नया साल आना था. आ चुका. धरातल पर लौटिए. सपा का पार्टी प्रतिनिधियों का राष्ट्रीयअधिवेशन लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में हुआ. इस अधिवेशन में शिवपाल यादव कोपार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और अमर सिंह को पार्टी से बाहर का हीरास्ता दिखा दिया गया. ये संकेत पहले ही मिल गए थे, क्योंकि जहां अधिवेशन हुआ वहांसे शिवपाल के होर्डिंग-पोस्टर गायब थे. आज सकन्ने-सकन्ने नौ बजे शिवपाल मुलायम सेमिलने भी पहुंचे थे. बड़ी बात ये कि इस्तीफे की पेशकश किए. ऐसा बताया जा रहा है. यूक्नो न. खैर अब उन्हें इस्तीफे की जरूरत नहीं. क्योंकि बाहर का रास्ता सीएम ने खुदही दिखवा दिया है. इस अधिवेशन के कर्ता-धर्ता रामगोपाल यादव थे. उधर मुलायम अंकिलने अधिवेशन को असंवैधानिक बता दिया था. रामगोपाल यादव मंच पर आए. बोले, पार्टी मेंटिकिट बंटवारा हुआ तो उसमें मनमानी हुई. किसने की, शिवपाल ने. और दो लोगों नेपार्टी के खिलाफ साजिश की. इस अधिवेशन में तीन प्रस्ताव पेश किए गए. पहला ये किअखिलेश पार्टी अध्यक्ष हो जाएं. दूसरा नेताजी यानी मुलायम सिंह सिर्फ मार्गदर्शकबनकर पार्टी की रहनुमाई करें. पार्टी का सारे देश में जो कुछ भी है सब अखिलेश तयकरें. तीसरा प्रस्ताव ये था कि शिवपाल यादव को तत्काल प्रदेश पार्टी अध्यक्ष पद सेहटाया जाए और उसी तत्काल वाली स्पीड से राज्य सभा सांसद अमर सिंह को पार्टी से बाहरकर दिया जाए. अधिवेशन के प्रस्ताव रामगोपाल सिंह यादव ने सुनाए. और ये भी कहा किनेताजी मार्गदर्शक करें. हर प्रस्ताव पर रामगोपाल वहां मौजूद लोगों से ऐसे हाथ उठवारहे थे जैसे क्लास में अटेंडेंस लग रही हो. खूब हल्ला था. अखिलेश के समर्थकनारेबाज़ी कर रहे थे. मुलायम सिंह को मार्गदर्शक करने वाली बात कहकर उन्हें सपा के'लाल कृष्ण अडवाणी' बना दिया गया है. जैसे वो बीजेपी में मार्गदर्शक बनकर रहे गयेहैं. इन प्रस्तावों को सामने रखने के बाद माइक संभाला सीएम अखिलेश यादव ने. अखिलेशने कहा, 'इन्होंने पार्टी के खिलाफ साजिश करके पार्टी को नुकसान पहुंचाया. जिसकोबर्दाश्त नहीं किया जा सकता. मैं जितना सम्मान पहले नेता जी का करता था. उससे भीज्यादा करूंगा. नेताजी के खिलाफ साजिश हुई. तो बेटा होने की वजह से मेरी ज़िम्मेदारीबनती है कि मैं उस साजिश को नाकाम करूं. सरकार हम बनाने जा रहे हैं. मगर इस साजिशने पार्टी को नुकसान पहुंचाया. ऐसे लोग जो सरकार नहीं बनान चाहते हैं. और वो लोग जोसरकार बनाना चाहते हैं. तो इन दोनों में नेता जी को उन्हीं से ख़ुशी होगी जो सरकारबनाना चाहते हैं. नेताजी ने मुझे इसलिए ज़िम्मेदारी दी है कि इस बार भी सरकारसमाजवादी की बने.' अखिलेश ने कहा, 'मेरे पास जब पत्र आया तो उस वक्त मेरे साथ जितनेलोग बैठे थे, मैंने तभी कह दिया था, इसमें कोई अच्छा संदेश नहीं होगा. खोला तो पताचला वो नोटिस है. मुझे और रामगोपाल जी को पार्टी से बाहर कर दिया गया. कुछ लोग उनसेकुछ भी टाइप कराकर भेज सकते हैं., क्योंकि वो सरकार बनने नहीं देना चाहते. वोनेताजी के खिलाफ साजिश करने में लगे हैं. नेता जी मेरे पिताजी है और मैं उनका बेटाहूं. बेटा ही रहूंगा. इसमें कोई लाख कोशिश कर ले. मगर साजिश नहीं कर सकता और जबज़रुरत पड़ेगी तो नेता जी पार्टी को भी बचायेंगे और फैमिली को भी.'https://www.youtube.com/watch?v=AJCmImuMRM8