नेताजी की पार्टी में उनके लड़के ने ही पलीता लगा दिया है. मुलायम सिंह यादव कहे जारहे हैं कि पार्टी तो मैंने बनाई है. मगर जनमत टीपू भैया के साथ है. सपा के अंदर चलरहे इस संग्राम में स्पष्ट है कि तटस्थ रहने वालों के लिए कोई जगह नहीं है. हर किसीको कोई न कोई पक्ष चुनना है. और इस बार 'लड़के हैं, गलती हो गई' जैसे जुमले बोल करछूट भी नहीं मिलेगी. हम आपकी सुविधा के लिए बता दे रहे हैं. कि इस समय कौन किस खेमेहै और क्यों है.1. रेवती रमण सिंहइलाहाबादी हैं. सपा के संस्थापकों में से एक हैं. सपा के अलावा दूसरी पार्टियों केनेताओं से अच्छी जान-पहचान है. फिलहाल पुराना पाला छोड़कर अखिलेश भैया के साथ मेंहैं.2. किरणमय नंदायूपी की पार्टी के बंगाली बाबू. पश्चिम बंग की लेफ्ट फ्रंट सरकार में मत्स्य पालनमंत्रालय की ज़िम्मेदारी उठाए रहे. 2010 में सपा के महासचिव बनकर अमर सिंह कोरिप्लेस करने वाले नंदा अखिलेश के करीबी हैं. रामगोपाल के बाद इन्हें भी मुलायमसिंह ने पार्टी से बाहर किया है.3. नरेश अग्रवालहरदोई से आने वाले नरेश अग्रवाल पार्टी का सबसे बड़ा वैश्य चेहरा हैं. ज़मीन परपकड़ ऐसी है कि अब तक कुल 7 बार विधायक बन चुके हैं. फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं.पार्टी से मुलायम सिंह ने अभी ताज़ा-ताज़ा निकाला है.4. गायत्री प्रजापतिमुलायम सिंह के दूसरे बेटे प्रतीक के करीबी हैं. इनको सितम्बर में अखिलेश यादव नेभ्रष्टाचार के आरोपों के चलते बाहर कर दिया था, मगर मुख्यमंत्री जी सारा ज़ोर लगाकरभी मुलायम सिंह के खास नेता को बाहर नहीं कर पाए.नेता जी के चरणों में गायत्री प्रजापति5. आशू मलिकआपको याद तो होगा कि कुछ हफ्तों पहले सपा की बैठक में अखिलेश यादव ने शिवपाल सेमाइक छीन लिया था. शिवपाल कह रहे थे कि उन्हें एक मुस्लिम सांसद ने चिट्ठी लिख करकहा है कि मुस्लिम पार्टी से दूर हो रहे हैं. अखिलेश ने माइक छीनकर सांसद का नामपूछा था. कहा जाता है कि आशू मलिक ही वो सांसद थे. अखिलेश को मेट्रो में मदद करनेसे लेकर अखलाक के परिवार को लखनऊ पहुंचाने वाले आशू ही थे. उनकी बेबाकी और उनकातेज़ी से बढ़ता कद ही आशू की समस्या बना. आज़म खान का उनसे मतभेद जग जाहिर है. मानाजाता है कि मुलायम और अमर सिंह के करीबी आशू के ही हवाले से सीएम को औरंगज़ेब कहागया.6. उदय प्रताप सिंहकॉलेज के दिनों में मुलायम सिंह को अंग्रेज़ी पढ़ा चुके हैं. कवि व्यक्ति हैं औरपूरे खानदान में नेताजी के गुरु जी के तौर पर इज़्जत पाते हैं. अखिलेश की मीटिंगमें मौजूद थे.7. बलराम यादवइन्हें अखिलेश ने कौमी एकता दल से विलय करवाने के चक्कर में सस्पेंड कर दिया था.मुलायम सिंह के खास थे, मगर इतवार को अखिलेश के साथ दिखाई दिए. दरअसल इनके लड़केसंग्राम का नाम अखिलेश यादव की टिकट वाली लिस्ट में है.8. आज़म खानसपा के सबसे बड़े मुस्लिम नेता का झुकाव अखिलेश यादव की तरफ दिख रहा है मगर अभी भीउनकी स्थिति स्पष्ट नहीं है. भैंसें तलाश करवाने और विवादास्पद बयान देने वाले आज़मखां की बड़ी दिक्कत नेताजी के पास अमर सिंह का होना है. जया प्रदा, रामपुर और सपासे निकाले हुए अमर सिंह तो याद हैं न.9. रामगोपाल यादवनेता जी के चचेरे भाई हैं. प्रोफेसर साहब के नाम से जाने जाते हैं. इनके बारे मेंयूपी के सियासी गलियारों में एक कहावत है कि जिसकी तरफ रामगोपाल होंगे, आखिरी फैसलाउसके हक में होगा. यादव परिवार से इन सबके अलावा धर्मेंद्र यादव (बदायूं से सांसद),अक्षय यादव (फिरोज़ाबाद से सांसद), तेज प्रताप यादव (मैनपुरी से सांसद), अंशुल यादव(इटावा जिला पंचायत अध्यक्ष) और परिवार की महिलाओं ने किसी भी बैठक को जॉइन नहींकिया. शिवपाल यादव के साथ उनके सुपुत्र आदित्य भी हैं. जो ताऊ मुलायम के घर हो रहीबैठकों में उनका साथ दे रहे हैं. इस पूरे विवाद में कुछ और नाम भी हैं, जो फिलहालराष्ट्रीय राजनीति में कम चर्चित हैं मगर उनकी भूमिका तगड़ी है. सुनील सिंह साजन,आनंद भदौरिया, संजय लाठर, उदयवीर सिंह, अरविंद यादव पार्टी में अखिलेश के खास मानेजाने वाले युवा चेहरे हैं. इन सबको पार्टी से बाहर कर दिया गया था. अब सूत्र बतारहे हैं कि अखिलेश यादव इन सबकी वापसी करवाने वाले हैं.कुल मिला कर पलड़ा अखिलेश यादव का भारी है. युवा जोश और साफ-सुथरी छवि वाले टीपू केसाथ नए लड़के तो हैं ही, नरेश अग्रवाल और उदयप्रताप सिंह जैसे तमाम पुराने नेता भीहैं जिनके लड़कों का कैरियर अखिलेश की छत्र-छाया में फल-फूल रहा है.-------------------------------------------------------------------------------- https://youtu.be/AJCmImuMRM8?list=PL1BQkm1ZUCaWfqKAzi3GF9gLJ2PNTmwHq--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें :शिवपाल यादव कल शाम को पत्रकारों के साथ गाना गा रहे थे, आप भी सुनिएअमर सिंह ने कहा, 'दर-दर की ठोकरों मुझे इतना बता दो मेरा कसूर क्या है'शिवपाल-अमर सिंह का पत्ता कटा और मुलायम सिंह 'सपा' के 'आडवाणी' हो गए