बंगाल: 'हमारे पास दीदी है' नारे में दम! वोटर्स की TMC से दूरी या ममता अब भी मजबूरी?
West Bengal Election: बंगाल चुनाव में Mamata Banerjee ने BJP को 'दिल्ली' बताने की पूरी कोशिश की है. माने, ऐसा नैरेटिव कि BJP आई, तो बंगाल सरकार कोलकाता नहीं, बल्कि दिल्ली से चलेगी. एक ऐसी 'दिल्ली' जिसके प्रभाव का विरोध बंगाल पिछली आधी सदी से करता आ रहा है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का कैंपेन सोमवार, 27 अप्रैल को खत्म हो जाएगा. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कड़ा मुकाबला है. अब देखना होगा कि 4 मई को चुनावी जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा. लेकिन एक बात तय है कि ममता बनर्जी के समर्थकों और विरोधियों के लिए 'दीदी' यानी ममता ही सबसे बड़ा मुद्दा हैं.
कांग्रेस से निकलकर सड़क पर संघर्ष करने वाली ममता बनर्जी. जिन्होंने दशकों की कड़ी मशक्कत के बाद बंगाल में 34 साल से सत्ता पर काबिज वाम सरकार को उखाड़ फेंका. लगातार तीन बार से मुख्यमंत्री हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'प्रचंड लहर' के बावजूद ममता ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों को मिलाकर पांच चुनावों में BJP को धूल चटाई.
ऐसे में क्या बंगाल के लोग सत्ता परिवर्तन नहीं चाहते? क्या अब वे ममता बनर्जी के बजाय कोई और मुख्यमंत्री नहीं चाहते? इस तरह के सवालों को टटोलने के लिए भवानीपुर चलते हैं. ममता बनर्जी भवानीपुर से ही विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की कंट्रीब्यूटिंग एडिटर नीरजा चौधरी ने एक आर्टिकल में भवानीपुर में महिला मतदाताओं के रुझान पर चर्चा की है. ममता बनर्जी के घर से कुछ सौ मीटर की दूरी पर महिलाओं का एक ग्रुप आसमान की ओर उंगली उठाते हुए कहता है,
"4 मई को क्या होगा, इसका फैसला तो ईश्वर ही करेगा."
जैसे ही वे बातचीत में घुलने-मिलने लगती हैं, उनमें से एक अपनी उंगलियां अपने होठों पर रखती है और फुसफुसाते हुए कहती है,
"हम बदलाव चाहते हैं... और इसके कारण सबको पता हैं."
ठीक उसी समय, सड़क के दूसरी तरफ से आती हुई एक कमजोर, बुजुर्ग महिला काफी जोर से कहती है,
भवानीपुर की अहमियत"इस बार वे (चुनाव में) हारने वाली हैं."
ये आवाज भवानीपुर से आई है. दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर इलाके में हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर ममता बनर्जी के दो कमरों वाला घर है. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ममता इसी घर में रहती आई हैं. जब उन्होंने वाम मोर्चे के 34 साल के शासन को खत्म किया, तो 2011 में उपचुनाव में इसी इलाके ने ममता बनर्जी को विधानसभा भेजा था.
पांच साल बाद भी इसी क्षेत्र ने उन्हें दोबारा चुना. 2021 में ममता ने नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा, जिसमें BJP के सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें हरा दिया. तब भवानीपुर ने फिर उपचुनाव के जरिए ममता को जिताकर विधानसभा भेजा.
भवानीपुर बंगाल के लिए महज एक विधानसभा क्षेत्र नहीं है, यह प्रदेश की राजनीति के लिए अहम पड़ाव भी है. अगर आप इसकी गलियों से गुजरेंगे, तो आपको एल्गिन रोड पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का घर मिलेगा. इसी इलाके के एक साधारण से घर में मुख्यमंत्री बनने से पहले ज्योति बसु भी रहा करते थे.
कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे भी भवानीपुर में रहते थे, जिनका निवास स्थान लाल रंग के बाहरी हिस्से वाली बड़ी इमारत रही. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पुश्तैनी घर भी इसी इलाके में है. फिल्म स्टार उत्तम कुमार भी भवानीपुर में रहते थे. देवी काली का मशहूर कालीघाट मंदिर भी यहीं है. भवानीपुर एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जिसने बंगाल की सोच और इतिहास दोनों पर असर डाला है.
ममता का बंगाल वाला ‘राष्ट्रवाद’ममता बनर्जी के घर से बस कुछ ही कदम की दूरी पर बातचीत हुई. दूसरे चरण के तहत बुधवार, 29 अप्रैल को एक युवा महिला पहली बार वोट डालेंगी. उनका सवाल है,
"अब जब भी हमें कोई दिक्कत होती है, तो हम दीदी के पास जाते हैं. अगर BJP सत्ता में आ गई, तो क्या मदद मांगने के लिए हमें दिल्ली जाना पड़ेगा?"
बंगाल चुनाव में ममता ने BJP को 'दिल्ली' बताने की पूरी कोशिश की है. ऐसा नैरेटिव कि BJP आई, तो बंगाल सरकार कोलकाता नहीं, बल्कि दिल्ली से चलेगी. एक ऐसी 'दिल्ली' जिसके प्रभाव का विरोध बंगाल पिछली आधी सदी से करता आ रहा है. उन्होंने 'B' कार्ड खेला है. यानी बंगाली राष्ट्रवाद का सहारा लेकर BJP को पीछे धकेला है.
हर जगह नुक्कड़ सभाओं में TMC नेताओं ने लोगों को चेतावनी दी है कि अगर BJP सत्ता में आती है, तो बंगाल की संस्कृति और अस्मिता खो सकती है. यहां की सांस्कृतिक प्रथाएं, खान-पान की आदतें और पूजा-पाठ के तरीके बदल जाएंगे.
इस हमले का जवाब देने के लिए BJP नेता अनुराग ठाकुर कैमरे के सामने ही मछली खाते दिखे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया कि अगर BJP सत्ता में आई, तो CM वही बनेगा जिसका जन्म बंगाल में हुआ हो, जिसने बंगाल में पढ़ाई की हो, और जो बंगाली बोलता हो.
TMC के साथ महिला और अल्पसंख्यकों का मजबूत वोट बैंकइंडियन एक्सप्रेस ने कोलकाता और दक्षिण 24 परगना के कैनिंग पुरबा और कैनिंग पश्चिम निर्वाचन क्षेत्रों के गांवों की महिलाओं से भी बात की. यह इलाका TMC का गढ़ माना जाता है, क्योंकि इस बार 'महिला' वोट दीदी के लिए और भी ज्यादा अहमियत रखता है. ममता का M (महिला) + M (अल्पसंख्यक) वोट बैंक पहले भी उन्हें जीत दिलाता रहा है. ऐसा लगता है कि इस बार भी अल्पसंख्यक समुदाय पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ा है.
कई महिलाएं ममता बनर्जी की डटकर लड़ने की क्षमता की तारीफ करती हैं. भवानीपुर की प्यारा बागान झुग्गी बस्ती में रहने वाली एक महिला कहती है कि वह TMC को ही वोट देगी, क्योंकि दीदी ने उन्हें बहुत सारी सुविधाएं दी हैं. जैसे 'लक्ष्मीर भंडार' योजना, जिसके तहत अनुमानित 2.4 करोड़ महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये मिलते हैं.
लेकिन वह यह भी मानती है कि कुछ महिलाएं, इस बार दीदी को वोट नहीं देंगी. उन्होंने कहा कि शायद हर 10 में से एक या दो महिलाएं इस बार ममता बनर्जी को वोट नहीं देंगी. ये वो महिला वोटर्स हैं जिन्होंने पिछली बार उनका समर्थन किया था. उन्होंने कहा,
“लेकिन यह दीदी का ही राज्य है और वह फिर से सत्ता में आएंगी. सरकार बदलेगी, पर धीरे-धीरे बदलेगी.”
जो महिलाएं बदलाव के बारे में सोच रही हैं, उसकी वजह यह है कि वे और भी ज्यादा कुछ चाहती हैं. SSKM सरकारी अस्पताल में मौजूद ऐसी ही चार महिलाएं राज्य में रोजगार के मौकों की कमी से नाखुश हैं. उनकी शिकायत है कि सरकार रोजगार पैदा करने के लिए बेहतर कदम नहीं उठा रही है. उनमें से एक महिला कहती है,
"मेरी बेटी ने ग्रेजुएशन पूरा कर लिया है, लेकिन उसे कहीं भी नौकरी नहीं मिल रही है."
कैनिंग में कुछ महिलाओं का कहना है कि बढ़ती महंगाई में 1,500 रुपये तुरंत खत्म हो जाते हैं. आरजी कर रेप और मर्डर केस और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी उनके सवाल हैं. लेकिन एक भी महिला संविधान संशोधन बिल के बारे में बात नहीं करती, जो परिसीमन और संसद तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से जुड़ा है. TMC ने इस बिल के खिलाफ वोट दिया था. शायद इन महिलाओं को इस बारे में पता नहीं है या फिर उन्हें इसकी परवाह नहीं है.
किसी को नहीं पता कि वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) और 91 लाख नामों को हटाने का असल में राजनीतिक तौर पर क्या नतीजा निकलेगा. 23 अप्रैल को पहले चरण में 93.2% की बंपर वोटिंग से किसे फायदा होगा?
ममता बनर्जी और TMC में फर्कTMC को लेकर लोगों में नाराजगी है. इसके बावजूद, वैसा गुस्सा ममता बनर्जी के खिलाफ देखने को नहीं मिल रहा है. लोग TMC और उसकी नेता के बीच फर्क करते हैं. यहां तक कि जब महिलाएं बदलाव की बात करती हैं, तो वे यह बात भी जोड़ती हैं कि दीदी ने उनके लिए क्या किया है.
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मुख्यमंत्री उस सैलाब के सामने एक 'चट्टान' की तरह खड़ी दिखती हैं, जो शायद TMC को सत्ता से बाहर कर देता. फिल्म 'दीवार' में शशि कपूर ने मशहूर डायलॉग बोला था, "मेरे पास मां है." कई बंगालियों के लिए यह कुछ ऐसा है, "हमारे पास दीदी हैं."
लोगों के काम करवाने और वोट दिलवाने वाले TMC के कथित ‘गुंडों’ की ‘गुंडागर्दी,’ ‘जबरन वसूली,’ और ‘भ्रष्टाचार’ की आलोचना के बावजूद ममता बनर्जी के लिए कुछ तबकों में अब भी सहानुभूति है. ममता चाहे हारें या जीतें, वे एक ऐसी हस्ती हैं, जैसी बंगाल समेत देश ने पहले कभी नहीं देखी.
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