मालदा में SIR से जुड़े अफसर 9 घंटे तक बंधक बने रहे, सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार की लगाई फटकार
SIR प्रक्रिया से जुड़े ये अधिकारी उन मामलों का रिव्यू कर रहे थे जिनका मामला जांच के अधीन है. इससे यह तय किया जाना था कि वोटर्स को लिस्ट में रखा जाए या हटा दिया जाए. यह काम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया जा रहा था. लेकिन इन्हें बंधक बना लिया गया.

बंगाल में चुनावों से पहले वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया चल रही है. 1 अप्रैल की शाम को लोगों ने मालदा जिले के कालीचौक स्थित BDO ऑफिस में SIR के काम से जुड़े 7 जुडिशियल ऑफिसर्स को बंधक बना लिया. सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए, उनकी सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने बंगाल को ‘सबसे अधिक ध्रुवीकरण वाला राज्य’ (Most Polarised State) बताते हुए इस घटना को पूर्व-नियोजित और किसी मकसद से प्रेरित करार दिया है. कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह इस मामले की जांच NIA या CBI को सौंप दे.
ये अधिकारी उन मामलों का रिव्यू कर रहे थे जिनका मामला जांच के अधीन है. इससे यह तय किया जाना था कि वोटर्स को लिस्ट में रखा जाए या हटा दिया जाए. यह काम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया जा रहा था. लेकिन इन्हें बंधक बना लिया गया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इन अधिकारियों को करीब नौ घंटे बाद, रात के करीब 1 बजे, पुलिस की एक टीम ने रेस्क्यू किया. लेकिन मामला इतने पर ही नहीं रुका. जब अधिकारियों को वहां से निकाला जा रहा था, तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी पर भी पत्थर चलाए. कुछ ने तो पुलिस की गाड़ियों का पीछा भी किया.
कुछ देर बाद ये विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए और आसपास के इलाकों में भी फैल गए. प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने बांस और फर्नीचर का इस्तेमाल करके नेशनल हाईवे-12 को भी जाम कर दिया. साथ ही कुछ लोगों को टायर जलाते हुए भी देखा गया.
सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ लगाईअधिकारियों को बंधक बनाने का मामला 2 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने इस मामले में ममता सरकार की कड़ी फटकार लगाई. उन्होंने इस घटना को आपराधिक नाकामी करार दिया. सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, एसपी मालदा और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर मालदा को भी फटकार लगाई. साथ ही CJI ने बंगाल के वकील को फटकार लगाते हुए कहा,
‘रात 11 बजे तक आपका कलेक्टर वहां मौजूद नहीं था. मुझे रात में ही मौखिक रूप से बहुत सख्त आदेश देने पड़े. एक 5 साल के बच्चे को खाना और पानी भी नहीं दिया गया.’
CJI ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों को कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के दखल के बाद ही रिहा किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बंगाल में हर कोई सिर्फ राजनीतिक भाषा बोलता है. CJI ने कहा,
‘यह घटना न सिर्फ न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की एक बेशर्मी भरी कोशिश है, बल्कि यह इस कोर्ट के अधिकार को भी चुनौती देती है. हमने इतना बंटा हुआ राज्य पहले कभी नहीं देखा. यहां तक कि कोर्ट के आदेशों का पालन करने में भी राजनीति झलकती है.’
आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्देश भी जारी किए. इनमें ECI को सभी न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों को तैनात करने का निर्देश दिया गया. कोर्ट ने केंद्रीय बलों को उन न्यायिक अधिकारियों के घरों पर भी तैनात करने का निर्देश दिया, जिन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है.
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