हाल में निर्वाचन आयोग (ECI) ने मौजूदा विधानसभा चुनावों को लेकर बनाए गए नियमोंमें एक बदलाव कर दिया था. इसके मुताबिक, विधानसभा क्षेत्र के किसी भी मतदाता को उसइलाके के किसी भी पोलिंग बूथ का एजेंट बनाया जा सकता है. इसके लिए व्यक्ति का केवलउस इलाके का मतदाता होना जरूरी है. चुनाव आयोग के इस कदम से पश्चिम बंगाल मेंसत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) खासी नाराज है. उसने साफ इशारा किया है कि चुनावआयोग के जरिये BJP ने बंगाल चुनाव में 'खेला' कर दिया है. वहीं, BJP ने इसका खुलकरसमर्थन किया है.इस बदलाव से पहले पोलिंग एजेंट की नियुक्ति को लेकर अलग नियम था और लंबे समय सेलागू था. दरअसल, साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि पोलिंगबूथ पर नियुक्त एजेंट का उसी बूथ या उसके नजदीकी बूथ का वोटर होना जरूरी है. ECI नेनए नियम के तहत ये शर्त हटा ली है. अब किसी विधानसभा क्षेत्र का कोई भी वोटर उसइलाके के किसी भी पोलिंग बूथ का पोलिंग एजेंट बनाया जा सकता है. अब इससे किसे घाटाहै और किसको फायदा, इसे लेकर TMC और BJP के अपने-अपने तर्क हैं.तस्वीर- पीटीआईअपने-अपने तर्क नए नियम के खिलाफ TMC विशेष रूप से मुखर है. उसका कहना है कि नएनिर्देश 'दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों' के तहत बनाए गए हैं. पार्टी का आरोप है किइलेक्शन कमीशन का ये नियम चुनाव में BJP को फायदा पहुंचाएगा. उसने विरोध जताते हुएनए नियम को 'मनमाना, (राजनीति से) प्रेरित और पक्षपातपूर्ण' करार दिया है. आयोग कोबीती 26 मार्च को लिखे पत्र में पार्टी ने कहा था, 'ये नियम कुछ विशेष राजनीतिकदलों, यानी BJP की मदद करने के लिए लागू किया गया है, क्योंकि उसके संगठन की क्षमताइतनी नहीं है कि वो हरेक बूथ के लिए एजेंट नियुक्त कर सके.' TMC के इस दावे का आधारएक ऑडियो क्लिप है. इसमें कथित रूप से BJP के दो बड़े नेताओं की बातचीत रिकॉर्ड है.बीते हफ्ते TMC ने ये ऑडियो जारी किया था. पार्टी ने इसके हवाले से दावा किया थाकि बंगाल में BJP के संगठन की पहुंच ज्यादा नहीं है. उसने कहा था कि बंगाल में कईपोलिंग बूथों पर BJP अपने एजेंट नहीं बिठा पाएगी. क्या था क्लिप में? इंडिया टुडेकी रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑडियो क्लिप में कथित रूप से BJP के मुकुल रॉय और शिशिरबजोरिया की आवाज थी. इसमें रॉय, बजोरिया से कहते हैं कि बूथ एजेंट की नियुक्ति केमामले में BJP को चुनाव आयोग के पास जाना चाहिए. ऑडियो में रॉय ने कहा था कि केवललोकल लोग ही नहीं, अन्य लोगों को भी बूथ एजेंट बनाए जाने की अनुमति होनी चाहिए,वर्ना पार्टी कई बूथों पर अपने एजेंट नहीं दे सकेगी. बीते शनिवार (27 मार्च 2021)को TMC इस ऑडियो के साथ सामने आई थी. वर्तमान विधानसभा चुनाव के लिए पश्चिम बंगालमें एक लाख से भी ज्यादा पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं. जबकि 2 साल पहले ही संपन्न हुएलोकसभा चुनावों के समय राज्य में कुल 78 हजार 903 पोलिंग स्टेशन बनाए गए थे. शनिवारको TMC ने चुनाव आयोग से नए नियम को वापस लेने की अपील की थी. इसके बाद पार्टी केनेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा था कि आयोग के इस फैसले के चलते पहले चरण के मतदानके दौरान समस्याएं देखने को मिली थीं. उन्होंने बताया था कि वोटिंग के दौरान बूथ परमौजूद कई एजेंट एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे.बीजेपी नेता मुकुल रॉय. (फोटो- PTI)वहीं, BJP का कहना है कि नए नियम से बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावसुनिश्चित होंगे. पार्टी ने दावा किया कि बंगाल में TMC अपना जन-समर्थन तेजी से खोरही है, इसलिए नियम के विरोध में इस तरह की बातें कर रही है. उधर, चुनाव आयोग ने भीअपने फैसले का बचाव किया. उसका कहना था कि नया नियम इसलिए बनाया गया ताकि हरपॉलिटिकल पार्टी को पोलिंग एजेंट अपॉइंट करने में मदद मिले. ECI का तर्क है किकोविड-19 महामारी में पोलिंग बूथ पर बैठने के लिए लोगों को राजी करना मुश्किल है,इसीलिए नया नियम लाया गया. क्या होता है पोलिंग एजेंट? पोलिंग एजेंट चुनाव वाले दिनमतदाता केंद्र में पार्टी या उम्मीदवार का प्रतिनिधि होता है. चूंकि चुनाव के दिनउम्मीदवार हर पोलिंग बूथ पर खुद मौजूद नहीं रह सकता, इसलिए उसकी तरफ से एक एजेंटअपॉइंट किया जाता है. ECI उम्मीदवार को ये अनुमति देता है कि मतदान प्रक्रिया परनजर रखने के लिए वो अपनी तरफ से एक पोलिंग एजेंट नियुक्त कर सकता है.चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, पोलिंग एजेंट को पता होना चाहिए कि EVM और VVPATके जरिये किस तरह चुनाव कराए जाते हैं. इन मशीनों के इस्तेमाल की जानकारी भी पोलिंगएजेंट को होनी चाहिए. साथ ही, उसे ECI के नियमों से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए.पार्टी और चुनाव उम्मीदवार का प्रतिनिधि होने के नाते पोलिंग एजेंट रिटर्निंग ऑफिसरकी ओर से कराए जाने वाले डेमोन्स्ट्रेशन्स में भाग लेता है. इनमें चुनावी प्रक्रियामें EVM और VVPAT के इस्तेमाल और संचालन के बारे में विस्तार से बताया जाता है.अब चलते-चलते आपको बता दें कि राजस्थान की 3 विधानसभा सीटों पर अप्रैल में उप-चुनावहोने वाले हैं. इनके लिए चुनाव आयोग ने पुराने नियम के तहत ही पोलिंग एजेंट नियुक्तकरने की बात कही है. हालांकि लोकल वोटर नहीं मिलने की सूरत में कैंडिडेट को उसचुनाव क्षेत्र के किसी भी मतदाता को एजेंट बनाने की अनुमति दी गई है.