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बंगाल चुनाव की 'सेहत' देखेंगे डॉक्टर? EC ने 48 सीनियर फैकल्टी को ड्यूटी पर लगाया

EC की ओर से प्रफुल्ल चंद्र सेन सरकारी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में काम करने वाले डॉक्टरों के पास लेटर गया है. इसमें उन्हें विधानसभा चुनाव 2026 में पीठासीन अधिकारी बनाए जाने की सूचना दी गई. यानी अगर ऐसा होगा, तो चुनाव के दौरान डॉक्टर सफेद कोट और स्टेथोस्कोप (आला) में नहीं, बल्कि, एक चुनावी अधिकारी के तौर पर नजर आएंगे.

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26 मार्च 2026 (अपडेटेड: 26 मार्च 2026, 06:40 PM IST)
West Bengal Election 2026
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने 48 डॉक्टरों के पीठासीन अधिकारी बनाए जाने का नोटिस दिया. (सांकेतिक तस्वीरें- पीटीआई)
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बंगाल चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग (EC) ने 48 सरकारी डॉक्टरों को पीठासीन अधिकारी बनाने का फैसला लिया है. ये डॉक्टर आरामबाग स्थित प्रफुल्ल चंद्र सेन सरकारी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में काम करते हैं. आयोग के इस फैसले के खिलाफ मेडिकल डिपार्टमेंट से जुड़े कुछ लोगों ने विरोध जताया है. उनका कहना है कि अगर 48 डॉक्टर्स चुनाव की ड्यूटी में जाएंगे, तो इमरजेंसी सिचुएशन में काम करना मुश्किल होगा. 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, EC की ओर से प्रफुल्ल चंद्र सेन सरकारी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में काम करने वाले डॉक्टरों के पास लेटर गया है. इसमें उन्हें विधानसभा चुनाव 2026 में पीठासीन अधिकारी बनाए जाने की सूचना दी गई. यानी अगर ऐसा होगा, तो चुनाव के दौरान डॉक्टर सफेद कोट और स्टेथोस्कोप (आला) में नहीं, बल्कि, एक चुनावी अधिकारी के तौर पर नजर आएंगे.

हॉस्पिटल और कॉलेज के एक फैकल्टी मेंबर ने अखबार को बताया कि EC ने जिन डॉक्टरों को चुनाव में ड्यूटी लगाने के लिए शॉर्टलिस्ट किया है, वे सभी सीनियर फैकल्टी मेंबर हैं. इनके साथ ही 14 ऐसे लोगों को भी बुलाया है, जो नॉन-मेडिकल स्टाफ हैं. EC की ओर से आए इस लेटर के बाद कॉलेज और हॉस्पिटल में यह चर्चा का विषय बन गया. कॉलेज के एक सीनियर फैकल्टी मेंबर ने कहा,

“अगर 48 डॉक्टर्स हॉस्पिटल से दूर रहेंगे, तो पेशेंट्स की देखभाल करने में समस्या हो जाएगी. साथ ही छात्रों की पढ़ाई में भी काफी नुकसान होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि हम सभी लोग टीचर हैं.”

संबंधित फैकल्टी के दूसरे मेंबर ने बताया कि यह उनके लिए काफी अजीब है. क्योंकि, उनकी फैकल्टी में केवल 8 लोगों की टीम है. जिनमें से 4 लोगों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई है. और उनकी फैकल्टी जरूरी इमरजेंसी सेवाएं देने का काम करती है. अखबार ने चुनाव में 48 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाए जाने को लेकर कॉलेज के प्रिंसिपल रमा प्रसाद रॉय से बात की. उन्होंने कहा, “मैंने इस मामले पर चुनाव जिलाधिकारी से बात की है. मुझे ऐसा लगता है कि बातचीत में कुछ कमी रह गई थी. इसी वजह से ऐसी सिचुएशन आई है. उन्होंने हमें ऐसा भरोसा दिलाया गया है कि डॉक्टरों को चुनाव ड्यूटी से छूट दी जाएगी."

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रिपोर्ट के मुताबिक, EC की लिस्ट में शामिल डॉक्टरों ने प्रिंसिपल रमा प्रसाद रॉय से बात करने के बाद चुनाव ड्यूटी से अपना नाम वापस लेने के लिए एप्लीकेशन डाल दिया है. 

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