जितनी उठापटक पिछले दिनों समाजवादी पार्टी में हुई उतनी ही सोशल मीडिया पर. मुलायमसिंह के आज्ञाकारी बेटे टीपू अचानक से ‘मुख्यमंत्री अखिलेश यादव’ के अवतार में आगए. और फिर ऐसा रायता फैला कि ये न नेताजी और न उनके भाई-बंधुओं से सिमटा. सबनेअपनी धाक दिखाई. अफसरों के वर्चस्व का ऐसा रिएक्शन हुआ कि रोज समीकरण बदले. सबकुछऐसा लगा जैसे अखिलेश यादव की साफ-सुथरी और विकासपुरुष वाली छवि रचने के लिए सबड्रामा किया गया हो.अखिलेश का पलड़ा इसलिए भी भारी निकला, क्योंकि उनका पीआर कुछ खास नौकरशाह देखतेहैं. जिसका विलाप चचा शिवपाल ने भी कई कई बार किया कि भतीजे के अफ़सर उनकी बात नहींसुनते. साढ़े तीन मुख्यमंत्री से विकास पुरुष बनने की कवायद में अखिलेश यादव के तीनखास नायक हैं, जिनके दम पर ही मुख्यमंत्री सियासत की दौड़ में आगे निकल गए. 1. नवनीतसहगल सवा छह फुट के कद वाले नवनीत सहगल देखने में जितने कद्दावर लगते हैं इस सरकारमें उनका कद इससे कहीं ज़्यादा ऊंचा है. मायावती सरकार में दूसरे सबसे खास अफसर कीहैसियत रखने वाले सहगल को अखिलेश सरकार ने आते ही धर्मार्थ कार्य जैसे विभाग मेंभेज कर साइड लाइन कर दिया था. सरकार के पहले दो सालों में जब मुज़फ्फरनगर जैसीघटनाओं के बाद सरकार को साख बचानी मुश्किल पड़ रहा थी तो मीडिया मैनेजमेंट औरलाइज़निंग में माहिर माने जाने वाले सहगल को ‘प्रमुख सचिव सूचना’ की ज़िम्मेदारी दीगई. आज ये सहगल की ही वजह है कि तमाम विवादों के बीच भी अखिलेश यादव की इमेज पाकपाकीजा बनी हुई है. वैसे मीडिया को हैंडल करने से अलग भी सहगल ‘आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे’ को रिकॉर्ड समय और कीमत में पूरा करवा कर मुख्यमंत्री की तारीफ हासिल कर चुकेहैं.अखिलेश के साथ नवनीत सहगल 2. नवनीत सिकेरा अगर कहा जाए कि नवनीत सिकेरा देश के सबसेखतरनाक आईआईटियन हैं तो शायद यह अतिश्योक्ति न हो. 60 से ज़्यादा एनकाउंटर कर चुकेइस आईपीएस-इंजीनियर को अखिलेश यादव ने बदनाम लॉ एण्ड ऑर्डर वाले प्रदेश में '1090विमेन पावर लाइन' की ज़िम्मेदारी दी है. इस हेल्पलाइन पर घरेलू हिंसा, सोशल मीडियापर परेशान करने जैसी हरकत करने वाले मनचलों को नवनीत सिकेरा की टीम कोने में लेजाकर चुपचाप समझा कर, सोशल मीडिया से प्रोफाइल बैन करवाने जैसे ऐक्शन लेकर ही मामलासुलटा देती है. अब तक 5 लाख से ज़्यादा मामले सुलझा चुकी 1090 पावर लाइन में इतनीगोपनीयता रखी जाती है कि लड़की के घरवालों को भी बिना लड़की की मर्ज़ी के शिकायत कीडीटेल नहीं दी जाती है. फेसबुक पर सक्रिय सिकेरा बीच-बीच में ठरकी लोगों कीतस्वीरें भी उनसे दूर रहने की हिदायत के साथ डालते रहते हैं. वैसे कुछ दिनों पहलेअखिलेश यादव ने ही एक कार्यक्रम में कहा था कि वो खुद नवनीत सिकेरा को लखनऊ से दूरनहीं जाने दे रहे हैं.नवनीत सिकेरा 3. जी एस नवीन कुमार सेक्रेटरी बहुत कूल शख्सियत के मालिक हैं जी एसनवीन कुमार. अखिलेश यादव के कितने खास हैं इसको सिर्फ इतने से ही समझा जा सकता हैकि जहां 2007 के ज़्यादातर आईएस अभी भी जिलों की कलेक्टरी कर रहे हैं. नवीन कुमारस्पेशल सेक्रेटरी टू सीएम बनकर मुख्यमंत्री के बड़े-बड़े काम देखते हैं. इंटरनेट,सोशल मीडिया, डीप-वेब और एथिकल हैकिंग की अच्छी खासी समझ रखने वाले नवीन के ही दिशानिर्देशों पर मुख्यमंत्री और सरकार के ट्विटर और फेसबुक पेजों की दिशा तय होती है.अखिलेश यादव की सोशल मीडिया पर मिस्टर क्लीन वाली छवि को बनाए रखने और सरकार कीउपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी नवीन कुमार के ज़िम्मे ही है. जोशसे भरे रहने वाले नवीन अक्सर अपना लक्ष्य उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर कामोस्ट प्रिफर्ड स्टेट बनाना बताते हैं. ये नवीन के ही काम करने का ढंग है किविवादास्पद बयानों वाली आज की सियासत में आपको अखिलेश यादव से जुड़े आधिकारिकहैंडल्स पर कभी भी विवाद पैदा करने वाली चीज़ें नहीं मिलेंगी. अखिलेश यादव केसमर्थकों में जोश भरने के लिए चलाए गए ‘काम बोलता है’ कैम्पेन भी नवीन कुमार की हीसोच है.जी एस नवीनइनके अलावा मुख्यमंत्री के खास अधिकारियों में 'दि इकोनॉमिस्ट' सेसम्मानित रिक्ज़िन सैम्फिल भी हैं जो डीएम के तौर पर अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली केलिए खासे चर्चित रहे हैं. सैम्फिल आजकल स्पेशल सेक्रेटर के तौर पर समाज कल्याण सेजुड़ी योजनाओं पर ध्यान देते हैं.https://www.youtube.com/watch?v=-SNYbzFvWdQ--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंअखिलेश यादव का सामान कमरे से निकाल फ़ेंका था शिवपाल ने!यूपी विधानसभा चुनाव में सपा को टक्कर देने आया एक और यादव परिवारक्या इंदिरा गांधी को 'दुर्गा' कह कर पलट गए थे अटल बिहारी?