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मोदी सरकार के 2 साल: 5 चुनावी वादों का रिपोर्ट कार्ड

चैनल वालों के चक्कर में न फंसिए. यहां जान लीजिए फटाफट. प्रशंसक, आलोचक जरूर पढ़ें.

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26 मई 2016 (अपडेटेड: 26 मई 2016, 12:01 PM IST)
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फोटो - thelallantop
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पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के दो साल पूरे हो गए हैं. 2014 लोकसभा चुनावों में बीजेपी के स्टार प्रचारक और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने तत्कालीन गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी. खूब दबाके प्रचार किया. कैची भाषण दिए. अमित शाह की मानें तो वादों में कुछ जुम्ले भी थे. मोदी सरकार ने कुछ अच्छे काम किए. आलोचक कहते हैं सरकार कई मामले में फिसड्डी भी रही. मोदी जब पीएम इन मेकिंग थे. तब उन्होंने कई वादे किए. अब जब 2 साल पूरे हो गए हैं. तब हम वादों पर एक छोटी रिपोर्ट कार्ड सी आपको पढ़ाते हैं. रिपोर्ट..कि मोदी सरकार ने किन वादों को पूरा कर लिया है. और जो वादे पूरे हो रहे हैं, उनकी हकीकत क्या है. रियलिटी में वादों का हालिया स्टेटस क्या है. यहां जानिए, क्योंकि अज्ञात कह गया है:
'साफ़ कह दीजिए वादा ही किया था किस ने उज़्र क्या चाहिए झूठों के मुकरने के लिए'
 
1. खुले में शौच को खत्म करने की सोच: मोदी सरकार ने एक बढ़िया कैंपेन शुरू किया. क्लीन इंडिया कैंपन. खुले में शौच की दिक्कत को खत्म और घरों में टॉयलेट बनाने की बात कही गई. 29 फरवरी 2016 तक करीब 97 लाख 73 हजार टॉयलेट घरों में बनवा दिए गए हैं. रियलिटी: जिन घरों में टॉयलेट बनवाए गए हैं. वहां हर जगह पानी का जुगाड़ नहीं हो पाया है. 'कर तो लें, पर धोएं कैसे.' वाला सिस्टम है. गांवों में जो टॉयलेट बने हैं, उनमें से सिर्फ 44 फीसदी टॉयलेट्स में पानी का जुगाड़ हो पाया है. शहरों में बने 88 फीसदी टॉयलेट्स को पानी मिल पाया है.
  2. बिजली का वादा: 2014 लोकसभा चुनावों से पहले वादा किया गया कि मई 2018 तक इंडिया के सभी गांवों में बिजली पहुंच जाएगी. मियाद पूरी होने में दो साल का वक्त बाकी है. सरकार बनने के बाद से 1 लाख गांवों में बिजली फिट हो गई है. रियलिटी: पेच कुछ यूं समझिए कि बिजली पहुंचने का मतलब बिजली की फुल सप्लाई होना नहीं होता है. यानी ऐसे भी हालात हैं कि बिजली कनेक्शन तो है, पर बत्ती नहीं आ रही. हालांकि राज्यों में बिजली सप्लाई की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की नहीं है. ये काम राज्य सरकारों का है. हम आपको बताते हैं कि किन स्टेट्स में कितने फीसदी लोगों को शाम में 4 घंटे से ज्यादा बिजली मिल पाती है. और इस अच्छी या बुरी सप्लाई के लिए राज्य ही जिम्मेदार हैं.
बिहार: 29 यूपी: 23 ओडिशा: 72 झारखंड: 19
 
3. सबको फाइनेंशियल मदद: प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 21.9 करोड़ लोगों के नए बैंक अकाउंट खोले गए. इस स्कीम के आते ही सरकार के मंत्रियों ने खूब तारीफ वाला हल्ला काट दिया. रियलिटी: ये जितने 21 करोड़ बैंक अकाउंट खुले हैं. उनमें से 26.4 फीसदी बैंक अकाउंट्स में एक भी रुपया नहीं है. यानी 0 से खुला बैंक अकाउंट 18 मई 2016 तक भी जीरो हैं. हालांकि सरकार के लिए पइसा भरवाना मुश्किल टास्क है भी.
  4. सांसद आदर्श ग्राम योजना: सांसद गांवों को गोद लेंगे. उनका कल्याण करेंगे. 2200 गांवों को सांसद गोद लेकर मॉडल विलेज्स में कंवर्ट करेंगे. रियलिटी: लोकसभा में टोटल सांसद हैं 543. इनमें से अब तक 490 सांसदों ने एक भी गांव गोद नहीं लिया है. राज्यसभा में 252 सांसद होते हैं. इनमें से 239 सांसद अब भी बिना किस गांव को गोद लिए न जाने किसके मन की बात सुनने में बिजी हैं.
  5. नए उद्योगों को बढ़ावा: वादा किया गया कि सारी प्रोसेस आसान बनाई जाएंगी. जल्दी मंजूरी दी जाएगी ताकि नए लोग बिजनेस में अच्छा कर सकें. आगे बढ़ सकें. बिजनेस करने के लिए बढ़िया सुविधा देने वाले 183 देशों की लिस्ट में इंडिया 130वें नंबर पर है. साल 2016 का आंकड़ा तो यही कह रहा है. रियलिटी: इंडिया में बिजनेस शुरू करने वालों में कुछ दिन कंपलसरी लगते ही हैं. साल 2013 में 32, साल 2014 में 34 दिन लगते ही थे. लेकिन 2015 में बिजनेस शुरू करने के लिए 29 दिन लगते हैं. 3 साल में तीन दिन का फर्क आ गया है मितरों.
  (सोर्स: न्यूज रिपोर्ट्स, न्यूज फ्लीक्स, pmjdy.gov.in, gara.gov.in, swachhta status report 2016, india spend)

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