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मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी क्यों हैं ये नतीजे?

आज लोकसभा चुनाव हो जाएं तो पांच राज्यों में भाजपा को क्यों लगेगा जोर का झटका?

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12 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 12 दिसंबर 2018, 04:19 AM IST)
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विधानसभा चुनाव में हार के बाद ये कयास लगाए जा रहे हैं कि 2014 की तुलना में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में गिरावट आई है.
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सवाल अब बड़े हो चले हैं. सवाल ऐसे जो बीजेपी नेताओं का ब्लडप्रेशर बढ़ाने के लिए काफी हैं. बड़ा सवाल ये है कि पांच राज्यों के चुनाव नतीजों का 2019 में क्या असर होगा? और इसका जवाब हर तरफ से यही आ रहा है कि लोकसभा चुनाव में इन पांच सूबों में भाजपा को तगड़ा झटका लग सकता है. हाल में, चुनाव के दौर से गुजरे 5 राज्यों में लोकसभा की 83 सीटें हैं. साल 2014  में भाजपा ने इन 83 सीटों में से 63 पर जीत दर्ज की थी. इनमें मध्य प्रदेश की 29 में 27, छत्तीसगढ़ की 11 में 10, राजस्थान की 25 में 25 और तेलंगाना में 1 लोकसभा सीट शामिल थी. देखा जाए तो 14 में भाजपा ने एक तरह से झाड़ू लगा दिया था. पर 2019 में 2014 का करिश्मा दोहरा पाना बीजेपी और पीएम मोदी के लिए आसान नहीं होगा. वैसे तो, विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तासीर अलग-अलग होती है. दोनों चुनावों के मुद्दे अलग होते हैं. नेता अलग होते हैं. और लोगों का वोटिंग करने का तरीका भी अलग होता है. फिर भी, विधानसभा चुनाव के इन नतीजों की गूंज आने वाले आम चुनाव में 100 फीसदी सुनाई देगी. इसमें किसी को रत्ती भर संदेह नहीं है. एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर आज चुनाव हो जाएं तो भाजपा को 38 सीटों को नुकसान हो सकता है. वो 63 से 25 सीटों पर आ सकती है. इसी तरह कांग्रेस की लोकसभा सीटें मौजूदा 8 से बढ़कर 41 पर पहुंच सकती हैं. आगे खड़े लोकसभा चुुनावों पर विधानसभा चुनाव नतीजों का क्या असर पड़ेगा, इस पर बात करने से पहले 2014 के नतीजों को याद करना ज़रूरी है.
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में किश्तवाड़ में रैली की थी. ये तभी की तस्वीर है. ऐसा हाई प्रोफाइल कैंपेन चलाने की हिम्मत इस बार इस बार किसी राजनैतिक पार्टी की नहीं हो रही है. (फोटोःपीटीआई)
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में किश्तवाड़ में रैली की थी. ये तभी की तस्वीर है. (फोटोःपीटीआई)

कांग्रेस का क्या हाल हुआ था 2014 में?
साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान इऩ 5 राज्यों में कांग्रेस ने उंगलियों पर गिनने लायक लोकसभा सीटें जीती थीं. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे अहम सूबों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था. मध्य प्रदेश में आज कांग्रेस के खेवनहार बने प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और उनके सामने मुख्यमंत्री पद के तगड़े दावेदार बनकर खड़े ज्योतिरादित्य सिंधिया ही लोकसभा का मुंह देख पाए थे. उसके बाकी सारे रणबांकुरे खेत रहे थे. प्रदेश की 29 सीटों में से 27 भारतीय जनता पार्टी के पाले में गई थीं. इसी तरह, छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस को महज 1 सीट दुर्ग की मिली थी. यहां से पार्टी के दिग्गज नेता ताम्रध्वज साहू ने जीत हासिल की थी. 2014 के चुनाव में कांग्रेस का राजस्थान में सफाया हो गया था. उस वक्त पार्टी को प्रदेश में 25 में से एक भी सीट हासिल नहीं हो पाई थी. बाद में उपचुनाव के दौरान कांग्रेस ने अजमेर और अलवर की लोकसभा सीटों पर जीत जरूर हासिल की थी. उपचुनाव में पार्टी के रघु शर्मा ने अजमेर में और करन सिंह यादव ने अलवर में जीत का झंडा गाड़ा था. मिजोरम की इकलौती लोकसभा सीट पर कांग्रेस के सीएल रुआला ने जीत दर्ज की थी. तेलंगाना की 17 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस के हाथ 2 सीटें आई थीं.
अब मध्य प्रदेश में क्या हो सकता है?
जानकारों ने विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों को मिले वोटों के आधार पर लोकसभा सीटों का मोटा-मोटा अंदाजा लगाया है. इसके मुताबिक अगर आज की तारीख में लोकसभा चुनाव हो जाएं, तो मध्य प्रदेश में कांग्रेस को 16 सीटें मिल सकती हैं. वहीं, 2014 में 29 में 27 सीटें जीतने वाली भाजपा 13 सीटों पर सिमट सकती है. एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि कांग्रेस भाजपा से उज्जैन और ग्वालियर जैसी लोकसभा सीटें आसानी से छीन सकती है. उज्जैन की 8 में 5 विधानसभा सीटें कांग्रेस के खाते में गई हैं.
मध्य प्रदेश में अब कांग्रेस का पलड़ा भारी हो चुका है.
मध्य प्रदेश में अब कांग्रेस का पलड़ा भारी हो चुका है.

राजस्थान में क्या आसार हैं?
साल 2014 के आम चुनाव में 25-0 से गोल खाने वाली कांग्रेस की राजस्थान में बल्ले-बल्ले हो सकती है. फिलवक्त चुनाव होने पर कांग्रेस को प्रदेश में 25 में से 13 सीटें हासिल हो सकती हैं. और भाजपा को 12 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है. राजस्थान में वैसे तो इस वक्त कांग्रेस के दो सांसद हैं. एक हैं अजमेर से रघु शर्मा और दूसरे हैं अलवर से डॉक्टर करन सिंह यादव. कांग्रेस के ये दोनों सांसद उपचुनाव में जीतकर आए थे. मौजूदा विधानसभा चुनाव में इन दोनों सांसदों को पार्टी ने विधायकी के लिए मैदान में उतारा था. खास बात ये है कि सांसद रघु शर्मा तो केकरी से चुनाव जीत गए हैं. मगर डॉक्टर करन सिंह यादव चुनाव हार गए हैं. वे किशनगढ़ में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार से चुनाव हार गए हैं. साल 2019 के लिहाज से एक रिपोर्ट और आई है. इसमें कहा गया है कि आज चुनाव हो जाएं, तो केंद्रीय खेल राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के सामने मुश्किल पेश आ सकती है. जयपुर ग्रामीण, जहां से राठौड़ सांसद हैं, वहां की 7 में से 4 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की है.  कांग्रेस पार्टी जयपुर की लोकसभा की सीट भी जीत सकती है.
अशोक गहलोत-सचिन पायलट की बदौलत कांग्रेस को राजस्थान में भाजपा पर बढ़त हासिल हो चुकी है. (फोटोः FB)
अशोक गहलोत-सचिन पायलट की बदौलत कांग्रेस को राजस्थान में भाजपा पर बढ़त हासिल हो चुकी है. (फोटोः FB)

छत्तीसगढ़ का सीन कैसा होगा?
2014 के चुनाव में छत्तीसगढ़ की 11 में से 10 सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थीं. सिर्फ एक सीट दुर्ग की ऐसी थी, जहां पार्टी के नेता ताम्रध्वज साहू ने जीत हासिल की थी. एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर आज की तारीख में लोकसभा चुनाव हो जाएं, तो भाजपा का डब्बा गोल हो सकता है. कांग्रेस 11 में से 10 सीटें जीत सकती है. एक सीट जांजगीर चंपा में बहुजन समाज पार्टी के जीतने की संभावना बन रही है.
के चंद्रशेखर राव.
के चंद्रशेखर राव.

तेलंगाना में क्या होने वाला है?
गुजरे चुनाव में यानी 2014 के आम चुनाव में तेलंगाना की 17 में से कांग्रेस ने 2 सीटों पर जीत हासिल की थी.  नागरकुरनूल से कांग्रेस के नंदी येल्ला और नालगोंडा से उसके उम्मीदवार जी. सुकेंद्र रेड्डी ने विजयश्री प्राप्त की थी. तेलंगाना राष्ट्र समिति यानी के चंद्रशेखर राव की पार्टी ने 11, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईम ने 1 और भाजपा ने 1 सीट सिकंदराबाद पर जीत हासिल की थी. आज चुनाव होने की हालत में कांग्रेस को यहां दो सीटें मिलती दिख रही हैं. मगर भाजपा का यहां खाता खुलना भी मुश्किल नजर आ रहा है.  प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा में महज 1 सीट मिली है.
मिजोरम में क्या होगा?
मिजोरम की एक मात्र सीट कांग्रेस के पीसीएल रुआला ने जीती थी. आज चुनाव होने की दशा में ये सीट मिजो नेशनल फ्रंट के खाते में जा सकती है. पार्टी के नेता जोरामथांगा एनडीए के रास्ते मोदी के पाले में जा सकते हैं.


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