'चीफ जस्टिस' रह चुका है तालिबान का नया मुखिया
तालिबान का नया चीफ धार्मिक ख्यालों वाला है. जानिए अखुंजादा के बारे में:
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फोटो - thelallantop
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मुल्ला उमर: DONE
मुल्ला अख्तर मंसूर: DONE
मावलावी हैबतुल्लाह अखुंदजादा: LOADING....
अमेरिका ने क्रमश: तालिबान के आका मुल्ला उमर, मुल्ला अख्तर मंसूर को मार गिराया है. अफगान तालिबान का नया चीफ हैबतुल्लाह अखुंदजादा आतंक फैलाने के लिए लोडिंग ले रहा है. तालिबान का चीफ अखुंदजादा आतंक की साजिश टाइप काम में लग गया है. अखुंदजादा ने गुरुवार दोपहरिया कहा, 'दुश्मनों के साथ आतंक जारी रहेगा. कोई शांति वार्ता नहीं होगी.'
अखुंदजादा ने कहा, 'हम मुल्ला उमर वाला दौर फिर वापस लाएंगे. काबुल में हुए आत्मघाती हमले में 10 लोगों की जान भी हमारी वजह से गई. अफगानिस्तानी सरकार से कोई शांति टाइप की बातचीत नहीं होगी.' ये हुई तालिबान के नए चीफ की अपॉइंटमेंट की खबर. अब जानिए अखुंदजादा के बारे में:
1. अखुंदजादा. नाम भारी है. पर मतलब होता है टीचर. जैसा नाम, कुछ-कुछ वैसा ही काम. धार्मिक स्कॉलर टाइप आदमी है.
2. 1996 से 2001 के बीच में जब अफगानिस्तान में तालिबान का शासन था. तब ये अखुंदजादा तालिबान के लिए जज का काम करता था. जज मतलब कोर्टरूम वाला जज नहीं, वो जज जो तालिबान की तरफ से फैसले लेता. मामलों का निपटारा करता.
3. लंगोटिए यार कांड करते हैं. पिछले आतंक के आका और करेंटली वर्किंग विद तालिबान अखुंदजादा भी कंधार का रहने वाला है. मुल्ला उमर और मुल्ला अख्तर मंसूर भी कंधार के रहने वाले थे. वहीं से तीनों की दोस्ती हुई. बारी-बारी से तालिबान के मुखिया बने. बारी-बारी से मरेंगे भी. अखुंदजादा नूरजई ट्राइब से बिलॉन्ग करते हैं.
4. तालिबान वालों की मानें तो अखुंदजादा की उम्र 47 साल है. कंधार प्रान्त के पंजवाई जिले का रहने वाला है.
5. 1979 से 1989 के दौरान सोवियत-अफगान वॉर हुई. अफगान सरकार और सोवियत वाले मिलके सरकार चला रहे थे. विद्रोहियों ने बगावत कर दी थी. तब जो विद्रोही हुए, उनकी अगुवाई करने वालों में अखुंदजादा भी शामिल था. पर ये दिमागी तौर पर तालिबान के साथ था. क्योंकि अखुंदजादा उस वक्त पाकिस्तान में था.
6. अखुंदजादा मुल्ला उमर का बेहद करीबी था. शुरुआती तालिबान का धार्मिक गुरु था. चीफ अखुंदजादा भले ही अब लाइमलाइट में आया है. इससे पहले भी ये अखुंदजादा मुल्ला मंसूर से ऊपर ही माना जाता था.
7. तालिबान मामलों के एक जानकार हैं. रहीमुल्लाह युसूफजई. बोले, 'तालिबान का नया चीफ कोई अनुभवी लड़ाका नहीं है. धार्मिक और कानूनी मामलों का जानकार है. मुल्ला मंसूर के बेहद करीबी रहा है. तो अंदाजा यही है कि मुल्ला उमर के सिखाए, बताए रास्ते पर आगे चलेगा.'

