लम्बी खींचतान के बाद रविवार को अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी का घोषणा-पत्र जारीकिया. कई सारे वादे किए.घोषणा पत्र की बड़ी बातेंपत्थर वाली सरकारअखिलेश हल्के-फुल्के अंदाज में स्पीच दे रहे थे. उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती परतंज कसते हुए उनकी सरकार को 'पत्थर वाली सरकार' कहा. दुनिया जानती है कि मायावती नेलखनऊ को खुद की, अंबेडकर की, कांशीराम की और पार्टी के चुनाव निशान हाथी कीमूर्तियों से ढंक दिया था. मायावती पर फिजूलखर्ची और घोटाले के आरोप लगे. जब अखिलेशयादव नए-नए मुख्मंत्री बने, तब उन्होंने मायावती पर 40,000 करोड़ के 'मूर्ति घोटाले'का आरोप जड़ा था. इसमें मूर्तियों को लगाने के लिए इस्तेमाल हुई ज़मीनों की रकम भीशामिल थी.लेकिन ये मूर्तियों की कहानी शुरू कहां से हुई थी और कौन था इन्हें बनाने वाला?18 अक्टूबर 2006 का दिन था. लखनऊ का प्रेरणा-स्थल पार्क. पूरा शहर नीले रंग से पटापड़ा था. यहां मायावती के मेंटर रहे कांशीराम की अस्थियों का कलश लाया गया था. इसपार्क में मायावती, भीम राव आंबेडकर, कांशीराम की मूर्तियां पहले से लगी हुई थीं.इन्हें बनाया था मायावती के ख़ास मूर्तिकार श्रवण प्रजापति ने.श्रवण प्रजापति. फोटो- फेसबुक2007 के बाद चमके श्रवण प्रजापतिकांशीराम की मौत के बाद ''सिम्पैथी वोट'' एकतरफ़ा मायावती के फेवर में जाने के पूरेआसार थे. हुए भी. कांशीराम की अस्थियों का कलश शहर के बीचो बीच बने प्रेरणा स्थलमें रखा गया था.कांशीराम और मायावती, फाइल फोटोयहां फैसला हुआ कि कांशीराम की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित नहीं किया जाएगा.उन्हें प्रेरणा स्थल पर 'दर्शन' के लिए रखा जाएगा. मायावती ने भीड़ के सामने एकस्पीच में कांशीराम की वसीयत पढ़ी और ऐलान किया कि कांशीराम उन्हें अपना राजनैतिकवारिस बना गए हैं. चुनाव होने वाले थे इसलिए मायावती ने वोटों को साधने का भी मौकानहीं छोड़ा. कहा, ''देश में महज़ मुलायम सिंह यादव और प्रधानमंत्री अटल बिहारीवाजपेयी ही उनकी (कांशीराम) मृत्यु पर नहीं आए. इससे दलित समुदाय की भावनाओं को ठेसपहुंची, जो केंद्र और राज्य दोनों में बसपा को सत्ता में लाकर इस अपमान का बदलालेगा.''सहानुभूति लहर को भुनाने के लिए मायावती ने कांशीराम, अंबेडकर और खुद की ज्यादा सेज्यादा मूर्तियां बनाने का ऑर्डर दिया. ये ऑर्डर भी श्रवण प्रजापति को ही मिला. तबबड़ी मात्रा में बसपा कार्यकर्ता श्रवण प्रजापति के पास जाया करते थे ताकि उससेमूर्तियां खरीद सकें.बाद में बसपा सरकार आने पर श्रवण ने जमकर मूर्तियां बनाईं. उसे एक मूर्ति के लाखोंरूपए मिलते थे.मायावती की 'स्पेशल' मूर्तियां बनाने के मिले निर्देशSymbolic Imageअसल में मायावती ने मूर्तियां बनवाने की शुरुआत 1995 में सीएम बनने के बाद ही कर दीथी. श्रवण प्रजापति को मायावती की जो पहली मूर्ति बनाने का ऑर्डर मिला वो 15 मीटरकी एक ताम्बे की मूर्ति थी. उसे साफ निर्देश थे कि मायावती की मूर्ति ऐसी बननीचाहिए जिसमें 'बहन जी' पतली और लम्बी दिखाई दें. ये भी कि मायावती की गर्दन लम्बीदिखनी चाहिए और गाल बहुत फूले हुए ना हों. जब तोड़ी गई मायावती की सफ़ेद मूर्तिजुलाई 2012 में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर मायावती की एकसफ़ेद संगमरमर की मूर्ति तोड़ी गई थी. रातों रात अफसरों ने इसकी जगह नई मूर्ति लगवादी थी.ये मूर्ति भी श्रवण प्रजापति ने ही बनाई थी. इस मूर्ति को इटालियन संगमरमर से बनायागया था. मूर्ति टूटने के बाद श्रवण कुमार से कांटेक्ट किया गया. उसने कहा कि नईमूर्ति बनाने में तीन दिन लग सकते हैं. श्रवण ने फाइबर की मूर्ति लगाने का आइडियादिया था. अफसर इसके लिए तैयार नहीं थे.तब श्रवण को याद आया कि गोदाम में मायावती की 6.6 फीट ऊंची मूर्ति रखी है. इसमूर्ति को कांशीराम इको पार्क में लगाया जाना था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने किसी भीतरह की मूर्ति पर स्टे लगा दिया था. इसके बाद से ही ये मूर्ति श्रवण प्रजापति पासथी और इसे सामाजिक परिवर्तन स्थल में लगा दिया गया. श्रवण प्रजापति ने हाथियों कीभी बहुत सी मूर्तियां बनाईं.मूर्ति घोटाले में श्रवण ने लगाया था अफसरों पर घूस लेने का आरोप2012 में श्रवण प्रजापति ने अधिकारियों पर घूस मांगने का आरोप लगाया. उसने तब के IGआशुतोष पाण्डेय को एक लेटर लिखा कि उसे उगाही की धमकियां मिल रही हैं. ये भी कहा किउसकी जान को खतरा है. श्रवण ने पुलिस को बताया कि लवली सिंह नाम का आदमी एक पुलिसअफसर के कहने पर मुझसे 15 लाख रूपए मांग रहा है. लवली सिंह ने धमकाया है कि तूनेमायावती के राज में बहुत पैसे कमाए हैं. अगर तूने मना किया तो एनकाउंटर में तुझेमार डाला जाएगा.मायावती की मूर्ति के साथ श्रवण प्रजापतिये पहली बार नहीं था कि श्रवण ने ऐसा कहा था. इससे पहले भी 19 फरवरी, 2008 कोप्रजापति ने दावा किया कि उसके घर पर हमला किया गया था. प्रजापति पुलिस से सुरक्षामांग रहा था. बड़ी बात ये है कि इससे पहले की बसपा सरकार में उसे गनर दिए गए थे.बाद में अखिलेश की सरकार आने के बाद पुलिस ने मूर्ति घोटाले के मामले में यूपीराजकीय निर्माण निगम लिमिटेड पर छापा मारा, जिससे अफसरों और ठेकेदारों के बीचसांठगांठ होने से जुड़े डॉक्यूमेंट मिले थे.श्रवण प्रजापति ने दूसरे भी कई नेताओं की मूर्तियां बनाई हैं जिसमें सद्दाम हुसैनकी मूर्ति भी शामिल है. इस मूर्ति को बाद में ईराक में एक प्रदर्शन में गिरा दियागया था.फिलहाल श्रवण 'बहनजी' का कट्टर भक्त है. उन्हें सीएम बनाने के लिए प्रचार में लगाहुआ है और उन्हें एक दिन प्रधानमंत्री बनते हुए देखना चाहता है.श्रवण प्रजापति बसपा के प्रचार में लगे हैं.फोटो- फेसबुक--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी निशांत ने की है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें-अखिलेश ने आज खुद सुनाया अपनी बेइज़्ज़ती का किस्साउत्तर प्रदेश की जनता इतनी बेवकूफ क्यों है?UP इलेक्शन के पहले फेज़ में किसका है ‘अपर 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