2005 में छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भाजपा सरकार ने बस्तर जिले के लोहांडीगुडा क्षेत्रमें 19,500 करोड़ रुपये के एकीकृत इस्पात संयंत्र के लिए टाटा स्टील के साथ एकसमझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. जमीन, स्थानीय आदिवासियों की थी. 2008 में इसजमीन का अधिग्रहण किया गया था. हालांकि, 2016 में जब बिलासपुर उच्च न्यायालय मेंजनहित याचिका में जमीन की वापसी के लिए तर्क दिया गया, तो टाटा स्टील ने विभिन्नकारणों से परियोजना से हटने की घोषणा की. भूपेश बघेल सरकार की पहली कैबिनेट बैठकमें किसानों को जमीन वापस देने का फैसला किया गया. देखें वीडियो.