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दिल्ली मेट्रो में रोज दिखते हैं ये अजीब मर्द

कुछ सीढ़ियों पर ऐसे दौड़ते हैं जैसे माघ मेले में भगदड़ मची हो. कुछ लेडीज कोच को हसरत भरी निगाहों से ताकते हैं. विचित्र किस्म के हैं ये चरित्र.

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25 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 25 दिसंबर 2018, 09:37 AM IST)
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मेट्रो में किस्म-किस्म के पुरुष मिलते हैं. महापुरुष भी. कुछ सीढ़ियों पर ऐसे दौड़ते हैं जैसे माघ मेले में भगदड़ मची हो. कुछ लेडीज कोच को हसरत भरी निगाहों से ताकते हैं, जैसे अभी एक षोडशी कन्या आकर वरमाला डाल जाएगी. विचित्र किस्म के ये 10 चरित्र, हर रोज आपको मेट्रो में नजर आते हैं:

1. नवजात


ये हैं वे नए प्राणी जो पहली बार मेट्रो में चढ़ते हैं. 2 किलोमीटर लंबी लाइन में लगकर टोकन लेते हैं, पर ये नहीं जानते कि उसका करना क्या है. ठोक के, सूंघ के, चाट के, हर तरह से टोकन को तब तक आज़माते हैं, जब तक पीछे वाली जनता गरियाना न चालू कर दे. जनता, गार्ड और महिला पुलिस की गाली खाने के बाद ही ये अपने चरण कमल मेट्रो में रख पाते हैं. उसके बाद मेट्रो के नक्शे को उत्सुकता से देखते हैं. अपनी मंजिल के बीच में कितने स्टेशन हैं, एक दो तीन करके गिनते हैं.


2. विद फैमिली


ये चढ़ते हैं विद फैमिली. दो बच्चे गर्दन पर भोले शंकर के सांप की तरह लिपटे हुए. एक पत्नी, जिसका ख्याल ऐसे रखते हैं जैसे वो तीसरा बच्चा हो. अकसर इनके बच्चे मेट्रो का पोल पकड़कर डांस करने लगते हैं.


3. बोरे वाले


सिर और पीठ पर लेकर चढ़ते हैं बड़े बड़े बोरे और बैग. जिनमें ईंट-पत्थर या फिर टुकड़ों में कटी हुई डेड बॉडी होती है जिसे शायद वे ठिकाने लगाना चाहते हैं.


4. प्रेमी


ये लेडीज और जनरल कोचों के उस जोड़ पर खड़े होते हैं जहां से मेट्रो दोनों ओर ऐसे दिखाई पड़ती है जैसे भूकंप आ गया हो. दोनों अकसर छोटे-मोटे प्रेमालाप में बिजी रहते हैं और नजर बचाकर बात आगे भी बढ़ जाती है. बहुत भीड़ होने पर ये बिछड़ जाते हैं और मेट्रो खाली होने पर लड़का अपने और लड़की अपने कोच में सीट पा लेते हैं. इनकी धीमी आवाज़ की फ्रीक्वेंसी या तो हाई-फाई मशीनें कैच कर पाती हैं या चमगादड़.


5 . दैत्य


ये 6 फुट से शुरू होते हैं और मेट्रो की छत तोड़कर निकल सकने तक लंबे हो सकते हैं. इनके हाथ, पांव, और तोंद भी बराबर अनुपात में बड़े होते हैं. आपकी खोपड़ी के बाल गिनने से लेकर आप फोन में क्या मैसेज टाइप कर रहे हैं, ये सब देख सकते हैं. जिसके हल्की सी पीठ टच हो जाए तो पीछे खड़ा बंदा बस गिरते-गिरते बचता है.


6. डूड


ये वैसे मानव प्रजाति का हिस्सा नहीं होते, पर एक ही तरह की शारीरिक बनावट होने के कारण इनका मेट्रो में चढ़ना दंडनीय अपराध नहीं है. इनके ईयरफोन्स से निकलता पंजाबी रैप अगली आने वाली मेट्रो तक सुनाई पड़ता है. अक्सर ये गोविंदा के प्रिय रंगों के कपडे और घुटनों तक की पतलून पहनते हैं, जिसे कैपरी कहा जाता है.


7. बेवड़े


ड्रिंक एंड ड्राइव करना क्राइम है, पर इनके मुताबिक ड्रिंक करके मेट्रो में चढ़ने की मनाही तो नहीं है. न ही भरी मेट्रो में उल्टी कर के बेहोश हो जाना अपराध है. इसलिए कुछ लोग ये सारे काम करते हैं. बड़े स्टेशंस पर इन्हें भीड़ के साथ बाहर फेंक दिया जाता है.


8. सतमासे


ये इतनी जल्दी में रहते हैं कि मम्मी के अंदर इनका कंस्ट्रक्शन भी पूरा नहीं हो पाया था, कि ये हपक के 7 ही महीने में रोते हुए पैदा हो गए. शर्ट के बटन ये रिक्शे में बंद करते हुए आते हैं और बंद होते मेट्रो के दरवाज़ों के बीच कफ़न बांध के खुद को झोंक देते हैं.


9. बारहमसे


ये इतने स्लो होते हैं कि अम्मा के लेबर से पैदा होने में ही इन्होंने 3 महीने लगा दिए थे. इनका दिमाग किसी पैरेलल यूनिवर्स में फाइन ट्यून्ड होता है. ये कल्पनाओं में रहते हैं और मेट्रो स्टेशन को वृंदावन गार्डन मानकर फुरसत से टहल रहे होते हैं. जनता इन्हें ठेल के अंदर भेज देती है और ठेल के बाहर कर देती है.


10. स्तनाभिलाषी


  ये बड़े तो हो गए, पर इच्छाओं से बच्चे हैं. इनकी निगाह कोच में चढ़ने वाली हर औरत के स्तनों पर होती है. ये फ़ोन पर या सहयात्री– किसी से भी बात करें, ऐसा लगता है कि ये सामने वाली महिला के स्तनों से ही बात कर रहे हैं. इनकी पहचान इनके फ़ोन की फुल वॉल्यूम पर बजने वाली रिंगटोन होती है.   (सभी GIFs Giphy से)


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