मूवी रिव्यू: आफत-ए-इश्क
गुड मैसेज, गॉन रॉन्ग का अच्छा एग्ज़ाम्पल.
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फिल्म को बहुत बेहतर बनाया जा सकता था, लेकिन अफसोस.
ज़ी5 पर एक नई फिल्म आई है, ‘आफत-ए-इश्क’. जो 2015 में आई हंगेरियन फिल्म ‘लिज़ा द फॉक्स फेरी’ की ऑफिशियल हिंदी अडैप्टेशन है. लिज़ा एक ब्लैक कॉमेडी फिल्म थी. यानी ऐसी कॉमेडी, जो टैबू टाइप टॉपिक्स पर जोक करती हो. जैसे कि डेथ. इंडिया में डार्क या ब्लैक कॉमेडी का चलन अभी आम नहीं. बिना ऑफेंड हुए भी हमारा काम नहीं चलता. ऐसे में ‘आफत-ए-इश्क’ कैसी फिल्म है, यही जानने के लिए हमने फिल्म देख डाली.
लल्लो एक 30 साल की सीधी-सादी लड़की है. जिसका आगे-पीछे कोई नहीं. मतलब दाएं-बाएं भी कोई नहीं. न कोई भाई-बहन, न कोई दोस्त. कहने के नाम पर आत्माराम नाम का भूत उसका दोस्त है. जो उसके सिवा किसी को नहीं दिखता. लल्लो अपनी लाइफ में प्यार की कमी पूरी करना चाहती है. करने की कोशिश भी करती है. लेकिन यहीं से सारे कांड शुरू हो जाते हैं. जब उसके करीब आने वाला हर आदमी एक-एक कर मरने लगता है. लल्लो को लगता है कि वो शापित है और उसके नसीब में प्यार नहीं. उन बंदों के मरने के पीछे की मिस्ट्री और लल्लो का शाप, यही पूरी फिल्म की मोटा-माटी कहानी है.
लल्लो एक 30 साल की सीधी-सादी लड़की है. जिसका आगे-पीछे कोई नहीं. मतलब दाएं-बाएं भी कोई नहीं. न कोई भाई-बहन, न कोई दोस्त. कहने के नाम पर आत्माराम नाम का भूत उसका दोस्त है. जो उसके सिवा किसी को नहीं दिखता. लल्लो अपनी लाइफ में प्यार की कमी पूरी करना चाहती है. करने की कोशिश भी करती है. लेकिन यहीं से सारे कांड शुरू हो जाते हैं. जब उसके करीब आने वाला हर आदमी एक-एक कर मरने लगता है. लल्लो को लगता है कि वो शापित है और उसके नसीब में प्यार नहीं. उन बंदों के मरने के पीछे की मिस्ट्री और लल्लो का शाप, यही पूरी फिल्म की मोटा-माटी कहानी है.

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