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दीपिका पादुकोण बता रही हैं, डिप्रेशन हो जाए तो क्या करें

लड़कियों सुबह-सुबह उठो और आसमान में चढ़ उगते सूरज को लीलकर ही मानो.

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11 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 11 जुलाई 2016, 03:13 PM IST)
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'जब मैं बड़ी हो रही थी, पापा ने मुझसे कहा था, 'बेस्ट बनने के लिए तीन 'D' जरूरी हैं: डिसिप्लिन, डेडीकेशन और डिटरमिनेशन. यानी अनुशासन, समर्पण और दृढ़ संकल्प. अपने दिल की सुनो और वो करो, जिसका जूनून तुम्हारे अंदर है. खेलों ने मुझे नाकामियों से लड़ना सिखाया है. कामयाबियों को संभालना सिखाया है. खेलों ने मुझे जमीन से जोड़कर रखा है. खेलों ने मुझे विनम्रता सिखाई है. दो साल पहले मैं डिप्रेशन से जूझ रही थी. मैं डूब रही थी. मैंने हथियार डाल दिए थे. लेकिन मेरे अंदर के एथलीट ने मुझे लड़ना सिखाया. ये सिखाया कि कभी हार नहीं माननी चाहिए. और इसलिए मैं हर लड़की और लड़के, हर मर्द और औरत से कहना चाहती हूं, कि वो कोई खेल खेला करें. खेलों ने मेरी जिंदगी बदली है. आपकी भी बदल सकते हैं. खेलों ने मुझे जीना सिखाया है. लड़ना सिखाया है, कभी न रुकना सिखाया है.' दीपिका पादुकोण ने ये बात हाल ही में अपने फेसबुक पर लिखी. और साथ में शेयर किया एक नया ऐड. दीपिका हमारे समय की सबसे सफल एक्ट्रेस में से एक हैं. उनके बारे में कौन नहीं जानता. फिल्मों में आने के पहले नेशनल लेवल पर बैडमिंटन खेला. फिर मॉडलिंग की. और फिल्मों में आते ही हिट हो गईं. लेकिन कुछ ही सालों में वो एक बुरे दौर से गुजरीं. उन्हें डिप्रेशन ने घेर लिया. जिससे लड़कर वो बाहर आईं.
लेकिन ये कहानी सिर्फ किसी एक दीपिका की नहीं. हजारों औरतें हर दिन दुनिया से लड़ते हुए आगे बढ़ रही हैं. पुरुषवादी समाज में रहते हुए अपनी पहचान बना रही हैं. सड़क चलते उन्हें हैरेस करते लुच्चों से लेकर एक्सप्लॉइट करने वाले बॉस से लड़ रही हैं. अपने बनाए उसूलों पर चल रही हैं. इसके साथ-साथ इश्क कर रही हैं. उनके दिल टूट रहे हैं. हौसला टूट रहा है. लेकिन वो फिर-फिर उठकर खड़ी हो रही हैं.
ऐसे ही लोगों को सलाम करता है ये ऐड. और सबको प्रेरणा देता है ऐसा बनने की. ऐड में दीपिका हैं. और साथ में हैं इंडिया की 10 बड़ी एथलीट. जिसमें शामिल हैं, हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल, फुटबॉलर ज्योति ऐन बुरेट और क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंडाना और सुब्बलक्ष्मी शर्मा. https://www.youtube.com/watch?v=1UvPZ8fD4B8

खेल ही क्यों?

क्योंकि ये आपको फिट रखता है. शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी. जानते हैं, कसरत से आपके दिमाग में नैचुरल रूप से वो केमिकल निकलते हैं, जो दिमाग को शांत करने वाली दवाइयों में दिए जाते हैं. शारीरिक ताकत आपको लड़ने की ताकत देती है. आधे घंटे पसीना बहा कर आपको जो सुकून मिलता है, वो 9 घंटे कंप्यूटर से सामने बैठने से नहीं मिलता. शारीरिक ताकत से कॉन्फिडेंस आता है. खुद की रक्षा करने की हिम्मत मिलती है.

डिप्रेशन और हम

हम ऐसे दौर में हैं, जब हमारी फेसबुक लिस्ट में 150 लोग ऑनलाइन होते हैं. लेकिन ऐसा कोई नहीं होता जिससे हम बात कर सकें. एक पूरी पीढ़ी है, जो केवल टारगेट पूरे करने की रेस में भाग रही है. और इसी दौड़ में अपने रिश्तों को संजोए रखने की कोशिश भी कर रही है. इसके साथ-साथ अपने उसूलों से कॉम्प्रोमाइज नहीं करना चाहती. मानसिक तनाव से जूझती इस पीढ़ी में एंग्जायटी और डिप्रेशन तो आम बात होती जा रही है. लेकिन इस आम होती समस्या से इतने पूर्वाग्रह जुड़े हैं, कि लोग इसे एक समस्या की तरह देखते ही नहीं हैं. अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं. जब तक समस्या बड़ी न हो जाए. ऐसे समय में अगर हमें कोई बचा सकता है, तो वो है खेल, डांस और कसरत. रॉबिन विलियम्स के बारे में जानते हैं? अमेरिकी कॉमेडियन थे. लोगों को हंसा-हंसा कर मार डालने की क्षमता रखते थे. लेकिन यही हंसोड़ खुद अवसाद के कुएं में गिर पड़ा. फिर यूं हुआ कि उनके सबसे करीबी दोस्त की मौत हो गई. और तब रॉबिन ने तय किया कि अपने डिप्रेशन से बाहर आकर रहेंगे. उन्होंने साइक्लिंग शुरू की. और अपनी मानसिक समस्या से बाहर आ गए. वे कहते थे, साइकिल चलाने से ही उनकी जान बच पाई. हालांकि बाद में कई और तनावों ने उन्हें घेर लिया और उन्होंने जान दे दी.

क्यों ज़रूरी है ये ऐड

जहां एक ओर दूसरे ब्रैंड्स लड़कियों को कोमल, मखमली त्वचा के बल पर सफलता मिलते हुए ऐड दिखा रहे हैं, नाइकी का ये प्रचार हमें दिखाता है कि लड़कियां कैसे घरों के कमरों से निकलकर सड़कों पर आ रही हैं. दौड़ते हुए आगे बढ़ रही है. सड़कों, गाड़ियों को चीरते हुए मानो पूरा शहर अपने नाम कर रही हैं. मूंछों वाले अंकल से लेकर जवान लड़के सब हैरत से भर जाते हैं जब ये लड़कियां भागती हैं. मानों आसमान में चढ़ सूरज को लीलकर ही दम लेंगी. आमीन!

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