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कौन हैं 10 बार के विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय? जिन्हें ममता ने CM शुभेंदु के सामने खड़ा किया

West Bengal Legislative Assembly में अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) विपक्ष की भूमिका निभाएगी. पार्टी ने Sobhandeb Chattopadhyay को विपक्ष का नेता चुना है. टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इसकी जानकारी दी.

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10 मई 2026 (अपडेटेड: 10 मई 2026, 12:49 PM IST)
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शोभनदेव चट्टोपाध्याय (दाएं) टीएमसी के कद्दावर नेता हैं. (PTI/Facebook)
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पश्चिम बंगाल विधानसभा में कभी 200 से ज्यादा सीटों के साथ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आवाज गूंजती थी. आज वहां की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. 2026 के नतीजों में पार्टी महज 80 सीटों पर सिमट गई. अब टीएमसी सदन में विपक्ष की भूमिका निभाएगी. पार्टी ने 18वीं विधानसभा में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुना है. TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी.

विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार को घेरने में सबसे बड़ी जिम्मेदारी शोभनदेव चट्टोपाध्याय के ही कंधों पर होगी. अन्य TMC नेताओं को भी जिम्मेदारी मिली है. TMC ने असीमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय को विपक्ष का डिप्टी लीडर घोषित किया है. वहीं, फिरहाद हकीम विपक्ष के मुख्य सचेतक (व्हिप) होंगे.

शुभेंदु अधिकारी के पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के एक दिन बाद यह फैसला आया है. ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं. अब वे विधानसभा की सदस्य नहीं हैं. ऐसे में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाया गया है.

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TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी. (फोटो X/@AITCofficial)
कौन हैं शोभनदेव चट्टोपाध्याय?

82 साल के शोभनदेव चट्टोपाध्याय TMC के सबसे कद्दावर नेताओं में शामिल हैं. उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से साइंस और लॉ (LLB) की पढ़ाई की है. राजनीति में आने से पहले वे एक प्रोफेशनल बॉक्सर और ट्रेड यूनियन नेता थे. 1960 के दशक में शोभनदेव ने कांग्रेस के साथ राजनीति शुरू की और 1991 में पहली बार विधायक बने. तब से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार 10 बार विधायकी जीती. 

वे कांग्रेस में रहते हुए ममता बनर्जी के करीबी साथी थे. ममता ने जब कांग्रेस का दामन छोड़ा तो शोभनदेव भी उनके साथ चले आए और TMC के संस्थापक सदस्यों में से एक बन गए. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, शोभनदेव पार्टी के पहले निर्वाचित विधायक (1998) भी रहे हैं. उन्होंने अलग-अलग समय पर रासबिहारी (2001, 2006, 2011, 2016), भवानीपुर (2021), खरदाह (2021 उपचुनाव) और अब बालीगंज (2026) जैसी अलग-अलग सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन हर बार जीत हासिल की.

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पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (बीच में) के साथ शोभनदेव चट्टोपाध्याय (सबसे बाएं) (फोटो X/@AITCofficial)

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ममता के लिए भवानीपुर सीट त्यागी

2021 के चुनावों में BJP के शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हरा दिया था. तब भवानीपुर से जीतने वाले शोभनदेव ने अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया, ताकि ममता बनर्जी वहां से उपचुनाव लड़कर सदन की सदस्य बन सकें. ममता सीएम बनीं, भवानीपुर से लड़ीं और फिर विधानसभा की सदस्य बनीं.

2026 में शोभनदेव ने बालीगंज विधानसभा सीट से 61,476 वोटों के अंतर से चुनाव जीता है. इस चुनाव में उन्होंने BJP की शतरूपा को हराया. TMC की श्रमिक शाखा, इंडियन नेशनल तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTTUC) उन्हीं की सोच का नतीजा है. वे अब तक कृषि, बिजली और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाल चुके हैं.

वीडियो: नेतानगरी: बंगाल में ममता क्यों हारीं? शुभेंदु को CM बनाना BJP का दांव या मजबूरी? इनसाइड स्टोरी समझिए

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