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साल 2018 के 16 अनमोल गाने, जो आपकी प्ले लिस्ट में होने चाहिए

बहुत चर्चित, मटकित, धम-धड़ामित गीतों से इतर गीत.

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31 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 31 दिसंबर 2018, 07:38 AM IST)
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2018 में कुछ अप्रतिम कविताएं रची गईं जो गीत बनकर हम तक पहुंची.
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yunus khanये सूची हमारे लिए यूनुस खान ने बनाई है. बड़े भाई सा स्नेह करते हैं वो लल्लनटॉप टीम से. विविध भारती से जुड़े हैं. वही विविध भारती जिसने संगीत के शैदाइयों के आगे सुरों के न जाने कितने समंदर उड़ेल दिए. यूनुस भाई उस बेचैनी को भरपूर महसूस करते हैं, के ये जो हर पीढ़ी के साथ तमाम किस्से बिना हर्फ पाए दफन हो रहे हैं, उन्हें कैसे बचा लें. ताकि बाद के लोग बांच सकें. और इसके लिए यूनुस भाई रेडियो वाणी ब्लॉग चलाते हैं. कई बूढ़े बरगदों से इसरार कर इस पर लिखवाते हैं. लगातार सोशल मीडिया पर सार्थक ढंग से एक्टिव रहते हैं. और जहां कभी भी गीत संगीत की बात होती है, अपनी आमद दर्ज कराते हैं. जैसे ये लिस्ट.
बीते कुछ सालों से हर बरस दिसंबर में एक विकट समस्या उठ खड़ी होती है, जब मुझे साल के बेहतरीन गाने चुनने होते हैं. किसी तरह दस गाने चुनना तो फिर भी आसान है, पर बतौर RJ आपको केवल दस नहीं, बल्कि कभी साल के बीस, कभी चालीस बेहतरीन गाने चुनने पड़ते हैं और ये सचमुच बड़ा ही बोझिल बन सकता है. संगीत के जिस तरह के दौर में हम जी रहे हैं, बड़ा ही मुश्किल होता जा रहा है, ऐसे गानों को चुनना जो देर तक और दूर तक आपका साथ निभाएं. जो आतिशबाज़ी की तरह थोड़ी देर चमक कर ग़ायब ना हो जाएं. यहां यह स्पष्ट कर दूं कि ये कोई काउंट-डाउन नहीं है, हम किसी भी गाने को सबसे श्रेष्ठ नहीं बता रहे हैं. ये बस मेरी तरफ से एक फेहरिस्त है इस साल के अच्छे गानों की. 1. नैन ना जोड़ीं - बधाई हो गायक - आयुष्मान खुराना, नेहा क्ककड़ गीतकार - कुमार संगीतकार - रोचक कोहली रोचक कोहली ने बीते कई बरसों में आयुष्मान खुराना के लिए कई बेमिसाल गाने तैयार किए हैं और यह सिलसिला इस बरस भी जारी रहा है. आयुष्मान खुराना से अलग भी रोचक कोहली ने इस बरस कुछ हिट गाने दिये हैं. मेरी इस फेहरिस्त में आगे भी रोचक के कुछ गाने आयेंगे. सबसे दिलचस्प बात ये है कि वो हाई-बीट वाला टेक्‍नो-संगीत नहीं देते. उनके गानों का स्तर लगातार कायम रहा है. बहरहाल.. इस गाने को कुमार ने लिखा है, जो अमूमन धूम-धड़ाम गानों के गीतकार हैं, पर बीच बीच में उनका ये रूमानी पहलू भी उभर का सामने आता रहता है. इस गाने को आयुष्मान ने ही गाया है जो इससे पहले विकी डोनर में ‘पानी दा रंग’, बरेली की बर्फी में ‘ऩज़म-नज़म’, गैर फिल्मी गीत-‘इक वारी हां कह दे’ और मेरी प्यारी बिंदु के लिए ‘हारेया मैं दिल हारेया’ जैसे बेमिसाल गाने दिये हैं. आयुष्मान लगातार टेक्‍नो और शोर बनते हुए संगीत के बीच नाजुको-नर्म रूमानी गाने लेकर आते हैं जिनमें गीतकारी की नक्काशी होती है. ये एक अच्छा संकेत है. इस गाने की इन पंक्तियों पर ग़ौर कीजिए- ना किसी अपने, ना पराए की तरह मेरे साथ रहना मेरे साए की तरह लाज़मी मैं तेरे लिए, तू ज़रूरी मेरे लिए आंसू ये बिछोड़े वाले पलकों पे ना छोड़ीं नैना ना जोड़ी यू-ट्यूब पर यहां सुनिए:

2. नैनों वाले ने - पद्मावत गायिका - नीति मोहन गीतकार - सिद्धार्थ गरिमा संगीत - संजय लीला भंसाली नीति मोहन इधर के दिनों की एक बहुत ही मधुर आवाज़ हैं. नीति दक्षिण की फिल्मों में भी गाती हैं और वहां भी लोकप्रिय हैं. ‘बावरा मन’ (जॉली..2) और ‘इश्क़ वाला लव’ (स्टूडेन्ट ऑफ द ईयर) जैसे प्यारे गानों वाली गायिका नीति ने इस बरस बहुत ही मधुर गीत गाया फिल्म ‘पद्मावत’ में. ये तकरीबन पुराने दौर की याद दिलाता है. सिद्धार्थ गरिमा ने ये गाना बड़ा ही ललित लिखा है. नैनों वाले ने छेड़ा मन का प्याला/ छलकाई मधुशाला/ मेरा चैन-वैन-नैन अपने साथ ले गया..

3. चाव लागा - सुई धागा - मेड इन इंडिया गायक - पेपॉन, रोंकिनी गुप्ता गीतकार - वरूण ग्रोवर संगीत - अन्नू मलिक वरूण ग्रोवर युवा प्रतिभा हैं. इस बरस उनकी लिखी वेब सीरीज़ ‘सेक्रेड गेम्स’ खासी चर्चित रही है. शरत कटारिया की फिल्म ‘दम लगाके हईशा’ का उनका गाना-- ‘मोह मोह के धागे’ आज भी युवा दिलों की धड़कन है. रेडियो स्टेशन इसे बजाते नहीं थकते. ज़ाहिर है कि इस गाने के बाद उनकी चुनौतियां बढ़ गयी थीं. इस बरस उन्हों ने ‘सुई धागा’ में ‘मोह मोह’ के जादू को दोहराने की कोशिश की. और अपनी तरह का गीत रचा. मुझे निजी रूप से यह गीत बहुत पसंद है. वरूण नयी शब्दावली और नये मुहावरों के साथ आते हैं और उनसे अगले बरस भी उम्मीदें रहेंगी. इस गाने में पैपॉन और रोंकिनी की आवाज़ें हैं. रोंकिनी बीते बरस ‘तुम्हारी सुलू’ में ‘रफू’ जैसा बेहतरीन गाना गा चुकी हैं. देख लिहाज़ की चार दीवारें/ फांद लीं तेरे एक इशारे/ प्रीत की चादर छोटी मैली/ हमने उस में पैर पसारे/ काफी है तेरा साथ रे/ तेरा चाव लागा, जैसे कोई घाव लागा कभी सीत लागा, कभी ताप लागा, तेरे साथ का है जो शाप लागा. मनवा बौराया..

4. तुम्बाड टाइटल - तुम्बाड गायक - अतुल गोगावले गीतकार - राजशेखर संगीतकार - अजय अतुल इस बरस की महत्वपूर्ण फिल्मों में ‘तुम्बाड’ शामिल है. इस फिल्म का उतना प्रचार नहीं हो पाया पर फिल्मों के कद्रदानों तक यह पहुंची और सराही गयी. यह गाना ‘घणी बावरी’ जैसा गाने देने वाले युवा गीतकार राज शेखर की प्रतिभा का कमाल है. राज शेखर ने बीते बरसों में कुछ शानदार गाने दिये हैं. जैसे ‘क़रीब करीब सिंगल’ का ‘जाने दे’, ‘तनु वेड्स मनु’ का ‘कितनी दफे दिल ने कहा’ वगैरह. ‘तुम्बाड’ का परिदृश्य बहुत ही ललित शब्दावली की मांग करता है और राजशेखर ने इसे कुशलता से निभाया है. अजय-अतुल ने इस गीत में भव्य संगीत दिया है, जिसके लिए वो जाने भी जाते हैं. कभी-कभी दिखे, कभी छिपे वो काल सा/ कभी कभी हंसे, कभी कसे इक जाल सा/ टुक-टुक ताके, कभी झांके कोई लालसा/ मुड़ मुड़ मारे, तन ताड़े वो अकाल-सा/ सदियों से ऐसा है वो भूखा रे/ बैठा है ये ऐसा रूखा-सूखा रे/ खाता जाये कांकड़-पाथर आता ये पीता जाये भीषण भादो प्यासा रे

5. कर हर मैदान फतेह - संजू गायक - सुखविंदर, श्रेया घोषाल गीतकार - शेखर अस्तित्व संगीतकार - विक्रम मोन्टरोज़ राजकुमार हीरानी की फिल्म ‘संजू’ में तीन संगीतकारों का योगदान था. रोहन-रोहन, विक्रम मोंटरोज़ और ए आर रहमान. पुनीत शर्मा का गीत ‘मैं बढिया तू भी बढिया’ फिल्म के प्रचार में खूब इस्तेमाल किया गया. पर इस फिल्म के दो गाने इसका हासिल हैं. पुनीत का लिखा ‘बाबा बोलता है’ मीडिया पर एक तल्ख टिप्पणी की तरह है. और शेखर अस्तित्व का लिखा गाना—‘कर हर मैदान फतेह’ उन गानों की परंपरा का है, जो जीवन की राहों में आपको हौसला देते हैं. इधर की फिल्मों में इस तरह के गानों की गुंजाइश कम होती चली गयी है. सुखविंदर की परंपरा का गीत है ये. उन्होंंने और श्रेया घोषाल ने इसे खूब गाया है. ये पंक्तियां देखिए - घायल परिंदा है तू, दिखला दे जिंदा है तू/ बाक़ी है तुझमें हौसला तेरे जूनून के आगे, अम्बर पनाहे मांगे, कर डाले तू जो फैसला रूठी तकदीरें तो क्या, टूटी शमशीरें तो, क्या टूटी शमशीरें से ही कर हर मैदान फतेह..

6. दिलबरो - राज़ी गायक- हर्षदीप कौर, विभा सराफ, शंकर महादेवन गीत - गुलज़ार संगीतकार - शंकर अहसान लॉय ‘कॉलिंग सहमत’ जैसी मशहूर किताब पर बनी मेघना गुलज़ार की फिल्म ‘राज़ी’ एक खास तरह के संगीत की मांग कर रही थी. और शंकर अहसान लॉय ने दिखा दिया कि इन दिनों भले उनकी बहुत फिल्में नहीं आ रहीं हैं, पर उनकी चमक अब भी कायम है. इस फिल्म के दो गानों की मैं बात करना चाहूंगा. कश्मीरी शादी में जब मेहँदी की रात होती है तो ‘खानेमेज़ कूर’ गाया जाता है, ये एक तरह का विदाई गीत है और वादी की परंपरा का हिस्सा है. आईये आपको पारंपरिक खानमेज़ कूर सुनवाया जाए. इसे गाया है लोक-गायक गुलज़ार हजाम ने.
इस गाने के आधार पर शंकर अहसान लॉय ने ‘राज़ी’ में बनाया ‘दिलबरो’ गीत. जिसे हर्षदीप कौर और साथियों ने खूब गाया है. गुलज़ार यहां अपनी ताब के साथ हैं. फसलें जो काटी जायें, उगती नहीं हैं बेटियां जो ब्याही जायें मुड़ती नहीं हैं ऐसी बिदाई हो तो लंबी जुदाई हो तो दहलीज़ दर्द की भी पार करा दे बाबा मैं तेरी मलिका, टुकड़ा हूं तेरे दिल का एक बार फिर से दहलीज़ पार करा दे

7. मेरे वतन- राज़ी गायिका - सुनिधि और साथी गीत - गुलज़ार और अल्लामा इकबाल संगीत - शंकर अहसान लॉय ‘राज़ी के एक और गीत की बात मैं करना चाहूंगा और वो है ‘मेरे वतन’. देशभक्ति गीतों के अकाल के इस समय में किसी फिल्म में ऐसा गीत आये जो अल्लाीमा इकबाल से प्रेरित हो—तो इसे एक बड़ी घटना क्यों ना माना जाए? अपने एक इंटरव्यू में गुलज़ार ने कहा भी है कि इस गीत की प्रेरणा उन्हें बचपन में गाये जाने वाले इकबाल के एक गीत से मिली. ये गीत गुलज़ार के स्कूल में गाया जाता था. जिन पंक्तियों ने गुलज़ार को प्रेरित किया है, वो हैं—‘लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना़ मेरी/ जिंदगी शम्मा की सूरत हो खुदाया मेरी’. अल्लांमा इकबाल की ये रचना सन 1902 की है. और इसे आप इंटरनेट पर खोजकर पढ़ सकते हैं. खोजिए, ‘लब पर आती है दुआ’. चलिए अब ‘राज़ी’ का ये गीत सुना जाए, सुनिधि चौहान और बच्चों की आवाजें.

8. आज से तेरी - पैड मैन गायक - अरिजीत सिंह गीतकार - कौसर मुनीर संगीतकार - अमित त्रिवेदी कौसर मुनीर ने बीते बरस ‘मेरी प्याारी बिंदु’ में ‘माना के हम यार नहीं’ और ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में ‘मैं कौन हूं’ जैसे बेहतरीन गाने दिये हैं. इस बरस उनकी दिलचस्प शब्दावली वाला गीत आया आर बाल्की की फिल्म ‘पैडमैन’ में. शायद ही कभी किसी गाने में आपने ‘बिजली का बिल’ और ‘पिनकोड का नंबर’ जैसे जुमले सुने होंगे. ये बात कौसर को सबसे अलग भी करती है. इस गाने के लिए उन्हें बधाई. तेरे कांधे का जो तिल है तेरे सीने में जो दिल है तेरी बिजली का जो बिल है आज से मेरा हो गया मेरे ख्वाबों का अंबर मेरी खुशियों का समंदर मेरे पिन-कोड का नंबर आज से तेरा हो गया..

9. नैना बंजारे - पटाखा गायक - अरिजीत सिंह गीतकार - गुलज़ार संगीतकार - विशाल भारद्वाज गुलज़ार ने विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘पटाखा’ में दिलचस्प गाने लिखे हैं. ‘आजा नेटवर्क के भीतर कहके हैलो हैलो’ में वो बिलकुल नयी अभिव्यक्ति के साथ आये हैं. और यह खाना खूब बजाया गाया. पर मुझे इस फिल्म का जो गीत सबसे ज्यादा पसंद आया, वो है ‘नैना बंजारे’. एक तो गुलज़ार के सांद्र बोल और उस पर अरिजीत की आवाज़. इस साल के सबसे अच्छे गानों में इसे अपने साथ रखा जा सकता है. नीली नीली इक नदिया अंखियों के दो बजरे घाट से भिड़ी नैया बिखर गये गजरे डूबे रे डूबे मितवा बीच मंझधारे..

10. मैंनू इश्क तेरा लै डूबा - अय्यारी गायिका- सुनिधि चौहान गीतकार- मनोज मुंतशिर संगीतकार- रोचक कोहली हमने इस फेहरिस्त में रोचक कोहली की बात पहले भी की है. रोचक इस तरह के गानों के माहिर हैं. खास बात है सुनिधि से नर्मो-नाजुक बोल गवाना. उन्हें खास तरह के गानों में क़ैद कर दिया गया था. सुनिधि ने खूब डूबकर गाया है इस गाने को. रोचक के गानों में खूब सारा गिटार होता है, संगीत बोलों पर हावी नहीं होता. मनोज मुंतशिर का ये गाना अच्छा है. और इसे एक बार सुनकर आप रूक नहीं सकते. दोबारा सुनने की ललक बाकी रहती है. लेकिन इस फिल्म के एक और गाने का जिक्र ज़रूर करना होगा- जिसके बोल हैं—‘याद है, सब मुझे याद है’. इसे भी ज़रूर सुनिएगा.

11. चल - अक्टूबर गायिका - मोनाली ठाकुर गीत - शकील आज़मी संगीत - शांतनु मोइत्रा शूजीत सरकार इस बरस सेलुलॉइड पर कविता सरीखी फिल्म लेकर आए ‘अक्टूबर’. इस फिल्म को लेकर चरम प्रतिक्रियाएं देखने मिलीं. बहुत अच्छी और बहुत बुरी. फिल्म आज के ज़माने जैसी तेज़ रफ्तार और झटकेदार नहीं है. इसे देखने के लिए धीरज और संवेदना चाहिए. और यही बात इसके गानों पर भी लागू होती है. मुझे इस फिल्म के दो गाने पसंद आए. शकील आज़मी का लिखा गीत ‘चल’. मुझे यक़ीन है कि ‘हथेली पे बारिशें की बूंदें तोलने’ की बात करने वाला ये गाना बरसों बाद भी याद किया जाएगा. इसमें जीवन की मासूम चाहतों को अलफ़ाज़ जो दिये गये हैं. चल छोटी-छोटी सीली शामें जी लें चल चल आधी आधी थोड़ी जूटी चाय पी लें चल चल थोड़ी-सी हैं मेरी सांसें दोनों जी लें चल अभी तू है, मैं हूं, ये खुश्बूी ना रहेगी कल ये ही महक हवा में ना बहेगी कल..

12. नित खैर मंगा - रेड गायक- राहत फतेह अली खां गीत-मनोज मुंतशिर संगीत-तनिष्क बाग़ची इन दिनों पुराने गीतों को नयी शक्ल देकर पेश करने का चलन जोरों पर है. बीते बरस ये बयार बहुत ही तेज़ चली थी और तनिष्क बाग़ची ने बहुत सारे गानों को नया रंग दिया था. इस बरस भी उनके हिस्सें ये काम आया है. फिल्म ‘रेड’ में अस्सी के दशक के अंत में आई नुसरत फतेह अली खां की क़व्वाली ‘नित ख़ैर मंगा सोणिया मैं तेरी’ और ‘सानू इक पल चैन ना आवै’ को उन्होंने नया रूप दिया है. दिलचस्प बात ये है कि ये दोनों ही गाने इस बरस के चर्चित गानों में शामिल हैं. हिंदी फिल्मी गीतों में पंजाबी बोलों के लगातार हावी होने की मिसाल भी हैं ये गीत. हालांकि मुझे अभी भी लगता है कि जो मूल गीत नुसरत साहब ने गाए हैं, उनका कोई जवाब नहीं है. उन कव्वालियों में उस दौर की भीनी खुश्बू है. फिर भी ये दोनों गीत इस बरस के महत्वपूर्ण गीत हैं.

13. तेरा यार हूं मैं - सोनू के टीटू की स्वीटी गायक - अरिजीत सिंह गीत - कुमार संगीतकार - रोचक कोहली ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ फिल्म चाहे जैसी भी हो, पर इस फिल्म के दो गाने अच्छे बन पड़े हैं. ये भी रोचक कोहली के गीत हैं और उनकी अपनी परंपरा वाले गीत हैं. ‘तेरा यार हूं मैं’ बचपन की दोस्तियों का गाना है और प्यारा गाना है. ऐसे गाने जो कोरी रूमानियत के परे जाकर जीवन के सच्चे अहसासों की बात करें, मुझे लगता है वो लंबा सफर तय कर सकते हैं. इन गानों का सीधा ताल्लुक जीवन से होता है और जीवन के कुछ मोड़ ऐसे होते हैं, जब हम इन गानों की उँगली पकड़कर चलते हैं. आजा लड़ें फिर खिलौनों के लिए/ तू जीते मैं हार जाऊं आजा करें फिर वही शरारतें/ तू भागे मैं मार खाऊं मीठी सी वो गाली तेरी/ सुनने को तैयार हूं मैं तेरा यार हूं मैं

14. खोल दे पर - हिचकी गायक - अरिजीत सिंह गीतकार - राज शेखर संगीत - जसलीन रॉयल फिल्म ‘हिचकी’ का ये गीत जीवन की राहों में साथ देने वाला गीत है. ‘रूक जाना नहीं तू कहीं हार के’ जैसे गानों की हमें ज़रूरत पड़ती है. वो गाने जो हमें हौसला दें. किसी थकी सुबह हमें आगे बढ़ने को प्रेरित करें. ये उसी श्रेणी का गीत है. रटी रटाई सारी छोडो भी दुनियादारी बाग़ी तेवर जो तेरे बोलेंगे सब अनाड़ी सबको मनाने की तेरी नहीं ज़िम्मेदारी ऊँचे आसमानो पे लिख दे तू हिस्सेदारी खोल दे पर..

15. पिया समाए - मुल्क गायक - अरशद हुसैन, शफकत अमानत अली खां गीत - शकील आज़मी संगीत - अनुराग सैकिया अनुभव सिन्‍हा की फिल्म ‘मुल्क ’ इस बरस की चर्चित फिल्मों में शामिल है. इस फिल्म में भारत की गंगा-जमीन तहज़ीब को रेखांकित करने वाली महत्वपूर्ण क़व्वाली आयी. ‘अक्टूबर’ के अलावा शकील आज़मी का ये इस बरस का बेहतरीन काम है. हिंदी फिल्मों में इधर के दिनों में क़व्वाली बहुत ही मिश्रित रूप में आती है, यहां क़व्वाली अपने खालिस रूप में है. बिना किसी लटके-झटके के. बेहतरीन गीतकार के साथ. काशी भी मुझमें, काबा भी मुझमें घी मोरा डार मोरी चौखट इश्क़ है मोरे पिया का मजहब केहू से मोरा काहे का झंझट मंदिर के छज्जे की मैं गोरैया पीपल है मोरा रैन बसेरा मस्जिद के गुंबद की मैं हूं कबूतर मैं जो उडूं तो होवे सबेरा

16. बहुत हुआ सम्मान - मुक्काबाज़ गायक - स्वरूप खान गीतकार - हुसैन हैदरी संगीतकार - रचिता अरोरा यह हिंदी सिनेमा में जन-गीतों की शैली का प्रयोग है. खरी-खरी बात कहने वाला गाना. ऐसे गाने अब बनते नहीं हैं. एक जमाने में साहिर और शैलेंद्र ने मौजूदा राजनीति पर बहुत तल्ख टिप्पणियां की थीं. यह गाना उसी दौर की याद दिलाता है. इसे भले कम सुना गया है पर ये मेरी फेहरिस्त का ज़रूरी गाना है. खून के छींटा उड़ा जो अपना गिरा है जाकर दूर अरे गले में घंटी बांध के हमको फांसी दिए हुजूर सांचा लेके हमको ढाला, आवाज़ों के कुएं में डाला चाकर बनाके तलवा चटाया, खंजर देके पानी कटाया जो सिखाया वो न करेंगे, अब न सुनेंगे कह के रहेंगे जबरन बने महान तुम्हारी ऐसी तैसी... अरे बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी... गरियाएंगे सीना तान तुम्हारी... बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी ऐसी तैसी..
आप सोच रहे होंगे कि ये किस तरह की फेहरिस्त है, जो ना दस की है ना बीस की. पर दोस्तो, सोलह ही गीत निकले इस बरस को निचोड़ने से, जो मन को भाए और ये लगा कि इन्हें आने वाले बरस में साथ रखा जा सकता है. ज़ाहिर है कि इस वर्ष के कुछ बहुत चर्चित, मटकित, धम-धड़ामित गीत इस फेहरिस्त से ग़ायब हैं- पर हुजूर पसंद अपनी अपनी.

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