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आदित्य धर की कहानी: क्रिकेटर बनने का सपना टूटा, तो देश की सबसे बड़ी फिल्म बना डाली

2016 में हुए उरी आतंकी हमले ने आदित्य धर को बेरोजगार कर दिया था. बाद में वही उनका लॉन्चपैड बना. पढ़िए 'धुरंधर' बनाने वाले शख्स की पूरी कहानी.

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26 मार्च 2026 (अपडेटेड: 27 मार्च 2026, 08:41 PM IST)
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आदित्य धर की तीन फिल्मों का टोटल कलेक्शन 2700 करोड़ रुपये से अधिक का है.
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Aditya Dhar. वो आदमी, जिसने हिंदी सिनेमा को उसकी सबसे बड़ी फिल्म दी. मगर उनकी कहानी, Dhurandhar या Dhurandhar 2 से कहीं बड़ी है. एक बच्चा, जिसे अक्षर समझ नहीं आते थे. उसे सिर्फ एक चीज़ समझ आती थी कि क्रिकेटर बनना है. उनका ये सपना पॉलिटिक्स की भेंट चढ़ गया. ये कहानी उस आदमी की है, जिसने दोबारा सपना देखना सीखा. 20 साल तक जीतोड़-अथक मेहनत करता रहा. दूसरे डायरेक्टर्स की फिल्मों के गाने लिखे, उन्हें असिस्ट किया. तमाम मुश्किलें झेलीं, ताकि अपने 'दूसरे सपने' को जी सके. सिग्मंड फ्रायड की एक बड़ी खूबसूरत लाइन है- 

“एक दिन वर्षों का संघर्ष, बहुत खूबसूरत तरीके से तुमसे टकराएगा”

ये लाइन आदित्य धर पर बिल्कुल सटीक बैठती है. आप उनकी फिल्मों की पॉलिटिक्स से सहमत-असहमत हो सकते हैं. कला का मक़सद ही उसे अपने-अपने तरीके से समझे जाने से है. मगर आदित्य के उस संघर्ष को खारिज नहीं कर सकते, जो यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने की है. आज हम उनकी वही कहानी जानने-समझने की कोशिश करेंगे.

# चैप्टर 1- अ बर्न्ट मेमरी  

आदित्य का जन्म 12 मार्च, 1983 को दिल्ली के एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था. उनकी मां डॉ सुनीता धर साल 2000 से 2003 तक दिल्ली यूनिवर्सिटी में फैकल्टी ऑफ म्यूजिक एंड फ़ाइन आर्ट्स की डीन रह चुकी हैं. वो ऐसी पहली कश्मीरी महिला थीं, जिन्होंने म्यूजिक में एमए और फिर डॉक्टरेट किया था. इसी वजह से आदित्य और उनके बड़े भाई लोकेश धर का लालन-पालन एक क्रिएटिव माहौल में हुआ. तब दिल्ली में उनके मकान का नंबर था- B62. वहीं उनके मां-बाप की शादी हुई. दोनों भाइयों का जन्म भी वहीं हुआ था. 

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आदित्य धर की मां डॉ सुनीता धर.

इसलिए आदित्य और लोकेश ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी का नाम B62 स्टूडियोज़ रखा. लोकेश पहले UTV मोशन पिक्चर्स और फॉक्स स्टार स्टूडियोज़ में काम कर चुके हैं. अपनी फिल्मों के लिए दूसरों के भरोसे न रहना पड़े, इसलिए साल 2021 में दोनों भाइयों ने B62 स्टूडियोज़ की शुरुआत की थी. इसके ज़रिए वो ‘आर्टिकल 370’, ‘बारामूला’, 'धूम-धाम' और ‘धुरंधर’ फ्रैंचाइज़ प्रोड्यूस कर चुके हैं.

# चैप्टर 2- द नोन मेन

आदित्य का घर साउथ दिल्ली में सपना और अलंकार थिएटर के पास पड़ता था. हर संडे को उनके मां-बाप दोनों बच्चों को वहां फिल्में दिखाने ले जाया करते थे. वहीं से उनमें सिनेमा का कीड़ा लगा. आदित्य जब दो साल के थे, तब उनकी मौसियां वीकेंड्स पर उनकी फैमिली के साथ समय बिताने आया करती थीं. वो तब कॉलेज में पढ़ती थीं और अक्सर आदित्य को भी अपने गर्ल्स हॉस्टल ले जातीं. उस दौर में एंटरटेनमेंट के लिए इंस्टाग्राम रील्स का चलन तो था नहीं. इसलिए लोग मैगजीन्स खरीदते थे. आदित्य बताते हैं कि वो उस उम्र में भी स्टारडस्ट और फिल्मफेयर मैगजीन्स में नज़र आने वाले सभी एक्टर्स को पहचान जाते थे.  

# चैप्टर 3- मुझे इंसाफ चाहिए 

एक दिन आदित्य अपनी मौसी के साथ लाजपत नगर शॉपिंग करने गए थे. उस समय वो 3 साल के रहे होंगे. तभी उनकी नज़र एक थिएटर के बाहर लगे पोस्टर पर पड़ी. उस पर मिथुन चक्रवर्ती और रेखा दिखाई दे रहे थे. मगर आदित्य को तब पढ़ना नहीं आता था. इसलिए उन्होंने अपनी मौसी से मूवी का टाइटल पूछा. मौसी ने कहा- 'मुझे इंसाफ चाहिए'. ये फिल्म का नाम था. बस, आदित्य ने उसे देखने की ज़िद पकड़ ली. बात घुमाने के लिए मौसी ने कहा कि वो उन्हें वीकेंड पर हॉल ले जाएंगी. मगर आदित्य माने नहीं. उन्होंने हाय-तौबा मचाना शुरू कर दिया और रोते-रोते वहीं सड़क पर पसर गए. तब तक आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई थी. जब उन्होंने पूछा कि ये बच्चा रो क्यों रहा है तो आदित्य कहने लगे- "मुझे इंसाफ चाहिए-मुझे इंसाफ चाहिए'.

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‘मुझे इंसाफ चाहिए’ के पोस्टर में मिथुन, रेखा और रति अग्निहोत्री.

# चैप्टर 4- लुसिफर  

आदित्य स्कूली दिनों में गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल, वसंत विहार (दिल्ली) में पढ़ते थे. मगर अपने साथ के बच्चों की तुलना में उन्हें लिखने-पढ़ने में दिक्कत होती था. वजह थी- डिस्लेक्सिया. डिस्लेक्सिया एक तरह का रीडिंग डिसऑर्डर है. इसमें बच्चों को पढ़ने, लिखने और अक्षरों को समझने में परेशानी होती है. वो अक्षरों को पहचान नहीं पाते हैं. अभिषेक बच्चन और ऋतिक रोशन को भी बचपन में ये समस्या थी. 'तारे ज़मीन पर' मूवी का ईशान अवस्थी को भी यही प्रॉब्लम थी. 

आदित्य धर खुद भी एक समय इससे काफी स्ट्रगल कर रहे थे. उन्हें आज भी कुछ पढ़ने में परेशानी होती है. 2019 में रॉबिन भट्ट के साथ स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन पर हुए इंटरव्यू में वो बताते हैं,

"मैं यहां तक पहुंच ही नहीं पाता. ये किसी चमत्कार से कम नहीं है. मुझे बहुत बुरा डिस्लेक्सिया था. इसलिए मैं पढ़ भी नहीं पाता था. आज भी अगर मुझे कुछ पढ़ना हो, तो दो-तीन पेज पढ़ने में पूरा दिन लग जाता है. मैं पढ़ने में कमज़ोर था. लेकिन मुझे ड्रामा और एक्टिंग में बहुत इंट्रेस्ट था."

# चैप्टर 5-  घोस्ट फ्रॉम द पास्ट

'धुरंधर' में मोहम्मद आलम नाम का एक सोडावाला नज़र आता है. वही- 'डार्लिंग-डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा, पी लो-पी लो आलम सोडा' वाले. फिल्म में उनका कैरेक्टर प्ले करने वाले गौरव गेरा और आदित्य, ‘धुरंधर’ से पहले भी साथ काम कर चुके हैं. वो भी बल्कि 30 साल पहले. हुआ ये कि आदित्य स्कूल में पढ़ नहीं पा रहे थे. तंग आकर उन्होंने अपना फोकस नाटक पर शिफ्ट कर दिया. उन्होंने दिल्ली म्यूजिक थिएटर (DMT) जॉइन किया. वहीं वो पहली बार गौरव गेरा से मिले. दोनों ने DMT के प्रोडक्शन तले बने 'वेस्ट साइड स्टोरी' में साथ काम किया था. ये साल 1995 के आसपास की बात रही होगी. तब गौरव 23 साल के थे और आदित्य केवल 12 के. गौरव 1998 में मुंबई आ गए थे. लेकिन आदित्य ने करीब 20 साल तक DMT में काम किया. लगभग तीन दशक बाद जब गौरव 'धुरंधर' के सेट पर आए, तो आदित्य वहां सबको पहले ही ये बता चुके थे कि गौरव उनके सीनियर हैं.

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‘धुरंधर’ के दौरान आदित्य धर और गौरव गेरा.

# चैप्टर 6- मन अटकेया बेपरवाह दे नाल!  

आदित्य ने अपना ग्रैजुएशन दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज से किया. तब भी उनका जी पढ़ाई छोड़कर, हर दूसरी चीज़ में लगता था. कॉलेज के दिनों में उन्हें क्रिकेट खेलने का चस्का था. डायरेक्टर प्रियदर्शन ने मैशेबल इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताया था कि आदित्य दिल्ली यूनिवर्सिटी के सबसे बेहतरीन स्पिन बोलर्स में से एक थे. दावा ये भी किया जाता है कि वो साल 2002 में भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम में सिलेक्ट होने वाले थे. अगर ऐसा होता तो वो पार्थिव पटेल, इरफान पठान और स्टुअर्ट बिन्नी के साथ खेल चुके होते. मगर इंटरनल पॉलिटिक्स के कारण आदित्य फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सके. इंटरनेट पर ऐसी भी खबरें चल रही हैं कि उन्हें रिप्लेस करने वाले क्रिकेटर कोई और नहीं, बल्कि स्टुअर्ट बिन्नी थे. स्टुअर्ट, वेटरन इंडियन क्रिकेटर रॉजर बिन्नी के बेटे हैं. बीसीसीआई सिलेक्टर्स के आदित्य को ठुकराने के फैसले का उन्हें सिनेमा की तरफ़ ढकेलने में बड़ी भूमिका रही. लेकिन इस दावे पर आदित्य ने कभी कुछ नहीं बताया.

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आदित्य धर की क्रिकेट खेलत्ते हुए तस्वीर.

# चैप्टर 7- द डेविल्स गार्डियन

05 सितंबर, 2006. आदित्य आज भी इस डेट को भूले नहीं हैं. 20 साल पहले इसी दिन उन्होंने मुंबई में पहली बार कदम रखा था. लाखों अन्य लोगों की तरह उनके भी ढेरों सपने थे. मगर दूसरी तरफ़ वो हर अनहोनी के लिए तैयार बैठे थे. उन्हें शुरू से पता था कि सक्सेस का कोई शॉर्टकट नहीं है. इसलिए उनके सामने जो काम आया, वो करते चले गए. शुरुआत उन्होंने रेडियो जॉकी के काम से की थी.

आदित्य को मुंबई लाने में प्रियदर्शन की 'गर्दिश' का भी बड़ा हाथ था. दिल्ली में जब वो क्रिकेट पॉलिटिक्स से धोखा खाकर घर पर बैठे थे, तब किसी ने उन्हें ये फिल्म सजेस्ट की थी. इसमें जैकी श्रॉफ ने एक ऐसे शख्स का रोल किया था, जो पुलिस बनने की तैयारी कर रहा था. लेकिन उसके पिता पर हुआ एक अटैक उसे जुर्म की दुनिया में ले आता है. समय के साथ जैकी फिल्म में एक अंडरवर्ल्ड डॉन बन जाते हैं. यदि आप गौर करें तो आदित्य ने 'धुरंधर' का बेसिक प्लॉटलाइन भी कुछ ऐसा ही रखा है. 'गर्दिश' ने ही आदित्य को फिल्ममेकिंग करने को मोटिवेट किया था. प्रियदर्शन ने एक इंटरव्यू में बताया,

"मुझे बहुत गर्व होता है जब आदित्य धर जैसे टैलेंटेड फिल्ममेकर ये कहते हैं कि वो मुझसे प्रेरित हुए. मैं ये दावा नहीं करता कि मैंने बहुत महान फिल्में बनाई हैं. मैंने अजीब फिल्में बनाई हैं मगर ऐसी भी बनाई हैं, जिसने आदित्य जैसे फिल्ममेकर को इन्सपायर किया."

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''गर्दिश' ने आदित्य धर को फिल्ममेकर बनने के लिए मोटिवेट किया.

# चैप्टर 8- डेस्टिनी  

आदित्य को इतना समझ आ चुका था कि रेडियो जॉकी की नौकरी करते हुए वो फिल्ममेकर तो नहीं बन पाएंगे. इसलिए उन्होंने थोड़े पैसे बचाए और एक दिन वो जॉब छोड़ दी. नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने पहले दिन से ही काम की तलाश शुरू कर दी. वो हर सुबह उठते. हाथ-मुंह धोते. फिर अलग-अलग प्रोडक्शन हाउस जाते. काम तो मिल नहीं रहा था, ऊपर से आदित्य की सेविंग्स भी खत्म होने लगीं. वो बताते हैं कि उन दिनों अधिकतर प्रोडक्शन हाउस उन जैसे स्ट्रगलर्स को पानी तक नहीं पूछते थे. इस वजह से उन्हें काफी निराशा होती थी. 

एक दिन वो मुंबई के सैंटाक्रूज़ इलाके में थे. तभी किसी ने उन्हें बताया कि GS एंटरटेनमेंट नाम की कंपनी में एक आदमी की ज़रूरत है. थके-हारे आदित्य जब वहां पहुंचे, तो उन्हें काम देने से साफ़ मना कर दिया गया. वो वहां से निकल ही रहे थे कि पास में विधु विनोद चोपड़ा का प्रोडक्शन हाउस दिखाई दिया. आदित्य पहले ही अनगिनत जगहों पर थक चुके थे. इसलिए उन्होंने सोचा कि एक और जगह सही. यही सोचकर वो वो उस प्रोडक्शन हाउस में गए और रिसेप्शन पर जाकर नौकरी मांगने लगे. तंगी ऐसी थी कि वो इंटर्न वाला काम भी करने को तैयार थे.

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‘एकलव्य: द रॉयल गार्ड’ में अमिताभ बच्चन और संजय दत्त.

उनकी जिद्द देखकर रिसेप्शनिस्ट ने उन्हें असिस्टेंट डायरेक्ट मिथुन गंगोपाध्याय के पास भेजा. मिथुन ने विधु विनोद चोपड़ा को साल भर पहले ही जॉइन किया था. वो अमिताभ बच्चन की 'एकलव्य: द रॉयल गार्ड' मूवी में असिस्ट कर चुके हैं. जब आदित्य उनसे मिले, तब वो संभवत: इसी फिल्म पर काम कर रहे थे. आदित्य ने मिथुन से पूछा कि क्या उनके पास कोई नौकरी है? इत्तेफ़ाक से वहां काम कर रहे एक असिस्टेंट डायरेक्टर को एक फिल्म स्कूल में एडमिशन मिल गया था. इसलिए वो अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर निकलने की तैयारी में था. उसकी जगह किसी नए आदमी की ज़रूरत थी. 

बस, आदित्य ने अपनी दावेदारी ठोक दी. बाद में उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान इसे किस्मत का खेल बताया. उनका मानना है कि वो लक के कारण सही समय पर सही जगह पहुंच गए थे. वरना वो नौकरी भी हाथ से जाने वाली थी. जो भी हो, आदित्य ने विधु विनोद चोपड़ा के यहां बतौर असिस्टेंट अपने करियर की शुरुआत की. 2006 में विधु, अमिताभ और संजय दत्त की 'एकलव्य' डायरेक्ट कर रहे थे. आदित्य ने इसमें उन्हें असिस्ट किया था. लेकिन इसका क्रेडिट उन्हें कभी नहीं मिला. आगे चलकर आदित्य ने संजय दत्त को ‘धुरंधर’ में डायरेक्ट किया.

# चैप्टर 9- 

उन दिनों असिस्टेंट डायरेक्टर्स को बेहद कम पगार मिला करती थी. इसलिए आदित्य बड़ी मुफलिसी में अपना गुज़ारा कर रहे थे. धीरे-धीरे उन्हें समझ आया कि इस काम से पेट और घर नहीं चलने वाला. इसलिए उन्होंने बतौर लिरिक्स और डायलॉग राइटर अपने पैर पसारने शुरू कर दिए. इस कड़ी में उनके हाथ लगी कबीर खान की 'काबुल एक्सप्रेस'. इस मूवी में अरशद वारसी और जॉन अब्राहम लीड रोल्स में थे. फिल्म का म्यूजिक राघव सचर ने दिया था. इस फिल्म के सभी गाने आदित्य धर ने लिखे. इस फिल्म में उन्हें लिरिक्स राइटर का क्रेडिट मिला. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनका ये पहले क्रेडिट था. बाद में उन्होंने सुनील शेट्टी-जावेद जाफरी स्टारर 'डैडी कूल' के गानों के भी बोल लिखे.  

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‘काबुल एक्सप्रेस’ के सभी गाने आदित्य धर ने लिखे हैं.

# चैप्टर 10- राउंड रॉबिन

'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' से पहले आदित्य एक और नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म की कहानी लिख चुके थे. उन्होंने 2009 में 'दृश्यम 2' के डायरेक्टर अभिषेक पाठक के साथ 'बूंद' नाम की शॉर्ट फिल्म लिखी थी. वो उस फिल्म के डायलॉग राइटर और को-डायरेक्टर भी थे. पानी की तंगी पर बनी ‘बूंद’ ने राइटर-प्रोड्यूसर रॉबिन भट्ट को काफी इंप्रेस किया था. आदित्य, रॉबिन को अपना मेंटर बताते हैं. इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि रॉबिन ही वो शख्स थे, जिन्होंने 'बूंद' देखने के बाद प्रियदर्शन से आदित्य की सिफारिश की थी. प्रियदर्शन ने बाद में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि आदित्य की सबसे बड़ी ताकत उनकी भाषा है. उसकी मदद से वो अच्छी कहानी कह सकते हैं. 2009 में प्रियदर्शन के पास आने से पहले तक उन्होंने जिन प्रोजेक्ट्स पर काम किया था, उनमें से ज्यादातर में उन्हें क्रेडिट नहीं दिया गया था. इसलिए वो खुद को साबित करना चाहते थे.

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‘बूंद’ शॉर्ट फिल्म का एक सीन.

आदित्य अगले तीन सालों तक प्रियदर्शन के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर की हैसियत से काम करते रहे. इस दौरान उन्होंने 'आक्रोश' और 'तेज़' के लिए डायलॉग्स लिखे. 'तेज़' तो पिट गई. मगर 'आक्रोश' की सोशल कमेंट्री को लोगों ने पसंद किया. फिल्म में अजय देवगन के अलावा अक्षय खन्ना भी थे. वही अक्षय खन्ना, जिन्होंने सालों बाद आदित्य धर की ‘धुरंधर’ में रहमान डकैत का रोल किया.

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आदित्य धर ने ‘आक्रोश’ के डायलॉग्स लिखे हैं.

# चैप्टर 11- ट्रायल बाय फायर 

प्रियदर्शन को असिस्ट करने के दौरान आदित्य को थोड़ा-बहुत सीरियस काम मिलने लगा था. मगर वो ऐसा नहीं था कि जिसे नोटिस किया जा सके. आदित्य बताते हैं कि 2009 में पहली बार ऐसा मौका आया था, जब उन्हें एक फिल्म डायरेक्ट करने का मौका मिला. मगर वो मूवी शुरू होने से पहले ही बंद हो गई. फिर वो विशाल भारद्वाज के साथ काम करने वाले थे. मगर उस मूवी पर बात नहीं बन पाई. हर बार किसी-न-किसी बाहरी कारण से उनका काम फंस जाता था. 2013 में भी उन्हें फिल्म डायरेक्शन का मौका मिला था. मगर तब भी मामला जमा नहीं. एकाध बार तो उनकी मूवी को शूटिंग शुरू होने से 15 दिन पहले भी बंद कर दिया गया. आदित्य बताते हैं,

"स्ट्रगल के दिनों में कुछ मौके ऐसे भी आए, जब मेरी लिखी स्क्रिप्ट लोगों ने चुरा ली. बाद में उन पर 100-100 करोड़ की फिल्में बना दी गईं."

हालांकि उन्होंने नाम नहीं बताया कि वो कौन सी फिल्में थीं.

# चैप्टर 12- द बटरफ्लाय इफेक्ट

साल 2016 में आदित्य अपनी पहली मूवी डायरेक्ट करने के बहुत करीब पहुंच गए थे. 'रात बाकी' नाम की उस फिल्म को करण जौहर की धर्मा प्रोडक्शंस प्रोड्यूस कर रही थी. कटरीना कैफ उसमें लीड रो कर रही थीं. पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान भी फिल्म का हिस्सा थे. 2016 के अंतिम महीने में फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली थी. मगर सितंबर में पाकिस्तानी आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के उरी बेस कैंप पर हमला कर दिया. उस अटैक में हमारे 19 जवान शहीद हो गए थे.

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फवाद खान की कास्टिंग के कारण फंस गई ‘रात बाकी’.

इस बात ने देशभर में लोगों का गुस्सा भड़का दिया. जिसके बाद हिंदुस्तान में पाकिस्तानी आर्टिस्ट्स के काम करने पर बैन लग गया. लोगों ने धर्मा के ऑफिस पर पत्थर बरसाए और कहा कि वो पाकिस्तानी एक्टर्स वाली 'ऐ दिल है मुश्किल' और 'रात बाकी' को बंद करें. 'ऐ दिल है मुश्किल' तब तक बन चुकी थी. इसलिए सारी मार आदित्य की 'रात बाकी' पर पड़ी. करण जौहर ने तब एक वीडियो मैसेज रिलीज़ करके कह दिया कि वो पाकिस्तानी एक्टर्स के साथ अब कभी काम नहीं करेंगे. इस बात ने ‘रात बाकी’ को बुरा फंसा दिया. साथ ही इंडस्ट्री में ये हवा उड़ा दी कि आदित्य ‘मनहूस’ हैं. वो जिस प्रोजेक्ट से जुड़ते हैं, वो बंद हो जाता है.  

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‘धूम-धाम’ फिल्म ‘रात बाकी’ की स्क्रिप्ट से बनी है.

अच्छी बात ये है कि आदित्य ने 'रात बाकी' की उस कहानी का साथ कभी नहीं छोड़ा. 2025 में उन्होंने उस स्क्रिप्ट पर मॉडर्न जमाने के हिसाब से बदलाव किया और एक नई फिल्म बना दी. फिल्म का नाम रखा- 'धूम धाम'. इसमें यामी गौतम और प्रतीक गांधी ने काम किया. नेटफ्लिक्स पर आई इस फिल्म को आदित्य ने लिखा और प्रोड्यूस किया था.

# चैप्टर 13- द प्राइस ऑफ पीस  

उरी हमले के बाद आदित्य पूरी तरह बेरोज़गार हो चुके थे. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या करें. इस बीच 29 सितंबर, 2016 को इंडियन आर्मी ने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक कर दी. ऐसे में उनका फोकस भी इस ऑपरेशन पर शिफ्ट हो गया. धर्मा के ऑफिस में बाकी लोग इस चिंता में थे कि 'रात बाकी' की री-कास्टिंग कैसे की जाए. मगर आदित्य को अपना नया मक़सद मिल चुका था. वो ये जानना चाहते थे कि भारत ने ये सर्जिकल स्ट्राइक की कैसे है. धीरे-धीरे वो आर्मी ऑफिसर्स और सरकारी ऑफिसर्स से मिले. मगर सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी इतनी खुफिया थी कि कोई मुंह खोलने को तैयार ही नहीं था. भागा-दौड़ी में आदित्य की सेविंग्स फिर से खत्म होनी लगीं. 

# चैप्टर 14- द जिन

हालांकि आदित्य ठान चुके थे कि उनकी पहली मूवी अब सर्जिकल स्ट्राइक पर ही होगी. 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' की रिसर्च के दौरान आदित्य की राधिका नाम से एक असिस्टेंट हुआ करती थी. मगर वो उन्हें भी सैलेरी नहीं दे पा रहे थे. उन्होंने राधिका से बस इतना वादा किया कि जब उनकी फिल्म बन जाएगी, तो सबसे पहले वो उनके पैसे ही चुकाएंगे. इस वादे के साथ वो फिल्म की रिसर्च में लग गए. तभी उन्हें एक ऐसी जानकारी मिली, जिससे उनका सपना चूर-चूर हो सकता था. पता चला कि उनके अलावा 12 और प्रोड्यूसर्स ने भी इंडियन आर्मी से सर्जिकल स्ट्राइक पर मूवी बनाने के लिए कॉन्टैक्ट किया है. उन्हें लगा कि उनकी साल भर की रिसर्च फिर बर्बाद होने वाली है. घबराहट में आदित्य ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. रिसर्च मटीरियल तो उनके पास था ही. बस धड़ाधड़ उन्होंने फिल्म का पूरा स्क्रीनप्ले लिख डाला. ऐसा करने में उन्होंने केवल 12 दिनों का समय लिया. तब वो खुद प्रोडक्शन में नहीं उतरे थे. इसलिए उन्हें जल्द-से-जल्द एक शख्स की ज़रूरत थी, जो उनकी फिल्म पर पैसे लगा सके.

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रॉनी स्क्रूवाला.

किसी तरह उन्होंने अपनी स्क्रिप्ट RSVP मूवीज़ के रॉनी स्क्रूवाला तक पहुंचाई. रॉनी तब कहीं बाहर जाने के लिए फ्लाइट ले रहे थे. इसलिए वो स्क्रिप्ट पढ़ने में आनाकानी करने लगे. वो आमतौर पर कहानियां पढ़ने के लिए 25-30 दिन का समय लेते हैं. मगर आसपास के दबाव के कारण उन्होंने फ्लाइट में ही 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' की कहानी पढ़ डाली. जब तक उनकी फ्लाइट लैंड हुई, वो फिल्म प्रोड्यूस करने का मन बना चुके थे. इससे आर्मी से कॉन्टैक्ट करने में आसानी हो गई. बाकी 12 प्रोड्यूसर्स इस फिराक में थे कि उन्हें पहले फिल्म के राइट्स मिल जाएं, फिर वो उसकी कहानी लिखेंगे. लेकिन आदित्य पहले ही पूरी स्क्रिप्ट लिखकर तैयारी से पहुंचे थे. इस बात ने आर्मी ऑफिसर्स को काफी इंप्रेस किया. जिसके बाद आदित्य को 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' पर फिल्म बनाने की परमिशन मिल गई.  

# चैप्टर 15- रन डाउन द सिटी

रॉनी स्क्रूवाला फिल्म प्रोड्यूस करने को तैयार तो हो गए, मगर उसका बजट लिमिटेड था. ऐसे में आदित्य ने इसे केवल 25-30 करोड़ रुपये में बना दिया. फिल्म का एक बड़ा हिस्सा सर्बिया में शूट हुआ था. ऐसा करने के पीछे कुछ बड़े कारण थे. एक तो सर्बिया कश्मीर से काफ़ी मिलता-जुलता है. दूसरा, वहां भारतीय फिल्मों को शूटिंग के लिए 25 परसेंट का टैक्स रिबेट मिलता है. तीसरा, फिल्म के लिए आदित्य को जो हथियार चाहिए थे, वो वहां आसानी से उपलब्ध थे. इन सबका ध्यान रख उन्होंने मूवी शूट की और केवल 49 दिनों में सारा काम निपटा लिया.

साल 2019 में फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई. यानी आदित्य को अपनी पहली मूवी के लिए 10 साल तक इंतज़ार करना पड़ा. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही. 340 करोड़ रुपए से ज़्यादा का बिजनेस किया. साथ ही आदित्य को अपनी पहली ही फिल्म में बेस्ट डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड भी मिला. उनके अलावा शाश्वत सचदेव को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर, विकी कौशल को बेस्ट एक्टर और फिल्म को बेस्ट ऑडियोग्राफी का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था.

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आदित्य धर को ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ के लिए बेस्ट डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला.

#  चैप्टर 16- बुलेट्स एंड रोजेज़

'धुरंधर' और 'धुरंधर 2' को पाकिस्तान समेत गल्फ देशों में बैन कर दिया है. मगर आदित्य के लिए ये कोई नई बात नहीं है. इससे पहले उनकी 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' भी वहां रिलीज़ नहीं हो पाई थी. 'धुरंधर' की तरह उसे भी 'एंटी पाकिस्तान' कहा गया था. इससे फिल्म को काफी बड़ा नुकसान ज़रूर हुआ. इस पर आदित्य ने दो टूक जवाब देते हुए कहा,

"मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. अगर पाकिस्तानी फैंस एक बार हम पर भरोसा करके ये फिल्म देखते हैं, तो उन्हें भी समझ आ जाएगा कि इसमें पाकिस्तानी जनता के खिलाफ़ किसी ने कुछ नहीं बोला है. जो भी बोला गया है, वो आतंकवाद के खिलाफ़ बोला गया है. अगर वो ये समझ जाएं कि हम आतंकवाद से लड़ रहे हैं, हम कहीं की जनता या किसी खास व्यक्ति के खिलाफ़ नहीं हैं, तो मुझे लगता है कि उन्हें भी ये फिल्म बहुत पसंद आएगी. मैं इस बात से खुश नहीं कि फिल्म पाकिस्तान में रिलीज़ नहीं हो पा रही है. लेकिन मैं इतना ज़रूर कहूंगा कि आप दुनिया में हर किसी की गलतफ़हमी को दूर नहीं कर सकते."

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‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ भी पाकिस्तान में रिलीज़ नहीं हुई थी. 

# चैप्टर 17- आप क्रोनोलॉजी समझिए!

'धुरंधर' की रिलीज़ के बाद आदित्य पर दोबारा मोदी सरकार के लिए प्रोपगैंडा करने के आरोप लग रहे हैं. ‘दोबारा’ इसलिए क्योंकि इससे पहले उन पर 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' के दौरान भी ऐसे एलिगेशन लगे थे. दरअसल, वो फिल्म जनवरी 2019 में रिलीज़ हुई थी और अप्रैल से लोकसभा चुनाव शुरू होने थे. इसलिए लोगों ने आरोप लगाया कि आदित्य अपनी फिल्म को जानते-बूझते ऐसे समय पर रिलीज़ कर रहे हैं, जिससे भाजपा को उसका फायदा पहुंचे. राजीव मसंद के साथ हुए इंटरव्यू में आदित्य इस पर जवाब देते हैं,

"दो बातें हैं. पहली ये कि फिल्म की रिलीज़ डेट प्रोड्यूसर तय करते हैं. वो भी फिल्म के बिजनेस को ध्यान में रखकर, न कि इलेक्शन या किसी पार्टी को देखकर. दूसरी बात ये कि जब आप मेरी फिल्म को खुद देखते हैं, तो वो प्रोपगैंडा नहीं बल्कि एक संतुलित फिल्म निकलती है. मैंने आपको क्रोनोलॉजिकल ढंग से ये बता दिया कि उरी हमले के उन 11 दिनों में क्या हुआ था. अब सर्जिकल स्ट्राइक करने का फैसला मौजूदा सरकार ने लिया तो मैं उसे कैसे झुठला दूं? मुझे उसे दिखाना ही पड़ेगा क्योंकि वो फैसला मोदी सरकार ने ही लिया था. मैंने अपनी तरफ़ से एक बैलेंस्ड फिल्म बनाकर दी है. फिर भी अगर किसी को लगे कि ये प्रोपगैंडा है तो ये उनके दिमाग की उपज है."

# चैप्टर 18- हम प्यार करने वाले

आदित्य और यामी गौतम 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' के सेट पर एक-दूसरे से मिले थे. यामी ने मूवी में एक इंडियन एजेंट का रोल किया था. फिल्म प्रमोशन के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आए. 2021 में कोविड के दौरान पूरी दुनिया अपने-अपने घरों में कैद हो चुकी थी. ऐसे में आदित्य और यामी ने सोचा कि ब्रेक का इस्तेमाल कर क्यों न शादी ही कर ली जाए. दोनों सेलिब्रिटी हैं और हमें सेलिब्रिटीज़ को बिग फैट शादी करते देखने की आदत है. मगर यामी और आदित्य ने बिल्कुल सिंपल शादी की. दरअसल, आदित्य शुरुआत से ही दोनों तरफ़ के परिवार वालों को किसी तरह का फाइनेंशियल बोझ नहीं डालना चाहते थे. इसलिए वो साधारण तरीके से शादी करने के पक्ष में थे. उनकी शादी में कुल 15 लोग शामिल हुए. दोनों परिवारों से छह-छह लोग. और दुल्हा-दुल्हन, पंडित.  

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आदित्य धर-यामी गौतम ने हिमाचल में शादी की थी.

# चैप्टर 19- मैं और तू

आदित्य 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' के बाद अपने भाई लोकेश के पास यूएस जा रहे थे. अभी-अभी उन्होंने एक ब्लॉकबस्टर मूवी डिलीवर की थी. इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका में उनकी खूब खातिरदारी की जाएगी. हुआ इसके ठीक उलट. खातिरदारी तो छोड़िए, लोकेश ने आदित्य को पानी तक नहीं पूछा. उन्होंने अपने ड्रॉइंग रूम के फर्श पर एक गद्दा बिछाया. फिर आदित्य की तरफ़ घूमे और कहा- "अब तुम यही सोओगे और यहीं बैठकर अश्वत्थामा की स्क्रिप्ट लिखोगे." हर सुबह आदित्य उठते, तैयार होते और अपनी स्क्रिप्ट लिखते. अगले छह महीनों तक लोकेश ने आदित्य को ज़मीन पर ही सुलाया. ऐसा इसलिए क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' की सक्सेस आदित्य के सिर चढ़े.

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लोकेश धर के साथ आदित्य धर.

# चैप्टर 20- ET TU BRUTUS

'द इम्मोर्टल अश्वत्थामा' आदित्य धर का ड्रीम प्रोजेक्ट है. वो 2019 के बाद ही इस पर तन-मन से जुट गए थे. 'महाभारत' से प्रेरित इस हाइटेक मॉडर्न सुपरहीरो फिल्म में विकी कौशल लीड रोल करने वाले थे. 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' की तरह इसे भी रॉनी स्क्रूवाला की RSVP मूवीज़ प्रोड्यूस कर रही थी. 11 जनवरी, 2021 को आदित्य ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्टर डालकर फिल्म अनाउंस कर दी. दूसरी तरफ़ विकी ने अपने कैरेक्टर में ढलने के लिए फिजिकल ट्रेनिंग शुरू कर दी. ‘अश्वत्थामा’ प्रोजेक्ट को भारतीय सिनेमा के 'नेक्स्ट बिग थिंग' की तरह देखा जाने लगा. मगर फिर अचानक पूरा मामला ठंडा पड़ गया.

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'द इम्मॉर्टल अश्वत्थामा' का अनाउंसमेंट पोस्टर.

खबर आई कि रॉनी स्क्रूवाला ने फिल्म के भारी-भरकम बजट को फंड करने से मना कर दिया है. ऐसे में आदित्य पैसों के लिए जियो स्टूडियोज़ के पास पहुंचे. वो भी इसके लिए मानने को तैयार नहीं थे. अफ़वाह उड़ी कि मेकर्स विकी कौशल को लीडिंग रोल से हटाना चाहते थे. क्योंकि विकी का स्टारडम और मार्केट वैल्यू इतना नहीं था, जिस पर इतना बड़ा दांव लगाया जा सके. तमाम जुगत के बावजूद ये फिल्म शेल्व हो गई.   

 # चैप्टर 21- द रिवेंज 

जुलाई 2024 में छह लोगों की तस्वीरों वाला एक ब्लैक एंड वाइट कोलाज इंटरनेट पर वायरल हो गया. ये छह लोग थे रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर माधवन, अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल और आदित्य धर. इस कास्ट को देखते ही लोग समझ गए कि आदित्य कुछ तो खिचड़ी पका रहे हैं. उन्होंने फैंस से वादा किया था कि वो सिनेमा को बदलकर रख देंगे. आज डेढ़ साल बाद 'धुरंधर' फ्रैंचाइज़ के रूप में लोगों ने उस वादे को पूरा होते देखा. 

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2024 में रिलीज़ किया गया ‘धुरंधर’ का अनाउंसमेंट पोस्टर.

आदित्य ने इस फ्रैंचाइज़ को अपनी B62 स्टूडियो और जियो स्टूडियोज़ की पार्टनरशिप से बनाया है. पूरे प्रोजेक्ट का प्रोडक्शन कॉस्ट 280 से 300 करोड़ रुपये के आसपास रहा था. बताया जा रहा है कि फिल्म अपनी तय लागत से ज्यादा महंगी बन गई थी. ऐसे में रणवीर और आदित्य ने सारा एक्स्ट्रा खर्च अपनी जेब से दिया. इस प्रोजेक्ट को लेकर बहुत सारी बातें सामने आईं. कहा गया कि मेकर्स इस कहानी को वेब सीरीज के तौर पर बनाना चाहते थे. इसलिए इसे चैप्टर्स में तोड़ा गया. इसलिए मेकर्स के पास 8 घंटे की फुटेज थी. मगर ऐन वक्त पर इस कहानी को फिल्म के तौर पर बनाने का आइडिया पारित हुआ. जिसे तमाम डिस्कशन के बाद मंजूरी मिल गई. मगर 8 घंटे की फिल्म रिलीज़ नहीं हो सकती थी. इसिलए उन्हें इसे दो पार्ट में तोड़कर रिलीज़ करना पड़ा. अनजाने में लिया गया ये फैसला उन्हें हद से ज्यादा फायदा देकर गया.

दिसंबर 2025 में रिलीज़ हुए पहले पार्ट ने बॉक्स ऑफिस पर 1300 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन किया. इंटरनेट ‘धुरंधर’मय हो गया. लोग मीम्स बनाकर आदित्य धर और उनकी पीक डिटेलिंग की तारीफ़ करने लगे. लगे हाथ उन्होंने अनाउंस किया कि वो सेकेंड पार्ट तीन महीने बाद यानी 19 मार्च को रिलीज़ करेंगे. इतना कहना भर था कि सलमान खान, अजय देवगन, अक्षय कुमार, राम चरण, नानी समेत आधा दर्जन अन्य एक्टर्स अपनी फिल्मों की डेट महीने-दो महीने पोस्टपोन करने लगे. हॉलीवुड फिल्म ‘प्रोजेक्ट हेल मैरी’ भी भारत में हफ़्ते भर के लिए टाल दी गई. हर तरफ़ ‘धुरंधर 2’ भयंकर मांग थी. इतनी कि मेकर्स ने 18 मार्च को ही फिल्म का पेड प्रिव्यू रख दिया. अडवांस बुकिंग में मूवी ने 200 करोड़ रुपये की टिकटें बेच डाली थीं. वीकेंड खत्म होने तक ये लगभग 700 करोड़ रुपये कमा चुकी थी. यही नहीं, रिलीज़ के सात दिनों के भीतर ही इसने एक हजार करोड़ रुपये का बिजनेस कर लिया है. सिनेमा के बड़े-बड़े रिकॉर्ड्स भी अब ‘धुरंधर 2’ के नाम हैं.

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शूटिंग के दौरान आदित्य धर और ‘धुरंधर’ की स्टारकास्ट.

# चैप्टर 22- धुरंधर 

डायरेक्टर प्रियदर्शन, आदित्य को अपना सबसे अच्छा स्टूडेंट बताते हैं. वो 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' की रिलीज़ के बाद कॉल पर आदित्य को बधाई देते हुए इमोशनल हो गए थे. 'धुरंधर 2' की रिलीज़ से पहले भी प्रियदर्शन ने इंस्टाग्राम पर एक पुरानी तस्वीर के ज़रिए उन्हें अपना शुभकामनाएं भेजीं.

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प्रियदर्शन ने आदित्य धर के साथ अपनी पुरानी तस्वीर शेयर की.

आदित्य भी इन बातों की रिस्पेक्ट करते हैं. 'धुरंधर' का ट्रेलर भी उन्होंने बाकी दुनिया से पहले प्रियदर्शन को ही दिखाया था. वो उनके सेट पर अपनी फिल्म के लिए फीडबैक मांगने गए थे. प्रियदर्शन कहते हैं कि जब लोग आदित्य के काम की तारीफ़ करते हैं, तो उन्हें एक पिता की तरह की खुशी महसूस होती है. वो बताते हैं कि आदित्य ऐसी तगड़ी सक्सेस के बाद भी बिल्कुल नहीं बदले हैं. वेटरन एक्टर राकेश बेदी भी प्रियदर्शन की इस बात से इत्तेफ़ाक रखते हैं. उनके मुताबिक, 'धुरंधर' की रिलीज़ के बाद जब पूरा देश आदित्य की तारीफ़ कर रहा था, वो हिमाचल के किसी सुदूर इलाके में अपने परिवार के साथ सुस्ताने चले गए थे. 

वीडियो: रजनीकांत ने 'धुरंधर 2' को बताया 'बॉक्स ऑफिस का बाप', आदित्य धर ने क्या कहा?

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