके भी दो बच्चे धारी वाली टाई पहनकर 'बाय-बाय अब्बा, बाय-बाय अम्मी' करते स्कूल वाली पीली बस में बैठें. फिर खाक किसी को फर्क पड़ता है, आप किसी की जय कहें कि न कहें.

आपका, 'ओवैसी का विवादित बयान' वाली हेडिंग से चट चुका आशीष प्रदीप

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