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सलमान और सारुख, लेड्‌डीज को इज्जत देणी है के ना, तय कर लो!

इज्जत दोगे, कि नहीं दोगे. दोगे कि नहीं दोगे, दोगे कि नहीं दोगे. तो फिर अब आगे कभी भी किसी मसले पर ज्ञान मत देना.

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1 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 1 जुलाई 2016, 04:39 PM IST)
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सलमान और शाहरुख गुरुवार शाम मुंबई की सड़कों पर बाइक राइड करते हुए. फोटो: मिलिंद शेल्टे
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बॉलीवुड बहुत दर्दनाक जगह है.

पिछले हफ्ते सलमान खान ने कहा कि सुल्तान में रेस्लर के रोल की तैयारी में रोज छह-सात घंटे भयंकर (ये शब्द भी इस्तेमाल कर सकते थे) मेहनत लगती थी. उनकी ऐसी हालत हो जाती थी जैसे रेप की हुई औरत की होती है.

पापा सलीम खान ने हल्ला होने पर हमेशा की तरह दो-तीन वाक्यों में ट्विटर पर पूरे परिवार की ओर से माफी मांग ली. उस पूरे परिवार में सलमान शामिल नहीं थे.
ठीक बात है, कि सलमान समझते हैं उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा. उनका इरादा सही था. लोगों की विवेचना गलत है. वो चैनल वाला बदमाशी पर उतर आया है. हालांकि वही चैनल वाला एक बार सलमान का इंटरव्यू लेने लगा था तो इंट्रो में सलमान की आंखों में आंखें डालकर इतनी तारीफ की कि सलमान शर्माने लगे. हैरत हुई थी क्योंकि तारीफ की इतनी गुंजाइश तो नहीं थी.
ठीक है कि सलमान ने माफी नहीं मांगी.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा था. सलमान हाजिर भी नहीं हुए, माफी भी नहीं मांगी. उनके वकील ने ऐसा जवाब दिया है जो आयोग टका सा मुंह लेकर बैठा है.
अब सुल्तान फिल्म के प्रचार की प्लानिंग में भी कुछ तब्दीली किए जाने की खबर है. अब ज्यादातर ये टीम सलमान-अनुष्का को वहां वहां ही लेकर जाएगी जहां सवाल न पूछे जाएं. जैसे रिएलिटी शोज़़, कॉमेडी शोज़, प्रायोजित चैनल इंटरव्यू, प्रायोजित सिटी टुअर. जहां भी प्रेस वाले ये सवाल पूछ सकते हैं वहां सलमान नहीं जाएंगे. 'He's had it enough.'
हम भी शांत बैठे थे. हमने बात कर ली
कि सलमान का बयान हमें आत्मावलोकन करने का मौका देता है क्योंकि हम भी लापरवाह होकर ही बातें करते हैं. अपने घर में दफ्तरों में. हर जगह.
लेकिन कुछ गड़बड़ है. पूरी तरह चुप नहीं बैठा जा सकता.
सुल्तान फिल्म का ये डायलॉग प्रोमो देखिए जो कल ही आया है.
https://www.youtube.com/watch?v=LgCdD4-QzmA
कुमुद मिश्रा का पात्र पूछता है, तू यहां पहलवानी करने आया है, (या) रोमांस? खुद को सारुख खान समझे है के?
तो सुल्तान/सलमान कहता है:

सारुख खान का मज़ाक म ना उड़ाओ. मने भोत पसंद ए. जब वो लड़की की आंख में आंख डाल के देक्खे ए ना, तो अंधी लड़की भी पट जावे है.

अब ये तुम क्यों बोले? इसकी क्या जरूरत थी.
तुम फिल्म के अंदर भी बोलने में कोई जवाबदेही नहीं ले रहे और फिल्म के बाहर तो कभी ली ही नहीं है. अब ये न कहें कि ये तो पात्र बोलता है और इसे डायलॉग राइटर ने लिखा है. इस हिसाब से बजरंगी भाईजान से आपने सद्चरित्रवान इमेज बना ली. वो सब भी कबीर खान एंड पार्टी का लिखा था. तो उसका फायदा क्यों लिया? यहां हिट होंगे तो सब अपना, आलोचना होगी तो किसी और को बीच में ले आया जाएगा.
और ये सुनने के बाद अनुष्का शर्मा भी खड़ी-खड़ी दांत निकालती रहती हैं. पीछे से आवाज आती है बेबी को बेस पसंद है.
ये वही अनुष्का हैं जो फीयरलेस कहलवाकर एक मैगजीन के कवर पर लगी थीं.
अनुष्का.
अनुष्का.

ये वही अनुष्का शर्मा हैं न जिन्होंने दिसंबर 2012 में बोला था:
भले ही ये घटना दिल्ली में हुई है लेकिन इसका असर हम सब पर पड़ता है. भारत में महिलाओं की सुरक्षा हमेशा ही एक मुद्दा रहा है. लेकिन इस बार प्रतिक्रियाएं पैदा हुई हैं तो उम्मीद है इतने लंबे समय तक रहेंगी कि न्याय मिले. आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए. हम यहां पर इसके लिए लड़ रहे हैं. प्रमुख बात यह है कि हमें इस सिस्टम में जवाबदेही लानी होगी.
ये जवाबदेही कहां है अनुष्का?
तब तीन बरस पहले उन्होंने बहुत लंबे-लंबे पैरेग्राफ कहे थे. लेकिन कहीं कोई जवाबदेही नहीं है जी. बस, छवि बाहर कुछ और निर्मित है, अंदर कुछ और ही जीव है. ये तो ख़ुद फिल्म में बोलती हैं:

जब इंग्लिश नी आती तो उसकी मां-भेण क्यों कर रहा है?

ये मां-भेण क्या होती है अनुष्का? कैसे होती है? क्या ये संवाद दर्शक सुनेंगे तो वैसा समाज बनेगा जैसे समाज की कल्पना करने को आप दिसंबर 2012 में हमें बोल रही थीं:
एक औरत के तौर पर जानकर असुरक्षित सा लगता है कि रात को सड़कों पर नहीं निकल सकते. ये एक डरावना विचार है और अगर भारत को एक प्रगतिशील मुल्क के तौर पर दिखना है तो लोगों को सुनिश्चित करना होगा कि वे महिलाओं की इज्जत करें और पहले उन्हें उन्मुक्त रूप से जीने दें.
कैसे जीने दें? मां-भेण करके?
जब से शाहरुख-सलमान की दोस्ती हुई, सलमान के जीवन और फिल्मों के संवादों में शाहरुख लौट आए हैं.
https://twitter.com/iamsrk/status/748676004856532993
गुरुवार को शाहरुख से ही पूछा गया कि सलमान के रेप कमेंट पर क्या कहेंगे तो उनका जवाब था,
"पिछले कुछ वर्षों में मैंने खुद कई सारे अनुचित कमेंट किए हैं तो मैं कैसे बैठे-बैठे किसी और के कमेंट को जज कर सकता हूं. ये तो पक्ष लेने या न लेने की बात हो गई. मैं भी कई सारी बातें कहता हूं, तो हम कौन है तय करने वाले कि उन्हें (सलमान को) क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए?"
उसी शाम को ये शाहरुख अपने बेटे अयान और सलमान के साथ मुंबई की सड़कों पर साइकिल चलाने का आनंद ले रहे थे. मैं खुद भी अनुचित बोलता रहा हूं, बोलकर चतुराई से कट लिए.
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शाहरुख, सलमान, अयान. फोटो: मिलिंद शेल्टे

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अयान, शाहरुख, सलमान. फोटो: मिलिंद शेल्टे

इन्हीं शाहरुख ने दिल्ली रेप पीड़िता की मृत्यु के बाद कहा था:
हम तुम्हे बचा नहीं सके लेकिन तुम्हारी आवाज कितनी बड़ी है, ओ प्यारी साहसी बच्ची. तुम्हारी आवाज हमें कह रही है रेप उसी सेक्सुएलिटी में समाहित है जिसे हमारी संस्कृति और समाज ने परिभाषित किया है. मुझे बहुत खेद है कि मैं इस समाज और संस्कृति का हिस्सा हूं. मुझे बहुत खेद है कि मैं एक पुरुष हूं. मैं वायदा करता हूं मैं तुम्हारी आवाज के साथ-साथ लड़ूंगा. मैं औरतों की इज्जत करूंगा ताकि मैं अपनी बेटी का सम्मान हासिल कर सकूं.
इसके अलावा भी बहुत मौकों पर उन्होंने भयंकर दार्शनिक बातें कही हैं. इतनी कि उनसे दीक्षा ले ली जाए.
प्रियंका चोपड़ा की बड़ी तारीफ हो रही है कि उन्होंने सलमान के रेप कमेंट पर मीडिया के सवाल का बहुत स्मार्ट जवाब दिया. वो बोलीं हैं:

मीडिया के लिए और हम औरतों के लिए बहुत जरूरी है कि हम अपनी ताकत का इस्तेमाल भारत में रोज घटित हो रही असली समस्याओं पर बात करने में लगाएं न कि किसी विवाद को और आगे बढ़ाकर ताकि वो हैडलाइन बन जाए. ये अन्यायपूर्ण है. हाल ही में बिहार में एक brutal rape हो गया. उस पर कोई क्यों नहीं बात करता? सलमान मसले पर बहुत कुछ कहा जा चुका है और इस शोर में मैं कुछ नहीं जोड़ना चाहती.

वाकई स्मार्ट जवाब दिया. क्यों नहीं देंगी? पुराना प्रशिक्षण है.
https://www.youtube.com/watch?v=TpVW2UJjASc
लेकिन क्या फिल्मों में और ऐसे सितारे के इंटरव्यू में - जिससे कोई पंगा ले तो करियर खत्म हो जाए - की जाने वाली बातों का समाज में कोई असर नहीं होता. तो फिर प्रियंका UNICEF के बच्चे-बच्चियों की भलाई वाले अभियान की एंबेसेडर क्यों बनी हुई हैं?
तो फिर आपने दिसंबर 2012 में क्यों कहा कि:
ये बहुत डरावना है कि अपने ही देश में एक आत्मनिर्भर महिला हमला किए जाने के डर के बिना बस से सफर नहीं कर सकती. ये किसी महिला के खिलाफ क्राइम नहीं है, ये एक समाज के खिलाफ क्राइम है. महिलाओं को मर्यादित कपड़े पहनने चाहिए, मर्यादा से पेश आना चाहिए इस बारे में बहुत कुछ कहा जा रहा है. मुझे ये पूरा संवाद ही बहुत अजीब लगता है. एक महिला इसलिए नहीं रेप की जाती क्योंकि वो रात को देर तक बाहर है या शॉर्ट ड्रेस पहने हुए है या शराब पी रही है.. उसका रेप किया जाता है क्योंकि कोई उसका रेप कर रहा है!! इसके लिए कोई सफाई नहीं हो सकती!!
और भी बहुत लंबा चौड़ा बोला था, अब लिखा नहीं जाता.
हम डंब लोग नहीं हैं कि न जान पाएं, आपके कहने और करने में क्या फर्क है? आप लोग कैसे अपनी छवियों का इस्तेमाल धन अर्जन के लिए करते हैं लेकिन फिर समाज में किसी परोपकारी और किसी सामाजिक कार्यकर्ता जैसा सम्मान और ईमान भी हासिल करना चाहते हैं. लेकिन इस तरह से ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है. आप लोग तय कर लो कि महिलाओं को इज्जत देनी है कि नहीं? नाटक न करो.
सुल्तान में आरफा का परिचय करवाते हुए सलमान की आवाज बोलती है:

इस देस की जाण ना, इस देस की लेड्‌डीज हैं. बात कुछ अलग सी है इणकी. जितनी कोमल ये लाग्गे हैं ना, उससे कहीं ज्यादा ताकत इनके बाजुओं में है.

लेकिन रेप वाले संदर्भ, अंधी लड़की वाले संदर्भ और मां-भेण करने वाले संदर्भ से लेड्‌डीज़ के लिए इज्जत प्रकट नहीं होती है. सलमान की तो बड़ी चलती है. बॉलीवुड पूरा उन्हीं पर आश्रित है. उन्होंने सूरज पांचोली को और अथिया शेट्‌टी को लॉन्च करने वाली फिल्म हीरो में पूरा रचनात्मक हस्तक्षेप रखा था. सुल्तान में भी दो जगह संवादों को बदलवा देते. इनसे ज्यादा रोचक संवाद सामने आ सकते थे. वे भी रेप की हुई महिला जैसी हालत वाली टिप्पणी के बाद एक बार ट्विटर पर ही कुछ कह देते. या अपने पिता से कह देते कि ट्‌वीट कर दें, सलमान को खेद है, उनका वो मतलब नहीं था. ऐसा कुछ भी नहीं किया गया.
सुल्तान की शूटिंग के दौरान की फोटो.
सुल्तान की शूटिंग के दौरान की फोटो.

आप वही सलमान हैं जो 18 दिसंबर को दिल्ली में दबंग-2 के प्रचार के दौरान बोले थे:

मैंने हाल ही में एक खबर में पढ़ा कि एक लड़की से छेड़छाड़ हो रही थी और लोग किनारे खड़े अपने फोन से वीडियो बना रहे थे. ये असली भारत नहीं है. मुझे नहीं लगता कि ऐसी घटनाएं मेरे सामने कभी भी हो सकती हैं.

जिन मसलों पर बोलना सेफ है उस पर सब बोलते हैं. तन्मय भट्‌ट पर सबकी फौजों ने चढ़ाई कर दी थी. दिल्ली के रेपिस्ट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के थे, किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकते थे तो उन पर चढ़ाई कर दी. लेकिन मुंबई के एक बड़े उद्योगपति के बेटे द्वारा किसी को कार से कुचलने की खबर की सुगबुगाहट हुई (खबर अस्तित्व से ही मिटा दी गई) तो कोई कुछ न बोला.
मुंबई में एक भीमकाय कॉरपोरेट कंपनी की लीगल टीम की वाइस प्रेसिडेंट ने शराब के नशे में, रॉन्ग साइड से गाड़ी चलाते हुए एक परिवार की सही रास्ते आ रही गाड़ी को टक्कर मार दी, परिवार के मुखिया समेत दो को मार दिया, उस पर किसी ने ट्वीट नहीं किया.
ये रितेश देशमुख कहां थे जिन्होंने तन्मय भट्‌ट पर फतेह की थी जब उन्होंने सचिन-लता को अपने जोक में शामिल किया. उनका भी इरादा नहीं था वे कह-कह कर थक गए. यहां भी यही मान रहा है न पूरा बॉलीवुड की सलमान का वो इरादा नहीं था. तो तब क्या हुआ था?
कितनी ही बातें हैं. सलमान को हिट एंड रन केस में सजा सुनाई गई तो उनके घर सब पहुंचे. ट्टविटर पर, फेसबुक पर, टिप्पणियों के जरिए सब उनके साथ solidarity में थे. क्यों?
सभी मर्द स्टार्स से अनुरोध है, including लेड्‌डीज स्टार्स, अगर अपनी फिल्मों में नारी और समाज के हाशिये पर बैठे लोगों को ज़लील करते हैं और करते रहेंगे तो ठीक है, करें. आप अपने साथी सुपरस्टार के बुरे कामों पर मौन धारण करते हैं तो करें. आप देश के गंभीर और असुरक्षित कर देने वाले राजनीतिक मसलों पर कुछ नहीं बोलना चाहते, तो न बोलें. लेकिन फिर आप उन मसलों पर भी न बोलें को सेफ गेम हैं. फिर आप अलग-अलग कुछ मसलों के एंबेसेडर बनकर अपनी छवि समाज के लिए कुछ करने वाले की भी न बनाएं. फिर आप रेप की घटना पर भी ट्वीट करके सामाजिक चिंतक न बनें. किसी big happening पर ट्वीट करके माइलेज लेने की कोशिश भी न करें. खुद को नारीवादी न कहें. खुद को प्रगतिवादी न कहें. खुद को जागरूक न कहें. आप ये न कहें कि paparazzi आपकी निजता का हनन करते हैं, आपका पीछा करते हैं. मीडिया को ज्ञान न दें. देश के लोगों को ज्ञान न दें. अब आप चुप ही रहें और जैसी भी करनी है फिल्में करें. बाकी हम खुद ही देख लेंगे.
पिछले साल जब इन दोनों का भरत मिलाप हुआ था तो शाहरुख ने अपनी नई फिल्म का प्रचार उस शो के सेट पर किया था जिसे सलमान होस्ट करते हैं.
2015 में जब इन दोनों का भरत मिलाप हुआ तो शाहरुख अपनी नई फिल्म का प्रचार करने सलमान के शो पर पहुंचे थे.

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