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पश्चिम बंगाल में ये 5 चीजें तय करेंगी कि चुनाव कौन जीतेगा, TMC या BJP?

West Bengal election results: बंगाल में दो चरणों में हुए चुनावों में अब तक की सबसे अधिक वोटिंग हुई. इस बार लगभग 92.5% वोटिंग हुई जो अपने आप में रिकॉर्ड है. अधिकतर एग्जिट पोल्स ने कांटे की टक्कर का अनुमान लगाया था. इनमें से कई ने BJP को बढ़त दी है.

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4 मई 2026 (पब्लिश्ड: 07:50 AM IST)
five key factors that can affect bengal election result 2026
बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने वाले हैं (PHOTO-AajTak)
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बंगाल विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की नजर है. इस बार अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) चीफ ममता बनर्जी अपना किला बचा पाएंगी या भाजपा इस बार उनका किला भेदने में सफल रहेगी. इस चुनाव में SIR, CAA, बॉर्डर के मुद्दे, महिला सुरक्षा से लेकर रोजगार के मुद्दे अहम थे. तो समझते हैं 5 ऐसे पॉइंट्स, जो इस बंगाल चुनाव का पूरा गणित तय करेंगे.

SIR का बवाल

बंगाल में दो चरणों में हुए चुनावों में अब तक की सबसे अधिक वोटिंग हुई. इस बार लगभग 92.5% वोटिंग हुई जो अपने आप में रिकॉर्ड है. अधिकतर एग्जिट पोल्स ने कांटे की टक्कर का अनुमान लगाया था. इनमें से कई ने BJP को बढ़त दी है. इस बार 294 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव ऐसे हालात में हुए, जो पहले कभी नहीं देखे गए थे. ये चुनाव चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट के विवादित 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के बाद हुए. यह प्रक्रिया कई महीनों तक चली, जिसमें लगभग 91 लाख वोटरों के नाम हटाए गए. इनमें 27 लाख से ज्यादा ऐसे वोटर भी शामिल थे, जिनके मामलों पर 19 ट्रिब्यूनल अनिश्चित काल तक सुनवाई करते रहेंगे.

हालांकि EC ने नवंबर 2026 से आठ अन्य राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में भी SIR लागू किया था, लेकिन बंगाल में यह प्रक्रिया कई मायनों में खास थी. इसमें माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात करने से लेकर ट्रिब्यूनल बनाने तक की प्रक्रिया अपनाई गई. ममता बनर्जी शुरू से ही SIR का विरोध कर रही हैं. वो EC पर BJP के इशारे पर काम करने का आरोप लगा रही हैं. उन्होंने रिकॉर्ड वोटिंग को SIR और वोटरों के नाम हटाने के खिलाफ जनता का विरोध बताया है. दूसरी ओर BJP ने वोटर लिस्ट से कथित तौर पर बिना दस्तावेज वाले बांग्लादेशी प्रवासियों के नाम हटाने के लिए SIR की तारीफ की है. पार्टी ने इस रिकॉर्ड वोटिंग को TMC सरकार के खिलाफ एक जनादेश भी बताया है.

TMC के लिए सबसे बड़ी परीक्षा

वोटिंग के एक दिन बाद एक वीडियो मैसेज में ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनकी पार्टी 200 सीटों का आंकड़ा पार कर लेगी और शायद 230 तक भी पहुंच सकती है. बहुमत का आंकड़ा 148 है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक TMC के सूत्रों का कहना है कि पार्टी 200 के करीब सीटें हासिल करने का टारगेट बना रही है. ऐसा किया जा रहा है ताकि वह बाद में ऑपरेशन लोटस के जरिए दलबदल कराने की BJP की कथित कोशिशों से खुद को बचा सके.

2021 के विधानसभा चुनावों में TMC ने लगभग 48% वोट शेयर के साथ 213 सीटें जीती थीं, जबकि BJP को 38% से ज्यादा वोटों के साथ 77 सीटें मिली थीं.

ममता बनर्जी के लिए चुनौती

इस चुनाव को ममता बनर्जी के जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है. ममता अपनी जुझारू राजनीति के लिए जानी जाती हैं. अगर वह चौथी बार चुनाव जीतने में कामयाब हो जाती हैं, तो राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी नेताओं के बीच उनका कद और भी बढ़ जाएगा. इस बार अपने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में भी ममता को अपने ही पूर्व सहयोगी और अब BJP नेता शुभेंदु अधिकारी से कड़ी चुनौती मिल रही है. 29 अप्रैल को मतदान के दिन भी इस क्षेत्र में काफी हंगामा देखने को मिला. मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सुरक्षा बलों और चुनाव आयोग (EC) पर एक दिन पहले अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को परेशान करने और हिरासत में लेने का आरोप लगाया.

ममता 2011 से ही भवानीपुर सीट जीतती आ रही हैं. शुभेंदु पूर्वी मेदिनीपुर में अपने गृह क्षेत्र नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ रहे हैं, जहां उन्होंने 2021 के चुनावों में मुख्यमंत्री को लगभग 1,900 वोटों से हराया था. नंदीग्राम में हार के बाद, उसी साल ममता ने भवानीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में 58,835 वोटों से जीत हासिल की थी. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखकर BJP का हौसला बढ़ा. तब भवानीपुर में TMC की बढ़त घटकर 8,297 वोट रह गई थी.

भाजपा के लिए चुनौती

2021 में BJP ने 77 सीटें जीती थीं. ये बंगाल में उसका अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन था. लिहाजा भाजपा मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरी, और उसने CPI(M) और कांग्रेस दोनों को पीछे छोड़ दिया. इस बार, BJP ने न सिर्फ 100 सीटों का आंकड़ा पार करने के लिए, बल्कि बहुमत हासिल करने के लिए भी पूरी ताकत झोंक दी है. BJP के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि 150 सीटें जीतने से पार्टी की स्थिति और मजबूत होगी, और उनका दावा है कि इसके बाद TMC पूरी तरह बिखर जाएगी.

कांग्रेस और लेफ्ट का हाल 

2021 के चुनाव में जब कांग्रेस और CPI(M) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा एक गठबंधन के तौर पर चुनाव लड़े थे, तब दोनों ही अपना खाता खोलने में नाकाम रहे थे. इस बार, कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ रही है. पार्टी को उम्मीद है कि उसे मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर में कुछ सीटें मिलेंगी. ये तीनों मुस्लिम-बहुल सीमावर्ती जिले हैं. राज्य में राहुल गांधी की कई जनसभाओं के साथ, कांग्रेस पार्टी मुस्लिम समुदाय के लिए एक विकल्प बनने की कोशिश कर रही है. यह समुदाय अब तक TMC का जोरदार समर्थन करता आया है.

CPI(M) ने भी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की हर मुमकिन कोशिश की है. बंगाल में उसने 34 साल तक राज किया था, जिसके बाद 2011 में ममता बनर्जी सत्ता में आईं. पार्टी के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा इस बार फिर इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहा है. CPI(M) ने पूरे राज्य में अपने कई प्रमुख युवा नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा है. इनमें मीनाक्षी मुखर्जी, कलातन दासगुप्ता, दीप्सिता धर, मयूख बिस्वास और अफरीन बेगम शामिल हैं.

वीडियो: पश्चिम बंगाल के फलता सीट पर दोबारा वोटिंग क्यों होगी?

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