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बंगाल गए UP के IPS अजय पाल शर्मा का विवादों से पुराना नाता है

उत्तर प्रदेश से पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर बंगाल भेजे गए IPS अजय पाल शर्मा का फाल्टा से TMC कैंडिडेट जहांगीर खान से जुड़े लोगों को धमकाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. वीडियो सामने आने के बाद से अजय शर्मा सुर्खियों में है. लेकिन ये पहला मौका नहीं है. इससे पहले भी वे एनकाउंटर, करप्शन के आरोप और शादी के नाम पर फ्रॉड के आरोप को लेकर खबरों में रहे हैं.

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सौरभ
| शुभम सिंह
28 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 12:01 AM IST)
ajay pal sharma mamata banerjee tmc bengal bjp
यूपी से पुलिस ऑब्जर्वर बन कर बंगाल गए IPS अजय पाल शर्मा का विवादों से पुराना नाता रहा है. (इंडिया टुडे)
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पश्चिम बंगाल में वोटिंग से ठीक एक दिन पहले एक वीडियो ने हंगामा मचा दिया है, जिसमें यूपी से पुलिस ऑब्जर्वर बनकर गया एक IPS अधिकारी ममता बनर्जी के कैंडीडेट को लगभग धमकाते हुए नज़र आ रहा है. IPS का नाम तो अजय पाल शर्मा है. कोई इनको सिंघम बताता है, कोई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट. इन टाइटल्स के साथ कई विवाद भी अजय पाल शर्मा की सीवी में नत्थी हैं. उन विवादों पर नजर डालेंगे. साथ ही समझेंगे कि क्या IPS जब किसी चुनावी राज्य में पुलिस ऑब्जर्वर बनकर जाता है तो ऐसी बयानबाजी कर सकता है. असल में क्या काम होता है पुलिस ऑब्जर्वर का? 

ज़हांगीर खान को लेकर IPS अजय शर्मा का ये वीडियो आया तो टीएमसी ने घेर लिया. महुआ मोइत्रा से लेकर पार्टी प्रवक्ता तक हमलावर हुए. अजय पाल के इतिहास से लेकर भविष्य की बातें करने लगे. लेकिन इनको छोड़कर एक नज़र डालते हैं IPS अजय शर्मा पर. पहली बार चर्चा में नहीं आए हैं ये. आप गूगल पर इनका नाम सर्च करेंगे, तो 2015 से लेकर आजतक के लिंक्स भरे पड़े हैं. सब पर तो नहीं, लेकिन कुछेक मामले हम आपको बताते हैं.

12 जनवरी, 2019 को IPS वैभव कृष्णा ने गौतम बुद्ध नगर में SSP का पद संभाला. उनसे पहले SSP थे अजय पाल शर्मा. सितंबर में SSP कृष्णा ने अपने ही पुलिस डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार पर एक रिपोर्ट तैयार की. रिपोर्ट जब बाहर आई तो सामने आया कथित कैश फॉर पोस्टिंग स्कैम. और इसमें नाम था कृष्णा से पहले के SSP अजय पाल शर्मा का. पांच और IPS अधिकारियों का नाम था. हिमांशु कुमार, रामपाल शर्मा, गणेश प्रसाद साहा, सुधीर सिंह और राजीव नारायण सिंह. सरकार ने एक SIT का गठन किया, जिसने अजय पाल के खिलाफ विजिलेंस जांच, हिमांशु के खिलाफ डिपार्टमेंटल इंक्वॉयरी और बाकी अधिकारियों के खिलाफ disciplinary action की सिफ़ारिश की.

23 सितंबर, 2020 को इंडिया टुडे में छपी रिपोर्ट बताती है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के इस मामले में दो FIR दर्ज की गईं. IPS अजय पाल शर्मा के खिलाफ और IPS हिमांशु के खिलाफ. इस मामले में तीन पत्रकारों के नाम भी आए. चंदन राय, स्वप्निल राय और अतुल शुक्ल. इनके खिलाफ मुकदमा लिखा गया. कैश फॉर पोस्टिंग मामले के ही एक प्रसंग में IPS वैभव कृष्ण पर भी एक्शन हुआ था. वही, जिन्होंने इस पूरे मामले को उजागर किया था. जनवरी, 2020 में नोएडा पुलिस प्रमुख के पद से निलंबित कर दिया गया था. उन पर आरोप लगे कि जो शिकायत उन्होंने पांच IPS अधिकारियों के खिलाफ की थी, उसकी जानकारी मीडिया को लीक दी.

लेकिन इस बीच IPS वैभव कृष्ण का नाम एक और मामले में उछल गया. तब के नोएडा पुलिस के चीफ वैभव कृष्ण के, एक लड़की के साथ बातचीत करते हुए तीन वीडियो वायरल हो गए. वैभव कृष्ण ने कहा कि उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है. आरोप तो एक महिला ने अजय पाल शर्मा पर भी लगाए. मार्च, 2019 में दीप्ति शर्मा नाम की एक महिला ने दावा किया वो IPS अजय पाल की पत्नी हैं. लेकिन मामला तब और गंभीर हो गया जब महिला ने कहा कि IPS अजय पाल के साथ शादी का दावा करने के बाद उसके खिलाफ फ्रॉड का केस दर्ज कर लिया गया. वो भी नॉन बेलेबल ऑफेंस में. जमानत ना मिल सके. लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज FIR में महिला ने कहा

मैंने महिला आयोग, यूपी पुलिस, इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी. हर शिकायत के साथ मैंने अपनी शादी के सबूत भी दिए. लेकिन कुछ लोग मेरे गाज़ियाबाद वाले घर आए और मेरा लैपटॉप, डीवीआर, टैबलेट आदि ले गए, जिनमें काफी सबूत थे. मैंने DIG से भी शिकायत की थी. इसके बाद 11 मार्च 2019 को मेरी अजय पाल शर्मा से लड़ाई हुई, जिसके बाद वह मेरे पीछे पड़ गया. मई 2019 में मेरे खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया. 2 लाख रुपये की धोखाधड़ी के एक केस मे, जो किसी अज्ञात महिला के खिलाफ था,  मुझे आरोपी बना दिया गया. 

ये FIR उस समय के यूपी के होम सेक्रेटरी अनिल कुमार सिंह के आदेश के बाद लिखी गई.  FIR में लिखा गया है कि अजय पाल ने अपने पद का दुरुपयोग किया और दीप्ति के पांच मोबाइल फोन में सबूतों को मिटाने करने की साज़िश रची. मीडिया में अजय पाल के सूत्रों के हवाले से खबर चली कि उन्होंने दीप्ति के साथ शादी नहीं की है. और दीप्ति उन्हें कुछ वीडियोज़ के सहारे ब्लैकमेल कर रही है. 

थोड़ा और पीछे चलते हैं. अजय पाल जून 2019 में रामपुर में नए-नए SP बनकर पहुंचे थे. उसी समय रामपुर के सिविल लाइंस थाने में एक छः साल की लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई. 7 मई 2019 को रिपोर्ट दर्ज हुई. डेढ़ महीने तक लड़की का कोई पता न चल सका. लेकिन 22 जून को पतंग लूटने गए कुछ लड़कों ने कांशीराम आवास योजना के बगल के खंडहर में एक बच्ची का सड़ता हुआ शव देखा. बिना कपड़ों का शव पूरी तरह से काला पड़ चुका था. शिनाख्त हुई तो पता चला कि शव उसी लड़की का था. पुलिस को उसी इलाके में रहने वाले नाज़िल पर शक था. नाज़िल ज़ाहिरा के घर के ठीक सामने रहता था. दबिश दी गयी. लेकिन नाज़िल नहीं मिला. 

एफआईआर के अनुसार, गश्त के दौरान पुलिस को अपने मुखबिरों से सूचना मिली कि आरोपी नाज़िल को गांधी समाधि के पास के इलाके में देखा गया. जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. आरोपी नाज़िल ने पुलिस को देखते ही भागना शुरू कर दिया. FIR में लिखा गया कि नाज़िल ने पुलिस पर फायरिंग की. नाज़िल ने पुलिस पर दो राउंड फायर किये, बदले में पुलिस ने भी नाज़िल पर गोली चलाई. नाज़िल के पैरों में गोली लगी. इस एनकाउंटर के बाद SP अजय पाल शर्मा की जय-जयकार होने लगी. लोगों ने अजय शर्मा की खूब तारीफ की. सोशल मीडिया पर छा गए. बदले में शर्मा ने भी धन्यवाद किया लोगों का. फेसबुक और ट्विटर पर लिखा,

बलात्कारी और हत्यारे के खिलाफ हमारी कार्रवाई को मिले ज़बरदस्त समर्थन के लिए मैं आप सभी का आभारी हूं. आज मुझे भारत के अलग-अलग हिस्सों से 1000 से भी ज़्यादा फ़ोन आए, जिनमें लोगों ने मुझे भाई और बेटे की तरह संबोधित किया और बधाई दी. रामपुर पुलिस की टीम का हिस्सा होने पर मुझे गर्व है.

ऐसा माहौल बना कि अजय पाल ने खुद ही नाज़िल को गोली मारी है. लेकिन कहानी में थोड़ा ट्विस्ट था. हमारे रिपोर्टर सिद्धांत ने एनकाउंटर के बाद तफ्तीश की. उसमें पता चला कि अजय पाल एनकाउंटर के समय वहां मौजूद ही नहीं थे. बाद में आए थे. सिविल लाइंस थानाध्यक्ष राधे श्याम ने “दी लल्लनटॉप” को जानकारी दी, कि “गोलीबारी की जानकारी मिलने पर एसपी अजय पाल शर्मा मौके पर पहुंच गए थे. वैसे अजय पाल खुद को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहलवाना पसंद करते हैं. 

द प्रिंट में 2019 में अपनी एक रिपोर्ट में IPS अजय शर्मा के हवाले से लिखा कि, उनके नाम कम-से-कम नौ एनकाउंटर में ऐसे हैं जिनमें मौतें दर्ज हुईं हैं. और उनका दावा है कि उन्होंने एनकाउंटर्स में करीब 190 कथित अपराधियों को घायल किया है. अजय पाल एनकाउंटर का महिमा मंडन भी कर चुके हैं. उन्होंने 2019 में फेसबुक पर एक लंबा पोस्ट लिखा, जिसमें एनकाउंटर को जस्टिफाई करने की कोशिश की. उन्होंने लिखा, 

'एनकाउंटर, यह शब्द सिर्फ शब्द नहीं बल्कि हर उस वर्दीधारी की जिंदगी का एक अध्याय है जिसने किसी वक्त बदमाशों की गोलियों का सामना किया है. यह फिक्र किये बिना कि घने अंधेरे में चली वो गोली किसके लहू से खुद को रंग के निकलेगी, यह गोली उसके जिस्म को छलनी कर देगी तो क्या होगा? वो मर्द यह नहीं सोचता कि क्या इस गोली के उसके साथ युद्ध के बाद वो अपने पैर पर खड़ा हो पाएगा, क्या उसका परिवार फिर से उसको मिल पाएगा, क्या यह दिल इसके अगले पल धड़केगा, क्या यह नजर फिर किसी अपने को देख पाएगी. यह कुछ पलों का खेल होता है जो कई बार आखरी खेल बन जाता है.

रामपुर SP के कार्यकाल में अजय शर्मा ने खूब सुर्खियां बटोंरी. क्योंकि उस समय समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान पर पुलिस ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही थी. आजतक से जुड़े आमिर खान के इनपुट्स के मुताबिक साल 2019 में रामपुर पुलिस ने आज़म खान, उनकी पत्नी ताजीन फातिमा, बेटे अब्दुल्लाह आज़म खान और सहयोगियों पर 65 से ज्यादा नए मुकदमे दर्ज किये. आरोप थे- किसानों की जमीन कब्ज़ाना, फर्जी दस्तावेज, धमकी देना, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण, यूनिवर्सिटी निर्माण में अनियमितता डकैती, धोखाधड़ी, षड्यंत्र जैसे गंभीर आरोप लगे और साल 2019 के अंत तक मामलों की संख्या 80+ तक पहुंच गई. आज़म खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर रेड भी हुई थी, जिसमें चोरी की किताबें मिलने का दावा किया गया था.

इन मामलों से इतर अजय पाल का नाम इस साल भी चर्चा में आया. जब माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बनाम योगी आदित्यनाथ का विवाद चल रहा था. आशुतोष ब्रह्मचारी नाम के एक व्यक्ति ने शंकराचार्य पर आरोप लगाया कि उन्होंने बटुकों के साथ यौन उत्पीड़न किया. शंकराचार्य के खिलाफ FIR दर्ज हुई. FIR प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज हुई. इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने कुछ तस्वीरें पेश कीं. उन्होंने न सिर्फ आशुतोष बल्कि यूपी पुलिस पर भी सवाल उठा दिए. अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि तस्वीरों में शिकायतकर्ता आशुतोष, प्रयागराज पुलिस के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजय पाल शर्मा के साथ दिख रहे हैं. तस्वीर में IPS अजय पाल, आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ केक काटते हुए नजर आ रहे हैं. 

अब फिर से बंगाल की घटना पर लौटते हैं. अब बात पुलिस पर्यवेक्षक की. जिस भूमिका में अजय पाल शर्मा पश्चिम बंगाल भेजे गए हैं. निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए दूसरे राज्य के कई आला पुलिस अधिकारियों को चुनावी राज्यों में भेजा जाता है. इनका असली काम सुरक्षा बलों की तैनाती करना, चुनाव के वक्त कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालना होता है. ऐसे अधिकरियों को पुलिस पर्यवेक्षक कहते हैं. ये IPS अधिकारी होते हैं. जो चुनावी राज्य में आम लोगों और पुलिस प्रशासन के बीच तालमेल बिठाते हैं. 

इनके क्या-क्या काम हो सकते हैं, इसका पूरा ब्योरा 2023 में जारी पुलिस हैंडबुक में दिया है. अब जैसे सुरक्षा बलों की चुनावी राज्य में तैनाती करनी है. तो सबसे पहले उस राज्य का नोडल अधिकारी वहां के मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ मिलकर प्लान तैयार करता है. फिर उसे एक कमेटी मंजूरी देती है. और फाइनली वो जाता है पुलिस ऑब्जर्वर और वरिष्ठ पर्यवेक्षकों के पास. प्लान को वो ध्यान से चेक करते हैं. कोई बदलाव हो तो वो भी करते हैं. यही काम  जिलेवार करने के लिए पहले प्लान संबंधित जिले का चुनाव अधिकारी और SP बनाते हैं. उसे भी फाइनल पुलिस ऑब्जर्वर और वरिष्ठ पर्यवेक्षक ही करते हैं.  

किस जिले में कौन सा मतदान केंद्र सुरक्षा के लिहाज से क्रिटिकल है, इसकी पहचान करने में अहम रोल पुलिस ऑब्जर्वर का ही होता है. ये काम चुनाव आयोग के बनाए नियमों के तहत करना होता है. फाइनल मुहर पुलिस ऑब्जर्वर की ही लगती है. पुलिस ऑब्जर्वर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों यानी CAPF के साथ मिलकर काम करते हैं. CAPF का काम होता है मतदान केंद्र के अंदर की गतिविधियों पर नज़र रखना. किसी तरह की दिक्कत होने पर CAPF के जवान पुलिस ऑब्जर्वर को जानकारी देते हैं. 

पुलिस ऑब्जर्वर की नियुक्ति चुनाव आयोग करता है. इस बार आयोग ने पश्चिम बंगाल में 84 पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे. लेकिन दूसरे चरण के लिए 11 एक्सट्रा पुलिस पर्यवेक्षक पश्चिम बंगाल भेजे गए हैं. अब सवाल ये उठता है कि जो अजय पाल शर्मा कर रहे हैं. जैसे वीडियो उनके बंगाल से आ रहे हैं. क्या वो एक पुलिस पर्यवेक्षक का  काम है. क्या उनकी बयानबाजी, कथित धमकी, ये सब उनके कार्यक्षेत्र में आता है? मुख्य चुनाव आयुक्त रहे एसवाई कुरैशी की मानें तो ऑब्जर्वर का ये काम बिल्कुल नहीं है. उनका काम चुनाव आयोग के आंख और कान के तौर पर काम करना है. उनको किसी भी तरह का आदेश जारी करने का कोई अधिकार नहीं होता है. 

वीडियो: राजधानी: बंगाल चुनाव 'TMC बनाम IPS अजय पाल शर्मा' कैसे हो गया?

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