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तेलंगाना में KCR की पार्टी को प्रचंड बहुमत, जूनियर ओवैसी भी जीते

राज्य में पहली बार हुए हैं चुनाव.

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11 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 11 दिसंबर 2018, 08:21 AM IST)
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मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के बंगले में रहने वाले एक कुत्ते की बीमारी के बाद मौत हो गई.
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शुरुआती रुझान- TRS - 86 सीटें* Congress -21 सीटें* AIMIM - 06 सीटें* BJP - 02 सीटें* TDP02 सीटें* AIMIM के अकबरुद्दीन ओवैसी हैदराबाद के चंद्रायनगुट्टा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीत गए हैं. इंडिया का सबसे युवा राज्य है तेलंगाना जहां 7 दिसंबर को चुनाव हुए. बतौर पूर्ण राज्य यहां पहली बार चुनाव हुए हैं. आंध्र प्रदेश में 1999 से लेकर 2014 तक विधानसभा और लोकसभा के चुनाव साथ हुए, मगर 2014 में जब तेलंगाना अलग राज्य बना तो इस बार भी यहां चुनाव लोकसभा के साथ ही होने थे. राज्य के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव नहीं चाहते थे कि लोकसभा चुनाव के साथ यहां चुनाव हों. इसलिए सितंबर में विधानसभा भंग कर दी गई. केसीआर नहीं चाहते थे कि लोकसभा चुनाव के दौरान वो बीजेपी और महागठबंधन की टक्कर में फंसें. अगर लोकसभा के साथ चुनाव होते तो केसीआर की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति को न चाहते हुए भी कांग्रेस के साथ खड़ा होना पड़ता जो कि इनकी घोर प्रतिद्वंदी पार्टी है. टीआरएस का सीधा मुकाबला 'प्रजाकुटामी' गठबंधन से है. इसका मतलब है लोगों का गठबंधन. इसमें तेलंगाना कांग्रेस, टीडीपी, सीपीआई, तेलंगाना जन समिति जैसी पार्टियां एक छतरी के नीचे आई हैं. इस गठबंधन के मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं तय हुआ है. कांग्रेस का नेतृत्व वहां पूर्व मंत्री उत्तम कुमार ने किया है, वहीं टीजेएस के प्रोफेसर कोडनदरम को इन पार्टियों को एक साथ लाने का क्रेडिट दिया जा रहा है. बीजेपी की उपस्थिति यहां न के बराबर है. मुद्दे क्या रहे: - किसानों की परेशानियां. केसीआर सरकार ने किसानों से जुड़ी कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं मगर वहां किसान अपनी फसल की बढ़ती लागत और अस्थिर आमदनी से परेशान दिखे हैं. - इस दौरान अलग अलग स्कीमों के लिए भूमि अधिग्रहण से भी किसान गुस्से में रहे. - इस वक्त तेलंगाना पर सबसे बड़ी मार बेरोजगारी की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक सूबे के करीब 40 फीसदी युवा जिनकी उम्र 20-24 साल है, बेरोजगार हैं. और ये किसी भी राज्य से ज्यादा है. - केसीआर से सूबे में दलित भी नाराज दिखे हैं. प्रणय कुमार का दिन दिहाड़े मर्डर और संदीप और माधवी पर अटैक के बाद दलितों में ये भावना आई है कि उनका इस्तेमाल राजनीतिक तौर पर हो रहा है. 2014 में क्या नतीजे थे - कुल सीटें - 119 TRS - 63 Congress - 21 TDP - 15 BJP - 5

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