नाक और साख. यही चुनौतियां हैं इस वक्त कांग्रेस और सपा के सामने, जो बीजेपी नेउन्हें दी हैं. इनको बचाने का रास्ता इनके पास है. गठबंधन. इसकी ख्वाहिश तो दोनोंपार्टियों में है और संभवत: ये हो भी जाएगा, पर उत्तर प्रदेश में तीन ऐसी विधानसभासीटें हैं, जो गठबंधन को लठबंधन बना रही हैं.आइए बताते हैं कौन सी हैं ये तीन सीटें और क्या समस्या है यहां पर-1. अमेठीगायत्री प्रजापतियहां की अमेठी विधानसभा सीट पर गायत्री प्रजापति ने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है.वो यहां से विधायक हैं. गायत्री मुलायम के बेहद करीबी हैं, जो सार्वजनिक मंचों परउनके सामने साष्टांग लोट जाते हैं. इसी स्वामिभक्ति के बूते उन्होंने अखिलेश कीइच्छा के खिलाफ सपा में वापसी की थी. अब चूंकि वो विधायक हैं, तो अपना टिकट पक्कामानकर चल रहे हैं. फायदे के लिहाज से पार्टी उन्हें टिकट दे भी सकती है. शुबहा बसइसीलिए है कि इनका नाम शिवपाल की लिस्ट में था, जिसे अखिलेश ने खारिज कर दिया था.संजय के साथ अमितापर इस सीट पर दावा करने वाली दूसरी पार्टी हैं कांग्रेस की अमिता सिंह. अमेठीराजपरिवार के पुराने कांग्रेसी संजय सिंह की पत्नी. गायत्री 2012 में इन्हीं कोहराकर विधायक बने थे. अमिता भी अमेठी की सीट पर कैंपेनिंग कर रही हैं. अमेठी गांधीपरिवार का गढ़ है, ऐसे में उन्हें यकीन है कि गठबंधन के बाद अमेठी से टिकट उन्हेंही मिलेगा. दोनों पार्टियों में इस सीट पर सहमति नहीं बन रही है.2. स्वार (रामपुर)रामपुर की स्वार सीट का मामला अमेठी से एकदम उलट है. 2012 में इस सीट पर नवाब काजिमअली खान उर्फ नवेद मियां ने जीत दर्ज की थी. कांग्रेस के टिकट पर. उन्होंने बीजेपीकी लक्ष्मी सैनी को हराया था. इस आधार पर कांग्रेस ये सीट चाहती है.आजम और उनके बेटे अब्दुल्लावहीं सपा स्वार की सीट पर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खानको चुनाव लड़ाना चाहती है. आजम खान की राजनीति रामपुर में नवाब खानदान के खिलाफलड़ने के इर्द-गिर्द घूमती है. इसे जारी रखते हुए वो अपने बेटे को नवेद मियां केखिलाफ उतारना चाहते हैं. पार्टी इससे सहमत है. स्वार छोड़िए, रामपुर की पांचोंविधानसभा सीटों पर अखिलेश और शिवपाल की लिस्ट में कोई अंतर नहीं था. इन पांचोंसीटों पर आजम की मर्जी के लोग चुनाव लड़ते हैं. ये सीट भी सपा-कांग्रेस के बीच फांसबनी हुई है.3. लखनऊ कैंट (लखनऊ)रीता बहुगुणा जोशीलखनऊ की कैंट सीट का मामला बहुत ही उलझा हुआ है. लोकसभा चुनाव में तो लखनऊ बीजेपीका गढ़ रहता है, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में यहां सपा ने बाजी मारी थी. सपा केखाते में पांच में से तीन सीटें आई हैं, जबकि कांग्रेस-बीजेपी को एक-एक सीट मिलीथी. कैंट सीट पर रीता बहुगुणा जोशी ने कांग्रेस के टिकट पर बीजेपी के सुरेश तिवारीको हराया था. लेकिन, अब रीता बीजेपी में हैं. कांग्रेस खुद को इस सीट पर मजबूतमानते हुए यहां अपना कैंडिडेट उतारना चाहती है.अपर्णा यादवसपा यहां से मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव को उतारना चाहती है. सपा का मानना हैकि कांग्रेस की गैर-मौजूदगी में वो ये सीट आसानी से निकाल लेगी. दूसरा, लखनऊ सेयादव कुनबे के एक कैंडिडेट के लड़ने से आसपास की सीटों पर भी प्रभाव पड़ेगा. इस सीटपर अभी बात नहीं बनी है.--------------------------------------------------------------------------------इन तीन सीटों के अलावा रायबरेली और अमेठी के पूरे इलाके पर भी दोनों पार्टियों मेंसहमति नहीं बन पाई है. इन दोनों शहरों में कुल 10 सीटें हैं, जिनमें कांग्रेस केपास 2 ही सीटें हैं. अधिकतर सीटों पर सपा काबिज है. ये दोनों शहर गांधी परिवार केगढ़ हैं. इस गरिमा को बरकरार रखने के मकसद से कांग्रेस इन पर दावा कर रही है, जबकिसपा का मानना है कि ये सीटें कांग्रेस को देने से कार्यकर्ता नाराज हो सकते हैं.-------------------------------------------------------------------------------- इन तीन बड़ी सीटों के अलावा भी अखिलेश के सामने कुछ परेशानियां हैं. पार्टी काअंदरूनी बवाल खत्म हो गया है, लेकिन टिकट की मारामारी अभी नहीं थमी है. देखिएअखिलेश को और किन चीजों से जूझना है.रामनगर की सीट पर सपा में अंदरूनी खींचतानअरविंद गोपबाराबंकी जिले की रामनगर सीट ऐसी है, जिस पर सपा के अंदर ही खींचतान है. यहांअखिलेश यादव अपने करीबी मंत्री अरविंद सिंह गोप को टिकट देना चाहते हैं, जिन्होंने2012 में बीएसपी के अमरेश कुमार को हराकर सीट जीती थी, जबकि शिवपाल और मुलायम बेनीप्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा को टिकट देने के हक में हैं. इस सीट को लेकर बेनीकई बार मुलायम और अखिलेश की चौखट के चक्कर काट चुके हैं. हालांकि, संभावना यही हैकि टिकट गोप को मिलेगा, क्योंकि अखिलेश-बेनी के रिश्ते तल्ख हैं. कुनबे में बवाल केसमय बेनी ने कई बार अखिलेश-विरोधी बयान दिए थे.https://www.youtube.com/watch?v=lt4SVl4_MR0&t=1sRLD ने खुद को किया गठबंधन से बाहरसीटों पर मची हायतौबा के बीच RLD के महासचिव त्रिलोक त्यागी ने बयान दिया है किउनकी पार्टी अब गठबंधन न करके अकेले चुनाव लड़ेगी. त्यागी ने बताया कि RLD 40 सीटेंमांग रही थी और 25 तक पर राजी हो सकती थी. RLD का मामला सपा ने कांग्रेस के पालेमें डाल दिया था. सपा ने कांग्रेस को 100 सीटें देते हुए कहा था कि वो RLD के साथआपस में सहमति बना ले. कांग्रेस RLD को 20 सीटें देने को राजी थी, जिनमें से 3 ऐसीथीं, जो RLD ने मांगी नहीं थीं. इन सीटों पर BSP के जीतने की संभावना है.साथ ही, त्यागी ने ये भी कहा कि पिछले दो दिनों में सपा और RLD के शीर्ष नेताओं मेंकोई बातचीत नहीं हुई है. ऐसे में पार्टी अलग लड़ने का मन बना चुकी है. कांग्रेस कीतरफ से गठबंधन पर बात कर रहे गुलाम नबी आजाद भी गठबंधन में सिर्फ सपा और कांग्रेसका नाम लेते रहे. RLD के सवाल पर उन्होंने 'सॉरी' बोलकर पल्ला झाड़ लिया.https://www.youtube.com/watch?v=AJCmImuMRM8&t=2sक्या है पिछला रिकॉर्ड2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने 224 सीटों पर जीत दर्ज की थी. बीएसपी ने 80,बीजेपी ने 47 और कांग्रेस ने 28 सीटें जीती थीं. RLD को 9 सीटें मिली थीं, जबकि 24सीटों पर अन्य कैंडिडेट जीते थे.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:विधायकी भौकाल नाक पर, आचार संहिता ताक पर!1993 में यूपी ने बनाया था ऐसा चुनावी रिकॉर्ड, जो न कभी टूटा है, न कभी टूटेगा!इस तरकीब से मुलायम ने बीजेपी को दी थी ऐसी पटखनी कि वो कभी उबर नहीं पाईआजम खान में ऐसा क्या है, जो उनकी बाप-बेटे दोनों से छनती हैभितरघात की ये पांच खबरें मोदी-शाह के माथे पर पसीना ले आएंगी