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अखिलेश यादव की 'वर्चुअल रैली' में शामिल होने पर 2500 कार्यकर्ताओं पर FIR

कोरोना खतरे को देखते हुए चुनाव आयोग ने चुनावी जमावड़ों पर प्रतिबंध लगाया था.

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15 जनवरी 2022 (अपडेटेड: 15 जनवरी 2022, 08:10 AM IST)
लखनऊ में सपा पार्टी के ऑफिस पर जमा हुए हजारों कार्यकर्ता (साभार पीटीआई)
लखनऊ में सपा के ऑफिस पर जमा हुए हजारों कार्यकर्ता (साभार: पीटीआई)
कोरोना वायरस महामारी के खतरे को देखते हुए चुनाव आयोग ने पांच राज्यों के चुनावों के संबंध में रैली, जनसभा, रोड शो इत्यादि पर प्रतिबंध लगााया हुआ है. लेकिन इस बीच 14 जनवरी को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी की तरफ से एक वर्चुअल रैली हुई. इसमें हजारों की तादाद में पार्टी कार्यकर्ता सपा दफ्तर के बाहर इकट्ठा हुए.
अब खबर सामने आ रही है कि इस रैली को लेकर चुनाव आयोग सख्त है. एक तरफ आयोग ने जहां एसपी समेत दूसरे पुलिस अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है, वहीं लापरवाही बरतने के कारण एक थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया है. इन धाराओं में मामला इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को लखनऊ के गौतम पल्ली थाना क्षेत्र में स्थित समाजवादी पार्टी के ऑफिस के बाहर करीब ढाई हजार से ज्यादा कार्यकर्ता एक वर्चुअल रैली में शामिल होने के लिए जमा हुए. इस रैली को पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने संबोधित किया. लखनऊ पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने इंडिया टुडे को बताया कि आचार संहिता को तोड़ने के कारण करीब ढाई हजार लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 (सरकारी आदेश का उल्लंघन), 269 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलने की आशंका हो), 270, 341 (किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना) और महामारी अधिनियम के तहत इनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है.
वहीं इस मामले में लखनऊ के डीएम अभिषेक प्रकाश ने इंडिया टुडे को बताया
"जैसे ही हमें रैली की जानकारी मिली हमने तुरंत पुलिस बल और एक मैजिस्ट्रैट को वहाँ से भीड़ हटाने के लिए भेज दिया. मैजिस्ट्रैट की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी."
सपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमें के बारे में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल का कहना है,
"ये एक वर्चुअल आयोजन था, जो हमारे ऑफिस के अंदर ही आयोजित किया गया था. हमने किसी को नहीं बुलाया, लोग खुद ही आए थे. हम सभी कोविड प्रोटोकॉल के आधार पर की काम कर रहे थे. भीड़ तो भाजपा नेताओं के घरों पर भी लगती है, बाजारों में भी भीड़ होती है, लेकिन इनको हम से ही दिक्कत है."
'योगी आदित्यनाथ पर हो FIR' दूसरी तरफ इस मामले पर स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि उनको इसकी जानकारी नहीं है कि लोगों पर मामला दर्ज हुआ है. लेकिन अगर मुकदमा दर्ज हुआ ही है तो सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा दर्ज करना चाहिए. मौर्य ने कहा कि शुक्रवार को गोरखपुर में मुख्यमंत्री ने आचार संहिता के नियमों को तोड़कर हजारों लोगों के साथ खिचड़ी खाई, उनके खिलाफ FIR करें.
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट

इस मामले में कार्रवाई करते हुए निर्वाचन आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर बताया कि आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में आयोग ने लखनऊ के जिला अधिकारी की रिपोर्ट को संज्ञान में लेकर कार्रवाई की. आयोग ने इस मामले में गौतम पल्ली के थाना प्रभारी दिनेश सिंह बिष्ट को लापरवाही बरतने के कारण तुरंत सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही आयोग ने एसीपी अखिलेश सिंह और लखनऊ मध्य विधान सभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर गोविन्द मौर्य से स्पष्टीकरण मांगा है.

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